अभाविप के ‘सर्जना निखार शिविर’ में छात्राओं ने सीखे पत्रकारिता, मेहंदी, मिथिला पेंटिंग और नृत्य के गुर, विशेषज्ञों ने निखारी रचनात्मक प्रतिभा

दरभंगा न्यूज।
दरभंगा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) द्वारा आयोजित ‘सर्जना निखार शिविर’ में छात्राओं को व्यक्तित्व विकास, रचनात्मक कौशल और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। शिविर में पत्रकारिता, मेहंदी कला, मिथिला पेंटिंग, नृत्य तथा अन्य रचनात्मक विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों से नई तकनीकों एवं व्यावहारिक जानकारियों को सीखा।

आयोजकों ने बताया कि शिविर का उद्देश्य केवल कला और कौशल का प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि छात्राओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और सामाजिक जागरूकता का विकास करना भी है। विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान और प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

पत्रकारिता सत्र में डिजिटल मीडिया की भूमिका पर विशेष चर्चा

शिविर के प्रमुख आकर्षणों में पत्रकारिता पर आयोजित विशेष सत्र रहा। वरिष्ठ पत्रकार संतोष दत्त झा ने छात्राओं को पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों, समाचार लेखन, तथ्यपरक रिपोर्टिंग, साक्षात्कार की कला तथा मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार लिखने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज और लोकतंत्र के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु भी है। एक पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी उसकी विश्वसनीयता, निष्पक्षता और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता होती है।

डिजिटल युग में बदल रही है पत्रकारिता

संतोष दत्त झा ने कहा कि तकनीकी विकास के साथ पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आज पारंपरिक अखबारों और टेलीविजन के साथ-साथ डिजिटल मीडिया, वेब पोर्टल, मोबाइल पत्रकारिता और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचना के प्रमुख माध्यम बन चुके हैं।

उन्होंने छात्राओं को बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सूचना के प्रसार को तेज और व्यापक बनाया है, लेकिन इसके साथ फर्जी खबरों (फेक न्यूज) और भ्रामक सूचनाओं की चुनौती भी बढ़ी है। इसलिए हर पत्रकार का दायित्व है कि वह किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले उसकी पूरी तरह पुष्टि करे।

उन्होंने विद्यार्थियों को मीडिया में करियर की संभावनाओं, डिजिटल कंटेंट निर्माण, वीडियो रिपोर्टिंग, फोटो जर्नलिज्म और डेटा जर्नलिज्म जैसे नए क्षेत्रों की भी जानकारी दी।

मिथिला पेंटिंग के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत से परिचय

शिविर में मिथिला पेंटिंग का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षकों ने छात्राओं को इस विश्वविख्यात लोक कला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक शैली, रंगों के उपयोग, प्राकृतिक आकृतियों तथा आधुनिक प्रयोगों के बारे में बताया।

प्रतिभागियों ने स्वयं विभिन्न डिजाइनों और चित्रों का अभ्यास किया। प्रशिक्षकों ने कहा कि मिथिला पेंटिंग केवल कला नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

उन्होंने छात्राओं को इस कला को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर के रूप में भी अपनाने के लिए प्रेरित किया।

मेहंदी कला में सीखी आधुनिक और पारंपरिक डिजाइन

मेहंदी प्रशिक्षण सत्र में छात्राओं को पारंपरिक, अरबी, इंडो-अरेबिक तथा आधुनिक डिजाइनों की बारीकियां सिखाई गईं। प्रशिक्षकों ने हाथों पर सुंदर और आकर्षक डिजाइनों को बनाने की तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।

उन्होंने बताया कि मेहंदी कला आज केवल शौक तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन चुकी है। कई छात्राओं ने पहली बार पेशेवर तरीके से मेहंदी डिजाइन बनाना सीखा।

नृत्य प्रशिक्षण से निखरी आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति

शिविर में आयोजित नृत्य प्रशिक्षण सत्र में छात्राओं को विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए तैयार किया गया। प्रशिक्षकों ने उन्हें शारीरिक संतुलन, मंच संचालन, भाव-भंगिमा, ताल-लय और समूह प्रस्तुति की तकनीकों का अभ्यास कराया।

उन्होंने बताया कि नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने, मानसिक तनाव कम करने और व्यक्तित्व विकास का भी प्रभावी साधन है।

व्यक्तित्व विकास और नेतृत्व क्षमता पर भी जोर

आयोजकों ने बताया कि शिविर के दौरान छात्राओं को केवल तकनीकी और कलात्मक प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया, बल्कि व्यक्तित्व विकास, समय प्रबंधन, नेतृत्व क्षमता, प्रभावी संवाद, टीमवर्क और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और सामाजिक सहभागिता की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।

छात्राओं ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा

शिविर के दौरान आयोजित व्यावहारिक गतिविधियों में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने समाचार लेखन, पेंटिंग निर्माण, मेहंदी डिजाइन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर अभ्यास करने और अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

आयोजन का उद्देश्य

अभाविप के पदाधिकारियों ने कहा कि सर्जना निखार शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्राओं की छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें सही दिशा प्रदान करना है। शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास, सांस्कृतिक चेतना और व्यक्तित्व निर्माण भी विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने, नई संभावनाओं को पहचानने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।

भविष्य में भी होंगे ऐसे आयोजन

आयोजकों ने बताया कि अभाविप आगे भी विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण शिविर, कार्यशाला और व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि युवाओं को बदलते समय के अनुरूप आवश्यक कौशल और ज्ञान प्राप्त हो सके।

कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। छात्राओं ने इस शिविर को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि उन्हें पत्रकारिता, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई, जिससे उनके आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

शिविर ने यह संदेश दिया कि यदि युवाओं को उचित मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे शिक्षा के साथ-साथ कला, संस्कृति, मीडिया और रचनात्मक क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। ऐसी पहल न केवल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करती है, बल्कि समाज में सकारात्मक और जागरूक नेतृत्व तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.