दरभंगा बनेगा 'मखाना हब': 18 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एनबीएल लैब की स्थापना

दरभंगा: मिथिला की पहचान और वैश्विक स्वाद का पर्याय बन चुके 'मखाना' (Makhana) को अब एक नई उड़ान मिलने वाली है। दरभंगा को मखाना उत्पादन का वैश्विक हब बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से बड़ी परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। हाल ही में दरभंगा के सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने इस संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जो न केवल मखाना किसानों के लिए बल्कि संपूर्ण मिथिला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

मखाना हब: नई आर्थिक क्रांति की शुरुआत

दरभंगा में मखाना उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने यहां एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (Center of Excellence) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके निर्माण पर 10 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी। यह केंद्र मखाना की उन्नत खेती, बीज संरक्षण, और प्रसंस्करण तकनीक (Processing Technology) में शोध और नवाचार का केंद्र होगा।

इसके साथ ही, उत्पादों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणीकरण के लिए 8 करोड़ रुपये की लागत से एक 'एनबीएल (NABL) मान्यता प्राप्त लैब' की स्थापना भी की जा रही है। इन दोनों परियोजनाओं का कुल बजट 18 करोड़ रुपये है, जो मखाना उद्योग की तस्वीर बदलने के लिए पर्याप्त है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का महत्व

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस केवल एक इमारत नहीं, बल्कि मखाना किसानों के लिए एक 'ज्ञान केंद्र' होगा। इसकी प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित होंगी:

उन्नत बीज तकनीक: मखाना की पैदावार बढ़ाने और इसे रोगों से बचाने के लिए नई किस्मों के बीजों का विकास करना।

प्रशिक्षण: किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक खेती के तरीकों से अवगत कराना ताकि वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें।

प्रसंस्करण में नवाचार: मखाना के केवल बीज ही नहीं, बल्कि उससे बनने वाले विभिन्न उत्पादों (जैसे मखाना खीर मिक्स, मखाना पाउडर, रोस्टेड मखाना आदि) की गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर जोर देना।

एनबीएल (NABL) लैब: गुणवत्ता का प्रमाण

अक्सर देखा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों को भेजने के लिए सख्त मानकों (Quality Standards) से गुजरना पड़ता है। एनबीएल मान्यता प्राप्त लैब की स्थापना से स्थानीय उत्पादकों को अब अपने मखाने की जांच के लिए दिल्ली या अन्य महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

वैश्विक पहुंच: लैब द्वारा प्रमाणित होने के बाद मिथिला का मखाना दुनिया भर के बाजारों में बिना किसी बाधा के निर्यात किया जा सकेगा।

उपभोक्ता विश्वास: NABL प्रमाणन उत्पाद की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी देता है, जिससे ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा।

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर का विजन

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि "मिथिला का मखाना, जिसे अब जीआई टैग (GI Tag) भी प्राप्त है, हमारी सांस्कृतिक विरासत है। हमारी सरकार का लक्ष्य इसे केवल एक कृषि उत्पाद तक सीमित न रखकर एक ग्लोबल ब्रांड बनाना है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एनबीएल लैब के माध्यम से हम मखाना और अन्य जल कृषि उत्पादों (Aquaculture products) को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।"

उन्होंने आगे कहा कि दरभंगा में जल कृषि की अपार संभावनाएँ हैं। इन केंद्रों से न केवल मखाना, बल्कि मछली और अन्य जलीय उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिलेगी, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने का प्रधानमंत्री का सपना साकार होगा।

किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

मखाना उद्योग से सीधे तौर पर लाखों किसान जुड़े हुए हैं। इन नई परियोजनाओं के आने से:

रोजगार सृजन: प्रोसेसिंग इकाइयों और लैब के संचालन से स्थानीय युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे।

आय में वृद्धि: बिचौलियों की भूमिका कम होगी और सीधे प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा।

निर्यात में बढ़ोतरी: बेहतर गुणवत्ता के कारण स्थानीय उत्पाद अब सीधे विदेशों में निर्यात हो सकेंगे, जिससे विदेशी मुद्रा का आगमन होगा।

मिथिला की नई पहचान

दरभंगा का मखाना आज भारत के हर कोने में पसंद किया जा रहा है। सरकार का यह निवेश मखाना किसानों के लिए एक संजीवनी की तरह है। इससे क्षेत्र में निवेश का एक बेहतर वातावरण बनेगा। भविष्य में दरभंगा को 'मखाना सिटी' के रूप में पहचान मिलने की राह अब आसान हो गई है।

18 करोड़ रुपये का यह निवेश दरभंगा के कृषि परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। शोध, विकास और गुणवत्ता प्रमाणन के एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से मखाना उद्योग के आधुनिक युग का सूत्रपात होगा। यह न केवल दरभंगा, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है कि मखाना जैसी पारंपरिक खेती को अब आधुनिक विज्ञान का सहारा मिल रहा है। आने वाले समय में, यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मिथिला की अर्थव्यवस्था को नई शक्ति प्रदान करेगा।