ट्रेन से कटकर कपड़ा व्यवसायी की मौत, मातम में डूबा परिवार
राजधानी पटना के उपनगरीय इलाके में सोमवार देर रात एक दुखद घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। करौटा स्टेशन के समीप एक 35 वर्षीय युवक की ट्रेन से कटकर दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान गणेश कुमार के रूप में की गई है, जो बख्तियारपुर का रहने वाला था और अपनी जीविका के लिए कपड़े की दुकान चलाता था।
घटना का विवरण: घर वापसी बनी अंतिम सफर
मिली जानकारी के अनुसार, गणेश कुमार बख्तियारपुर स्थित अपनी कपड़े की दुकान बंद कर रोजाना की तरह सोमवार रात को ट्रेन से अपने घर लौट रहा था। करौटा स्टेशन के पास जैसे ही वह ट्रेन से उतरा या पटरियों के समीप से गुजर रहा था, तभी अनियंत्रित होकर या असावधानीवश वह किसी तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गया।
घटना इतनी भीषण थी कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई। आसपास के लोगों ने जब शव को पटरियों के पास देखा, तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही जीआरपी (GRP) और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे और शव को अपने कब्जे में लिया।
मृतक का परिचय और पारिवारिक स्थिति
35 वर्षीय गणेश कुमार अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। बख्तियारपुर में कपड़े की छोटी सी दुकान चलाकर वह अपने वृद्ध माता-पिता, पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण कर रहा था। उसकी असमय मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गणेश मिलनसार और मेहनती व्यक्ति था। इस घटना के बाद से बख्तियारपुर के कपड़ा व्यापारियों में भी शोक की लहर दौड़ गई है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि:
प्राथमिक जांच: यह मामला प्रथम दृष्टया हादसा प्रतीत हो रहा है।
सीसीटीवी फुटेज: पुलिस स्टेशन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि घटना के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट: रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की स्पष्ट स्थिति और समय का पता चलेगा।
रेल सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
करौटा और उसके आसपास के स्टेशनों के बीच अक्सर ऐसी दुर्घटनाएं सुनने को मिलती हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि स्टेशन के पास पटरियों के आसपास प्रकाश व्यवस्था (Lighting) की कमी और सुरक्षा घेरे का न होना ऐसी घटनाओं को न्योता देता है। कई बार अंधेरे में यात्रियों को ट्रैक पार करने के दौरान यह अंदाजा नहीं लग पाता कि कोई ट्रेन आ रही है।
शोक का माहौल
मंगलवार सुबह जब गणेश की मौत की खबर उसके पैतृक गांव पहुंची, तो वहां कोहराम मच गया। घर के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गणेश के बच्चों के भविष्य को लेकर परिवार के सामने अब सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय समाजसेवियों ने सरकार और प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सहायता दिलाने की मांग की है।
एक छोटी सी गलती या फिर एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा—जो भी हो, लेकिन इसका परिणाम एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों का उजाड़ना है। यह घटना रेल यात्रियों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि पटरियों के समीप या स्टेशन परिसर में हमेशा अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।