भागलपुर में निगम कर्मियों की पांच दिवसीय हड़ताल से नरक बना शहर नगर आयुक्त की चेतावनी के बाद निजी एजेंसियों ने संभाली कमान, युद्ध स्तर पर जारी है कचरा उठाव अभियान
भागलपुर/विशेष संवाददाता: बिहार की ऐतिहासिक सिल्क सिटी भागलपुर के लिए बीता सप्ताह बेहद कष्टदायक और त्रासदपूर्ण रहा। नगर निगम के सफाई कर्मियों और कर्मचारियों की लगातार पांच दिनों तक चली अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण पूरा शहर कचरे के विशाल ढेरों में तब्दील हो गया था। शहर के प्रमुख चौराहों, रिहायशी इलाकों, बाजारों और गलियों में हर तरफ कूड़े-कचरे के अंबार लगे होने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। जगह-जगह लगे कचरे के ढेरों से उठने वाली सड़ांध और बदबू के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुहाल हो गया था, जिससे शहर में महामारी फैलने का खतरा भी मंडराने लगा था। इस विकट स्थिति को देखते हुए नगर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाया और निजी सफाई एजेंसियों को अल्टीमेटम देते हुए शनिवार शाम तक शहर को पूरी तरह साफ करने का सख्त निर्देश दिया।
पांच दिनों तक क्यों ठप रही सफाई व्यवस्था?
भागलपुर नगर निगम के अंतर्गत काम करने वाले स्थायी और संविदा सफाई कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों—जैसे बकाया मानदेय, नियमितीकरण और अन्य सेवा शर्तों—को लेकर पिछले पांच दिनों से काम का पूरी तरह बहिष्कार कर रखा था। हड़ताल के कारण निगम का पूरा कचरा प्रबंधन तंत्र पटरी से उतर गया था।
घरों से कचरा उठाव बंद: डोर-टू-डोर कचरा संग्रह करने वाले वाहन पांच दिनों तक पूरी तरह खड़े रहे, जिससे लोगों के घरों में कूड़ा इकट्ठा होने लगा।
सड़कों पर पसरा कचरा: सफाई न होने के कारण दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों ने मजबूरन सड़कों के किनारे ही कचरा फेंकना शुरू कर दिया, जिससे शहर के मुख्य मार्ग कूड़ेदान में तब्दील हो गए।
संक्रामक बीमारियों का खतरा: चिलचिलाती धूप और उमस भरे मौसम के बीच खुले में पड़े कचरे के सड़ने से मक्खी-मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया था, जिससे स्थानीय निवासियों में डायरिया, मलेरिया और डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने की गंभीर आशंका पैदा हो गई थी।
नगर आयुक्त का कड़ा रुख और निजी एजेंसियों को सख्त चेतावनी
शहर की इस नारकीय स्थिति और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे हालात को संज्ञान में लेते हुए नगर आयुक्त ने आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक में स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने नगर निगम के संबंधित अधिकारियों और शहर में कार्यरत निजी सफाई एजेंसियों (Private Cleaning Agencies) को कड़ी फटकार लगाई।
नगर आयुक्त ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि शनिवार की शाम तक शहर के हर कोने से बचे हुए कचरे का उठाव सौ प्रतिशत अनिवार्य रूप से पूरा हो जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्देशों में किसी भी प्रकार की कोताही बरती गई या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित निजी एजेंसियों के खिलाफ भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके अनुबंध को रद्द करने की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
युद्ध स्तर पर शुरू हुआ सफाई अभियान और संडे को भी जारी रहा काम
नगर आयुक्त के अल्टीमेटम के बाद हरकत में आई निजी सफाई एजेंसियों ने शनिवार दोपहर से ही शहरभर में अपना अमला उतार दिया। दर्जनों ट्रैक्टर, जेसीबी मशीनें और सैकड़ों अतिरिक्त सफाई मजदूरों को युद्ध स्तर पर कचरा उठाने के काम में लगाया गया।
शनिवार शाम से तेज हुई रफ्तार: एजेंसियों ने रात-दिन एक करते हुए शहर के मुख्य बाजारों, महाशय ड्योढ़ी, वेरायटी चौक, कोतवाली चौक, स्टेशन रोड और मुख्य सड़कों के किनारे लगे कचरे के पहाड़ों को हटाना शुरू किया।
रविवार को भी जारी रहा महाअभियान: चूंकि पांच दिनों के कचरे का बैकलॉग बहुत बड़ा था, इसलिए शनिवार की रात तक भी पूरा कचरा साफ नहीं हो सका। इसे देखते हुए रविवार के दिन भी अवकाश के बावजूद सफाई का यह महाअभियान पूरी गति से जारी रहा। नगर निगम के आला अधिकारियों ने खुद मैदान में उतरकर विभिन्न वार्डों का औचक निरीक्षण किया और सफाई कार्यों की मॉनिटरिंग की।
शहरवासियों ने ली राहत की सांस, सुधरी आबोहवा
रविवार को दिनभर चले इस सघन और युद्ध-स्तरीय सफाई अभियान के बाद शहर के अधिकांश हिस्सों से कचरे के ढेर गायब होने लगे हैं। मुख्य सड़कों और चौराहों पर सफाई होने के बाद भागलपुर के आम नागरिकों ने आखिरकार राहत की सांस ली है।
हालांकि, जानकारों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि केवल प्रशासनिक सख्ती कुछ दिनों के लिए समाधान हो सकती है, लेकिन नगर निगम और कर्मियों के बीच के विवादों का स्थायी समाधान निकाला जाना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में शहरवासियों को इस तरह के नरकीय हालात का सामना न करना पड़े। फिलहाल, युद्ध स्तर पर चलाए गए इस सफाई अभियान से शहर की आबोहवा एक बार फिर सुधरने लगी है और जनजीवन सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।