छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं की आवाज बनेगा युवा कांग्रेस
भागलपुर: बिहार में युवाओं की समस्याओं को लेकर मुख्यधारा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में भागलपुर में युवा कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसका मुख्य एजेंडा आगामी राज्यस्तरीय कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' की रूपरेखा तैयार करना था। इस बैठक में युवाओं के ज्वलंत मुद्दों—रोजगार, शिक्षा की बदहाली और लचर परीक्षा प्रणाली—को न केवल चर्चा का विषय बनाया गया, बल्कि इन्हें लेकर सरकार को घेरने की रणनीति भी बनाई गई।
'छात्रों की गूंज': केवल कार्यक्रम नहीं, एक आंदोलन
युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया कि 'छात्रों की गूंज' कोई सामान्य आयोजन नहीं है, बल्कि यह बिहार के उन लाखों छात्रों और बेरोजगार युवाओं की व्यथा है जो आज अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में जी रहे हैं। बैठक की अध्यक्षता करते हुए युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने कहा, "बिहार का युवा आज दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ शिक्षा का निजीकरण हो रहा है, तो दूसरी तरफ सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया फाइलों में दम तोड़ रही है। हम इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार को यह संदेश देना चाहते हैं कि अब युवा चुप नहीं बैठेगा।"
बैठक में उठे प्रमुख मुद्दे
बैठक में उपस्थित युवा नेताओं ने कई गंभीर बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की, जिन्हें 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में प्रमुखता से उठाया जाएगा:
रोजगार का संकट: बिहार में बढ़ती बेरोजगारी दर और रिक्त पड़े सरकारी पदों को भरने में हो रही देरी सबसे बड़ा मुद्दा है। युवाओं ने सवाल किया कि चुनावी घोषणा पत्रों में किए गए वादों का क्या हुआ?
शिक्षा की गुणवत्ता: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी ढांचे के अभाव पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि छात्रों को डिग्री तो मिल रही है, लेकिन रोजगारपरक शिक्षा का घोर अभाव है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार: आए दिन होने वाले पेपर लीक कांड और परीक्षा परिणामों में हो रही देरी ने छात्रों का मनोबल तोड़ दिया है। युवा कांग्रेस ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
संगठन को मजबूत करने की रणनीति
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए युवा कांग्रेस ने कमर कस ली है। बैठक में यह तय किया गया कि:
बूथ स्तर पर संपर्क: कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता गांव-गांव और कॉलेज-कॉलेज जाकर छात्रों से संपर्क करेंगे।
डिजिटल कैंपेन: सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने के लिए एक बड़ा डिजिटल अभियान शुरू किया जाएगा।
छात्र संवाद: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में छोटे-छोटे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्रों की समस्याओं को एक बड़े मंच पर रखा जा सके।
बैठक में शामिल एक पदाधिकारी ने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल भीड़ जुटाना नहीं है, बल्कि युवाओं को उनकी ताकत का एहसास कराना है। जब तक बिहार का युवा शिक्षित और आत्मनिर्भर नहीं होगा, राज्य का विकास संभव नहीं है। 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए हम सरकार से उनके किए गए वादों का जवाब मांगेंगे।"
युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बनता था। उन्होंने संकल्प लिया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से वे छात्रों के बीच जाकर उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ेंगे और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।
भागलपुर में हुई यह बैठक यह संदेश देती है कि बिहार की राजनीति में अब 'युवा शक्ति' निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। आने वाले समय में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का प्रभाव कितना होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि सत्ता के गलियारों में युवाओं की आवाज अब और बुलंद होने वाली है।
युवा कांग्रेस अब छात्रों के हर दुःख-दर्द में उनके साथ खड़े होने की तैयारी में है। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह कार्यक्रम प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर क्या बदलाव लाता है।