सिंडिकेट के कड़े फैसले के बाद पूर्व प्रभारी कुलपति डॉ. संजय कुमार पर कार्रवाई की सुगबुगाहट, वित्तीय अनियमितताओं पर बढ़ी मुश्किलें
भागलपुर: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में प्रशासनिक और वित्तीय गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विश्वविद्यालय के सिंडिकेट द्वारा हाल ही में लिए गए कड़े निर्णयों के बाद, पूर्व प्रभारी कुलपति डॉ. संजय कुमार चौधरी के विरुद्ध कार्रवाई की चर्चाएं मुखर हो गई हैं। विश्वविद्यालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं और शैक्षणिक गड़बड़ियों के आरोपों की जांच रिपोर्टों के आधार पर सिंडिकेट ने यह कदम उठाने का मन बनाया है।
क्या है पूरा मामला?
डॉ. संजय कुमार चौधरी पर उनके शैक्षणिक जीवन के विभिन्न पड़ावों, विशेषकर मुरारका कॉलेज और टीएनबी कॉलेज में प्राचार्य रहने के दौरान कई गंभीर आरोप लगे थे। उन पर कॉलेज के विकास कार्यों, निर्माण कार्यों और अन्य मदों में लाखों रुपये के वित्तीय हेरफेर का आरोप है। विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में गठित एक उच्च-स्तरीय जांच समिति ने डॉ. चौधरी को इन मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी पाया था। जांच रिपोर्ट में उनके विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
सिंडिकेट की भूमिका और निर्णय
विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई—सिंडिकेट—ने इस मामले पर गंभीरता दिखाते हुए लंबित जांच रिपोर्टों की समीक्षा की। सूत्रों का कहना है कि सिंडिकेट ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में हुई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर "जीरो टॉलरेंस" नीति अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। चूंकि जांच समिति ने डॉ. चौधरी के विरुद्ध साक्ष्यों की पुष्टि की थी, इसलिए अब सिंडिकेट के निर्णय के बाद उनके ऊपर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
यह कार्रवाई टीएमबीयू प्रशासन द्वारा उन सभी अधिकारियों और शिक्षकों पर शिकंजा कसने की मुहिम का हिस्सा है, जिन पर सरकारी धन के दुरुपयोग या अवैध नियुक्तियों में संलिप्तता के आरोप हैं।
विवादों का पुराना नाता
डॉ. संजय कुमार चौधरी का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। जब वे टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति थे, तब भी उनके विरोध में छात्र संगठनों और शिक्षक संघों ने लगातार आंदोलन किया था। उन पर मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप थे:
कॉलेज स्तर पर वित्तीय गबन और निर्माण कार्य में अनियमितता।
जांच समिति द्वारा 11 में से कई महत्वपूर्ण आरोपों को सही पाया जाना।
अवैध नियुक्तियों और पदस्थापन में मनमानी।
उस समय खुफिया विभाग ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई थी और विश्वविद्यालय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी, जो उनकी कार्यप्रणाली पर उठते बड़े सवालों को बल देती है।
अगली संभावित कार्रवाई
सिंडिकेट के ताजा निर्देशों के बाद, विश्वविद्यालय प्रशासन अब कानूनी सलाह ले रहा है ताकि कार्रवाई को कानूनी रूप से अभेद्य बनाया जा सके। जानकारों का कहना है कि प्रशासन डॉ. चौधरी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceedings) को अंतिम रूप देने और उन पर लगे आरोपों के आधार पर गबन की गई राशि की वसूली के लिए सख्त प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
यह कार्रवाई टीएमबीयू में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े संदेश के रूप में देखी जा रही है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले को रफा-दफा करने की कोई कोशिश की गई, तो वे दोबारा उग्र आंदोलन करेंगे। फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में इस कार्रवाई को लेकर कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच चर्चा का दौर जारी है और सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।