गंडक नदी में डूबे 12 वर्षीय किशोर की तीसरे दिन भी तलाश जारी, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

मुजफ्फरपुर। जिले के प्रखंड क्षेत्र स्थित गोरिगामा डुमरी दियरा में गंडक नदी में डूबे 12 वर्षीय किशोर किशु कुमार की तलाश तीसरे दिन भी जारी रही। रविवार को नहाने के दौरान हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरा गांव गमगीन है। तीन दिन बीत जाने के बावजूद किशोर का कोई सुराग नहीं मिलने से परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि ग्रामीण भी लगातार नदी किनारे जुटकर खोज अभियान की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।

घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन, गोताखोरों की टीम और एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) के जवान लगातार किशोर की तलाश में जुटे हुए हैं। तेज धारा और नदी की गहराई के कारण राहत एवं बचाव अभियान में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

रविवार को नहाने के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय किशु कुमार रविवार को अपने कुछ दोस्तों के साथ गंडक नदी में नहाने गया था। गर्मी और उमस के बीच बच्चे नदी में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान किशु गहरे पानी में चला गया और तेज बहाव की चपेट में आ गया।

साथ में मौजूद बच्चों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वह देखते ही देखते नदी की तेज धारा में लापता हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में नदी किनारे पहुंच गए और स्थानीय स्तर पर खोजबीन शुरू कर दी।

सूचना मिलते ही पहुंचा प्रशासन

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक स्तर पर स्थानीय गोताखोरों को नदी में उतारा गया। बाद में एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया, जिसने आधुनिक उपकरणों की मदद से खोज अभियान शुरू किया।

अधिकारियों ने नदी के विभिन्न हिस्सों में सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन तीसरे दिन तक भी किशोर का कोई पता नहीं चल सका।

तीसरे दिन भी जारी रहा सर्च ऑपरेशन

मंगलवार को भी सुबह से ही एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीम ने खोज अभियान फिर से शुरू किया। नावों और सुरक्षा उपकरणों की सहायता से नदी के कई किलोमीटर क्षेत्र में तलाशी ली गई।

बचाव दल ने संभावित स्थानों की पहचान कर वहां विशेष रूप से खोज की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अधिकारियों का कहना है कि नदी का तेज बहाव और अधिक गहराई अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

किशु कुमार के लापता होने के बाद से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और परिवार के लोग हर पल किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।

मां बार-बार अपने बेटे के सकुशल लौट आने की दुआ कर रही है, जबकि पिता और अन्य रिश्तेदार नदी किनारे बैठकर खोज अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। परिवार की स्थिति देखकर गांव के लोग भी भावुक हो उठे हैं।

पूरे गांव में पसरा मातम

घटना के बाद गोरिगामा डुमरी दियरा गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीण लगातार नदी किनारे मौजूद रहकर बचाव दल का सहयोग कर रहे हैं। कई लोग अपने स्तर पर भी नाव लेकर नदी में तलाश करने की कोशिश कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गंडक नदी में हर वर्ष बारिश और तेज बहाव के दौरान इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने प्रशासन से नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

एसडीआरएफ और गोताखोरों के सामने चुनौती

बचाव अभियान में शामिल अधिकारियों के अनुसार, नदी की तेज धारा, गहराई और लगातार बदलते जल प्रवाह के कारण खोज कार्य आसान नहीं है। एसडीआरएफ के प्रशिक्षित जवान आधुनिक उपकरणों और विशेष तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन प्राकृतिक परिस्थितियां अभियान को प्रभावित कर रही हैं।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि किशोर की तलाश तब तक जारी रहेगी, जब तक उसका पता नहीं चल जाता।

प्रशासन ने लोगों से की अपील

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि विशेषकर बरसात और तेज बहाव के दौरान नदी में नहाने या गहरे पानी में जाने से बचें। बच्चों को अकेले नदी किनारे न जाने दें और हमेशा उनकी निगरानी रखें।

प्रशासन का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ग्रामीणों से भी अनुरोध किया गया है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस या आपदा प्रबंधन विभाग को सूचना दें।

नदी किनारे सुरक्षा बढ़ाने की मांग

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने गंडक नदी के संवेदनशील घाटों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और प्रशिक्षित लाइफगार्ड की तैनाती की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे स्थानों पर पहले से सुरक्षा इंतजाम हों, तो कई हादसों को रोका जा सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन से स्कूलों और गांवों में जल सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की अपील की है, ताकि बच्चे और अभिभावक नदी में स्नान के दौरान आवश्यक सावधानियां बरत सकें।

परिवार को अब भी चमत्कार की उम्मीद

तीन दिन बीत जाने के बावजूद परिवार और गांव के लोग उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं। सभी की निगाहें एसडीआरएफ और गोताखोरों के खोज अभियान पर टिकी हैं। हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।

यह दर्दनाक घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि नदियों में स्नान करते समय सुरक्षा नियमों का पालन कितना आवश्यक है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि खोज अभियान पूरी गंभीरता और संसाधनों के साथ जारी रहेगा तथा किशोर का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।