बिहार में बिजली की मांग ने बनाया नया रिकॉर्ड, 12 हजार मेगावाट तक आपूर्ति के लिए तैयार बिजली कंपनी

पटना। बिहार में लगातार बढ़ रही बिजली की खपत ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गर्मी के इस मौसम में बिजली की मांग लगातार बढ़ने के बीच बिहार राज्य की बिजली वितरण कंपनी ने अब तक की सबसे बड़ी तैयारी करते हुए 11,995 मेगावाट बिजली खरीद का समझौता विभिन्न उत्पादन इकाइयों के साथ किया है। कंपनी का दावा है कि यदि राज्य में बिजली की मांग 12 हजार मेगावाट तक भी पहुंच जाती है, तब भी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष बिजली की मांग में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों, शहरीकरण, घरेलू उपकरणों के बढ़ते उपयोग और भीषण गर्मी के कारण बिजली की खपत में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए पहले से ही पर्याप्त बिजली खरीद और आपूर्ति की व्यवस्था कर ली गई है।

24 जून को बना नया पीक लोड रिकॉर्ड

बिहार में बिजली की मांग का नया रिकॉर्ड 24 जून को दर्ज किया गया, जब राज्य का पीक लोड 9,068 मेगावाट तक पहुंच गया। यह अब तक का सबसे अधिक बिजली लोड माना जा रहा है। बिजली कंपनी के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ बिजली की मांग में और वृद्धि हो सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि इस रिकॉर्ड के बावजूद राज्य में कहीं भी बिजली की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं आई। इससे यह साबित होता है कि कंपनी ने मांग के अनुरूप आपूर्ति की पर्याप्त व्यवस्था पहले से कर रखी थी।

11,995 मेगावाट बिजली खरीद का सबसे बड़ा समझौता

बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली कंपनी ने विभिन्न बिजली उत्पादन इकाइयों के साथ 11,995 मेगावाट बिजली खरीद के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) किया है। यह बिहार के इतिहास में बिजली खरीद का अब तक का सबसे बड़ा समझौता माना जा रहा है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार इतने बड़े स्तर पर बिजली खरीद की व्यवस्था भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है। इससे राज्य में बिजली संकट की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति मिलती रहेगी।

एनटीपीसी की इकाइयों से मिल रही बड़ी हिस्सेदारी

राज्य को मिलने वाली बिजली में सबसे बड़ा योगदान एनटीपीसी की विभिन्न उत्पादन इकाइयों का है। बिहार स्थित बाढ़, नवीनगर, कांटी, कहलगांव और बरौनी परियोजनाओं से बड़ी मात्रा में बिजली की आपूर्ति हो रही है।

इन उत्पादन केंद्रों से मिलने वाली बिजली राज्य के अधिकांश जिलों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऊर्जा विभाग का कहना है कि इन इकाइयों के बेहतर प्रदर्शन के कारण बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

एसजेवीएनएल और अन्य राज्यों से भी मिल रही बिजली

बिहार केवल राज्य के भीतर स्थित उत्पादन इकाइयों पर ही निर्भर नहीं है। बक्सर स्थित एसजेवीएनएल परियोजना से भी बिजली की नियमित आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों की उत्पादन कंपनियों के साथ भी बिजली खरीद के समझौते किए गए हैं।

इन दीर्घकालिक और अल्पकालिक समझौतों के कारण बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। यदि किसी एक स्रोत से आपूर्ति प्रभावित होती है, तो दूसरे स्रोतों से बिजली लेकर मांग पूरी की जा सकती है।

12 हजार मेगावाट तक मांग होने पर भी नहीं होगी परेशानी

बिजली कंपनी का दावा है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत यदि बिजली की मांग 12 हजार मेगावाट तक भी पहुंच जाती है, तब भी आपूर्ति बाधित नहीं होगी। इसके लिए पर्याप्त बिजली खरीद के साथ-साथ ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि राज्य स्तर पर बिजली की कमी जैसी कोई स्थिति नहीं है। यदि कहीं उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी समस्या होती है, तो उसका मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर लोड का अचानक बढ़ जाना, तकनीकी खराबी या वितरण नेटवर्क की समस्या होती है।

स्थानीय स्तर पर भी किया गया नेटवर्क मजबूत

बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए बिजली कंपनी ने वितरण व्यवस्था में भी कई सुधार किए हैं। अनेक स्थानों पर पुराने ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है। जरूरत के अनुसार नए ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं और जर्जर बिजली लाइनों को बदला गया है।

इसके अलावा कई फीडरों का आधुनिकीकरण किया गया है ताकि अधिक लोड की स्थिति में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर होने वाली तकनीकी समस्याओं को तेजी से दूर करने के लिए विशेष टीमें भी तैनात की गई हैं।

आर्थिक विकास का संकेत मानी जा रही बढ़ती बिजली मांग

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली की बढ़ती खपत केवल गर्मी का परिणाम नहीं है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक गतिविधियों में तेजी का भी संकेत है। उद्योगों का विस्तार, नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का संचालन, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की बढ़ती पहुंच और घरेलू उपकरणों के उपयोग में वृद्धि के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी राज्य में बिजली की खपत बढ़ना उसके औद्योगिक और आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। बिहार में पिछले कुछ वर्षों में बिजली की उपलब्धता में सुधार के कारण निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।

उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने पर जोर

बिजली कंपनी का कहना है कि केवल पर्याप्त बिजली खरीदना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली पहुंचाना भी प्राथमिकता है। इसके लिए शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत किया गया है और बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जिला एवं प्रमंडल स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।

स्मार्ट मीटर, ऑनलाइन बिल भुगतान, डिजिटल शिकायत प्रणाली और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं के माध्यम से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।

भविष्य की जरूरतों के लिए भी तैयारियां

ऊर्जा विभाग का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में बिहार में बिजली की मांग और तेजी से बढ़ेगी। इसे देखते हुए नई उत्पादन परियोजनाओं, अतिरिक्त पावर परचेज एग्रीमेंट, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण पर लगातार काम किया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के प्रत्येक शहर और गांव में 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए ऊर्जा अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है।