भोजपुर: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले पर बिलौटी में महापंचायत, न्याय की मांग के साथ जुटा जनसैलाब

आरा/शाहपुर: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना अंतर्गत बिलौटी गांव में बुधवार को एक विशाल 'सर्व समाज महापंचायत' का आयोजन किया गया। यह महापंचायत भाजपा कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ (एनकाउंटर) में हुई मौत के बाद न्याय की मांग को लेकर बुलाई गई थी। कुंडेश्वर महादेव मंदिर के समीप आयोजित इस महापंचायत में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और भरत तिवारी के समर्थक जुटे, जिससे पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया।

न्याय की गूंज और प्रशासन पर दबाव

भरत भूषण तिवारी के परिजनों और समर्थकों का आरोप है कि उनकी मृत्यु पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी। महापंचायत में शामिल वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जिस तरह से भरत तिवारी ने हथियार फेंककर सरेंडर किया था, उसके बाद उन्हें गोलियां मारना पूरी तरह से अमानवीय और गैर-कानूनी है। मंच से मांग की गई कि एनकाउंटर में शामिल सभी दोषी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी हो और मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल

महापंचायत के आयोजन से पहले ही राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई बड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं:

एसडीपीओ पर कार्रवाई: जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश वर्मा को पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है।

एफआईआर दर्ज: परिजनों की शिकायत पर तत्कालीन एसडीपीओ और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष सहित एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

न्यायिक जांच: बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए बिहार सरकार ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, जिसे सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में किया जाएगा।

विभिन्न वर्गों का समर्थन

महापंचायत में केवल स्थानीय ग्रामीण ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि भरत तिवारी एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जो बाढ़, कटाव और विस्थापन जैसी समस्याओं को लेकर सरकार और प्रशासन के सामने आवाज उठाते थे। उन्हें सिस्टम के खिलाफ लड़ने वाले एक 'युवा क्रांतिकारी' के रूप में याद किया गया। इस मुद्दे ने न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के कई नेता भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।

बिलौटी गांव में आयोजित यह महापंचायत इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनता अब पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय करने के मूड में है। हालांकि सरकार ने न्यायिक जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। प्रशासन फिलहाल स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठा रहा है।