नक्शा शिविर में उमड़ी भीड़ के बीच स्थानीय लोगों की एक स्वर से उठी मांग; नगर निगम तय करे भवन का नक्शा तैयार करने वाले आर्किटेक्ट्स की फीस

भागलपुर: शहर के विभिन्न वार्डों में नागरिकों को उनके घर के पास ही भवन निर्माण से जुड़ी अनुमतियों और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में सुगमता लाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा विशेष नक्शा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में हाल ही में आयोजित एक शिविर के दौरान आम जनता और मकान मालिकों ने अपनी समस्याओं को मुखरता से उठाया। शिविर में उमड़ी भारी भीड़ और पूछताछ के सिलसिले के बीच स्थानीय लोगों ने एक बेहद गंभीर और व्यावहारिक मुद्दा उठाया है। नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि निगम में नक्शा तैयार करने और उसे पास कराने के लिए अधिकृत किए जाने वाले आर्किटेक्ट्स (वास्तुविदों) की फीस का निगम स्तर पर स्पष्ट निर्धारण किया जाना चाहिए।

नक्शा शिविरों में उमड़ रही है भीड़, सामने आ रही हैं व्यावहारिक परेशानियां

भागलपुर के विभिन्न वार्डों में लगाए जा रहे इन मानचित्र (नक्शा) शिविरों में लोगों की खासी भीड़ देखने को मिल रही है। लोग अपने भूखंड के कागजात लेकर पहुंच रहे हैं और नक्शा स्वीकृति से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी ले रहे हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान आम जनता को सबसे बड़ी चुनौती निजी आर्किटेक्ट्स या कंसल्टेंट्स द्वारा मनमाने ढंग से वसूले जाने वाले शुल्क (फीस) को लेकर उठानी पड़ रही है।

शिविर में पहुंचे स्थानीय लोगों और मकान मालिकों का कहना है कि जब वे अपने छोटे या मध्यम वर्गीय मकानों के लिए नक्शा बनवाने जाते हैं, तो बाजार में सक्रिय आर्किटेक्ट्स द्वारा अपनी मर्जी से मोटी रकम वसूली जाती है। चूंकि हर आम नागरिक तकनीकी बारीकियों और नियमों से पूरी तरह वाकिफ नहीं होता, इसलिए उन्हें मजबूरी में इन आर्किटेक्ट्स द्वारा मांगे गए मनमाने पैसे देने पड़ते हैं।

स्थानीय लोगों का तर्क: क्यों जरूरी है फीस का निर्धारण?

शिविर के दौरान स्थानीय लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी और निगम अधिकारियों के समक्ष यह मांग रखी कि जिस प्रकार नगर निगम द्वारा विभिन्न तरह के टैक्स, लाइसेंस शुल्क और मानचित्र अनुमोदन के लिए सरकारी फीस तय की गई है, ठीक उसी प्रकार नक्शा बनाने वाले इंजीनियरों या आर्किटेक्ट्स की फीस भी पारदर्शी तरीके से तय होनी चाहिए। इसके पक्ष में लोगों ने निम्नलिखित मुख्य तर्क दिए:

आर्थिक शोषण पर लगाम: शहर के मध्यम वर्ग और गरीब परिवार जीवनभर की जमापूंजी से अपना आशियाना बनाते हैं। ऐसे में आर्किटेक्ट्स की भारी-भरकम फीस उनके बजट को बिगाड़ देती है। यदि फीस तय होगी, तो आम जनता अनावश्यक आर्थिक बोझ और शोषण से बचेगी।

पारदर्शिता और एकरूपता: यदि नगर निगम प्राधिकृत आर्किटेक्ट्स की दरें (Rates) तय कर देता है, तो पूरे शहर में एकरूपता बनी रहेगी और कोई भी कंसलटेंट तय सीमा से अधिक राशि नहीं वसूल सकेगा।

नक्शा प्रक्रिया का सरल होना: फीस निर्धारण से बिचौलियों और मनमाने रवैये पर रोक लगेगी, जिससे आम लोग बिना किसी मानसिक तनाव के आसानी से अपने घरों का नक्शा स्वीकृत करवा सकेंगे।

शिविरों में उमड़ी लोगों की भीड़ और बढ़ती उम्मीदें

एक तरफ जहां आर्किटेक्ट्स की फीस तय करने की मांग जोर पकड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ निगम द्वारा लगाए जा रहे इन शिविरों को लेकर लोगों में सकारात्मक रुझान भी दिख रहा है। वार्डों में लगने वाले इन कैंपों में लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर आवेदन जमा कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि निगम प्रशासन उनकी इस उचित मांग पर संज्ञान लेते हुए आर्किटेक्ट्स की फीस के स्लैब (वर्ग फीट या भवन के आकार के अनुसार) तय कर देता है, तो इससे शहर के हजारों मकान मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

 जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती

भागलपुर में नक्शा शिविरों के माध्यम से एक ओर जहां शहरी व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर उठी यह मांग प्रशासन के लिए एक नया संदेश लेकर आई है। नागरिकों की यह मांग पूरी तरह से जनहित से जुड़ी है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इस स्थानीय मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या आने वाले दिनों में आर्किटेक्ट्स की फीस के नियमतीकरण को लेकर कोई ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं या नहीं।