दाखिल-खारिज में सुस्ती से 20 हजार से अधिक मामले लंबित; बिना कारण आवेदन रद्द करने पर प्रशासन सख्त

मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर जिले में जमीन की खरीद-बिक्री के बाद होने वाली दाखिल-खारिज (Mutation) की प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए जी का जंजाल बन गई है। जिले के सभी 16 अंचलों में आवेदनों के निष्पादन में आई भारी सुस्ती के कारण लंबित मामलों की संख्या 20,702 के आंकड़े को पार कर गई है। फाइलों के ढेर और अंचल कार्यालयों में चक्कर काटते लोगों की व्यथा को देखते हुए अब जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।

लंबित आवेदनों का बढ़ता पहाड़

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में दाखिल-खारिज की गति अत्यंत धीमी रही है। 16 अंचलों में 20,702 से अधिक आवेदनों का लंबित होना यह दर्शाता है कि राजस्व कर्मचारी और अंचल अधिकारियों के स्तर पर प्रशासनिक कार्यक्षमता प्रभावित हुई है। महीनों से पेंडिंग इन फाइलों के कारण जमीन मालिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दाखिल-खारिज न होने की वजह से लोग न तो अपनी जमीन का लगान रसीद कटवा पा रहे हैं और न ही बैंकों से ऋण (Loan) प्राप्त कर पा रहे हैं। कई मामलों में जमीन की बिक्री तक अटक गई है।

'बिना कारण' आवेदन खारिज करना बना चर्चा का विषय

इस प्रशासनिक सुस्ती के बीच एक और गंभीर मामला सामने आया है—आवेदनों का मनमाने ढंग से निरस्तीकरण। कई आवेदकों ने शिकायत की है कि अंचल कार्यालयों द्वारा बिना किसी तकनीकी आधार या ठोस कानूनी कारण बताए उनके आवेदनों को 'रिजेक्ट' कर दिया गया। राजस्व नियमावली के अनुसार, यदि किसी आवेदन में त्रुटि है, तो उसे सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए, लेकिन यहाँ आवेदनों को सीधे खारिज करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। इससे न केवल आवेदकों का समय और पैसा बर्बाद हो रहा है, बल्कि विभाग की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रशासन का एक्शन मोड

इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सभी अंचलाधिकारियों (CO) को स्पष्ट चेतावनी जारी की है। प्रशासन द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:

पारदर्शिता की अनिवार्यता: डीएम ने निर्देश दिया है कि किसी भी आवेदन को खारिज करने से पहले उसका ठोस कारण पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। बिना किसी कमी के आवेदन रद्द करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

समयबद्ध निष्पादन: दाखिल-खारिज के मामलों को 'फर्स्ट कम-फर्स्ट सर्व' (जो पहले आए, उसे पहले निपटाया जाए) के आधार पर निस्तारित करने का निर्देश दिया गया है।

निगरानी तंत्र: लंबित मामलों की स्थिति जानने के लिए अब जिला मुख्यालय से सीधे तौर पर ऑनलाइन पोर्टल की मॉनिटरिंग की जाएगी। हर अंचल के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसकी समीक्षा साप्ताहिक बैठक में होगी।

जवाबदेही तय: यदि किसी अंचल में बिना ठोस कारण के आवेदन लंबित मिलते हैं, तो संबंधित राजस्व कर्मचारी और अंचल अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी और उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा।

आम नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद

प्रशासन के इस सख्त रुख के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि अंचल कार्यालयों में व्याप्त मनमानी पर अंकुश लगेगा। जिलाधिकारी ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी आवेदक का आवेदन बिना ठोस कारण के रद्द किया गया है, तो वे सीधे जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

मुजफ्फरपुर प्रशासन की यह पहल राजस्व सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में अंचल कार्यालयों की कार्यशैली में वास्तव में बदलाव आता है और आम लोगों को दाखिल-खारिज की पेचीदगियों से राहत मिल पाती है या नहीं।