गोविंद हत्याकांड के आरोपी ओंकार को मां की अंतिम विदाई के लिए मिली दो दिनों की 'पैरोल', कोर्ट ने दी अनुमति

मुजफ्फरपुर: जिले के चर्चित शूटर गोविंद शर्मा हत्याकांड के आरोपी कुमार रणंजय ओंकार के घर में बुधवार की सुबह मातम छा गया। ओंकार की मां का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इस दुखद घड़ी में, जहां एक तरफ परिवार शोकाकुल है, वहीं दूसरी तरफ जेल में बंद ओंकार को अपनी मां को मुखाग्नि देने का मौका मिल सके, इसके लिए उसके पिता ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मानवीय आधार पर ओंकार को दो दिनों की अस्थायी रिहाई (जमानत) प्रदान की है।

पिता की गुहार और कोर्ट का मानवीय रुख

ओंकार के पिता विजय कुमार प्रसाद ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में एक अर्जी दाखिल की थी। अर्जी में उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि कुमार रणंजय ओंकार उनका बड़ा बेटा है। मां का निधन उनके लिए एक अपूरणीय क्षति है और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, बड़े बेटे का अंतिम संस्कार और अंत्येष्टि में शामिल होना आवश्यक है। पिता ने निवेदन किया कि उसे सिमरिया घाट पर होने वाली अंत्येष्टि के लिए कम से कम दो दिनों की रिहाई दी जाए।

अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए ओंकार को 2 जुलाई और 3 जुलाई के लिए पुलिस सुरक्षा के बीच मां की अंत्येष्टि और संबंधित रस्मों में भाग लेने की अनुमति दे दी।

क्या है पूरा मामला?

कुमार रणंजय ओंकार मुजफ्फरपुर के चर्चित गोविंद शर्मा हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। मृतक गोविंद शर्मा की पत्नी ने इस मामले में कुमार रणंजय ओंकार, बबलू चौधरी और डॉ. जैसमीन परवीन को नामजद आरोपी बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने गहन जांच के बाद ओंकार और बबलू चौधरी के साथ-साथ सौरभ कुमार को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

गौरतलब है कि इससे पहले भी ओंकार की ओर से नियमित जमानत (Regular Bail) के लिए अर्जी दी गई थी, जिसे साक्ष्य और मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है।

पुलिस सुरक्षा में संपन्न होगी अंत्येष्टि

कोर्ट के आदेश के बाद जेल प्रशासन ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। ओंकार को सख्त पुलिस सुरक्षा के घेरे में सिमरिया घाट ले जाया जाएगा, जहाँ वह अपनी मां के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह रिहाई केवल दो दिनों के लिए है और निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद उसे पुनः वापस जेल में समर्पित करना होगा।

क्षेत्र में चर्चा का विषय

इस घटना ने मुजफ्फरपुर के कानूनी और सामाजिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है। जहां एक तरफ कानून अपना काम कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय संवेदनाओं का सम्मान भी देखने को मिला है। परिवार के शुभचिंतकों ने दुख की इस घड़ी में ओंकार को अंतिम विदाई का मौका देने के लिए न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया है।

फिलहाल, ओंकार के घर पर गम का माहौल है और ग्रामीण अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पुलिस की कड़ी निगरानी में होने वाली यह अंत्येष्टि कानूनी प्रावधानों के तहत ही संपन्न कराई जाएगी।