टीबी के खिलाफ निर्णायक जंग और देश की बड़ी स्वास्थ्य उपलब्धियां

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता: भारत सरकार द्वारा देश को क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (National Tuberculosis Elimination Programme - NTEP) के तहत लगातार बड़े और कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। टीबी जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने इसे महज एक चिकित्सीय योजना तक सीमित न रखकर एक राष्ट्रव्यापी 'जन आंदोलन' का रूप दे दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ग्लोबल टीबी रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले कुछ वर्षों में टीबी के नए मामलों और इससे होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जो इस बात का प्रमाण है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य (NTEP का सफर)

वर्ष 2020 में सरकार ने 'संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम' (RNTCP) का नाम बदलकर राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) कर दिया था। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक लक्ष्यों (वर्ष 2030) से पांच साल पहले यानी देश से टीबी की बीमारी को पूरी तरह समाप्त करना है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से चार मजबूत स्तंभों पर आधारित है:

पहचान (Detect): संदिग्ध मरीजों की समय पर और उच्च गुणवत्ता वाली जांच।

उपचार (Treat): मरीजों को आधुनिक और प्रभावी दवाइयां उपलब्ध कराना।

रोकथाम (Prevent): संक्रमण को फैलने से रोकना और उच्च जोखिम वाले समूहों को सुरक्षा देना।

सुदृढ़ीकरण (Build): स्वास्थ्य ढांचे और प्रशासनिक सहयोग को मजबूत करना।

प्रमुख उपलब्धियां: आंकड़े और राहत भरी खबरें

हालिया सरकारी आंकड़ों और वैश्विक रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में टीबी के खिलाफ चलाई जा रही नीतियां बेहद प्रभावी साबित हो रही हैं:

टीबी के मामलों में तेज गिरावट: वर्ष 2015 की तुलना में देश में टीबी के नए मामलों की दर में लगभग 21% की कमी आई है। यह वैश्विक औसत गिरावट से लगभग दोगुनी रफ्तार से घट रही है।

मृत्यु दर में भारी कमी: इसी अवधि के दौरान टीबी के कारण होने वाली मौतों के आंकड़ों में भी 25% से 28% तक की गिरावट दर्ज की गई है।

दवा कवरेज (Treatment Coverage): देश में टीबी के मरीजों के उपचार का दायरा बढ़कर 92% तक पहुंच चुका है, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को जीवनदान मिल रहा है।

नि-क्षय पोर्टल और केस नोटिफिकेशन: निक्षय डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मरीजों की ट्रैकिंग आसान हुई है। वर्ष 2023, 2024 और 2025 में लगातार 25 लाख से अधिक टीबी मामलों का पंजीकरण किया गया है, जिससे 'छुप हुए मरीजों' (Missing Cases) की तलाश के अंतर को पाटने में बड़ी मदद मिली है। निजी क्षेत्र के अस्पतालों और डॉक्टरों की भागीदारी बढ़ने से प्राइवेट सेक्टर से आने वाले मामलों की सूचना में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान और 'नि-क्षय मित्र' पहल

टीबी के मरीजों को चिकित्सीय सहायता के साथ-साथ सामाजिक और पोषण संबंधी संबल प्रदान करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गई थी:

निक्षय मित्र योजना: इस पहल के तहत देश के सक्षम नागरिक, जनप्रतिनिधि, कॉरपोरेट संस्थान (CSR के तहत) और गैर-सरकारी संगठन 'निक्षय मित्र' बनकर टीबी के मरीजों को गोद लेते हैं।

पोषण सहायता: गोद लिए गए मरीजों को नियमित रूप से पौष्टिक आहार की किट वितरित की जाती है, ताकि दवाइयों का असर उनके शरीर पर बेहतर तरीके से हो सके और रिकवरी तेजी से हो सके। लाखों मरीज इस योजना के तहत सामुदायिक समर्थन प्राप्त कर चुके हैं।

नवीनतम तकनीक और 100 दिन का सघन अभियान

टीबी उन्मूलन की प्रक्रिया को और अधिक धार देने के लिए सरकार ने कई तकनीकी और व्यावहारिक कदम उठाए हैं:

बीपैलएम (BPaLM) रेजिमेन: ड्रग-रेसिस्टेंट (दवाओं से बेअसर होने वाली) टीबी के इलाज के लिए सरकार ने बेडाक्विलीन, प्रेटोमानिड, लाइनजोडिन और मोक्सीफ्लॉसासिन युक्त BPaLM रेजिमेन को शामिल किया है, जिससे इलाज की अवधि काफी कम हो जाती है और यह मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित व प्रभावी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग: टीबी की त्वरित जांच के लिए अब AI-संचालित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। छाती के एक्स-रे (Chest X-rays) की डिजिटल रीडिंग और खांसी की आवाज से संक्रमण का अनुमान लगाने वाली एआई प्रणालियों ने सुदूर इलाकों में भी जांच को आसान बना दिया है।

100 दिन का सघन अभियान: स्वास्थ्य मंत्रालय समय-समय पर विशेष 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान चलाता है। इसके तहत उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, शहरी वार्डों और घनी आबादी वाली बस्तियों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जाती है।

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) ने भारत में यह साबित कर दिया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति, मजबूत तकनीकी हस्तक्षेप, अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और जनभागीदारी (जन आंदोलन) को एक साथ मिला दिया जाए, तो किसी भी महामारी को हराया जा सकता है। हालांकि चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, लेकिन जिस गति से भारत ने टीबी के मामलों और मौतों में कमी लाई है, उससे यह स्पष्ट है कि देश एक स्वस्थ, मजबूत और 'टीबी-मुक्त भारत' के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है।