बिहार में पीएम श्री योजना के तहत 836 विद्यालय चयनित, लागत और केंद्रीय आवंटन में 21.96 करोड़ रुपये का अंतर; शिक्षा विभाग ने केंद्र से संशोधित आवंटन की मांग की
पटना। बिहार में विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (PM SHRI) योजना के क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण वित्तीय मुद्दा सामने आया है। राज्य के शिक्षा विभाग के आकलन के अनुसार, योजना के तहत केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाली राशि और वास्तविक परियोजना लागत के बीच 2,196.06 लाख रुपये (लगभग 21.96 करोड़ रुपये) का अंतर हो गया है। इस वित्तीय अंतर को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर योजना के आवंटन में संशोधन करने का अनुरोध किया है।
विभाग का कहना है कि यदि इस अंतर को समय रहते दूर कर दिया जाता है, तो योजना के तहत चयनित विद्यालयों में प्रस्तावित विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने में आसानी होगी और छात्रों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
836 विद्यालय योजना में शामिल
बिहार में 836 सरकारी विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित किया जाना है।
इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षण संसाधन, आधुनिक विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छ शौचालय, हरित परिसर तथा दिव्यांग-अनुकूल आधारभूत संरचना विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या है पीएम श्री योजना?
पीएम श्री (PM SHRI) योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख शिक्षा पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर के चुनिंदा सरकारी विद्यालयों को उत्कृष्ट मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है।
इस योजना के माध्यम से विद्यालयों में केवल आधारभूत सुविधाओं का विकास ही नहीं, बल्कि शिक्षण पद्धति, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और समग्र छात्र विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
योजना का उद्देश्य ऐसे विद्यालय तैयार करना है जो अन्य सरकारी स्कूलों के लिए प्रेरणा और उत्कृष्टता के केंद्र बन सकें।
लागत और आवंटन में क्यों आया अंतर?
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना के प्रारंभिक अनुमानों और वर्तमान वास्तविक लागत के बीच अंतर सामने आया है। निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि, तकनीकी उपकरणों की लागत, आधारभूत संरचना के उन्नयन तथा अन्य प्रशासनिक व्ययों के कारण कुल परियोजना लागत बढ़ी है।
इसी वजह से केंद्र सरकार से मिलने वाली स्वीकृत राशि और वर्तमान अनुमानित आवश्यकता के बीच लगभग 2,196.06 लाख रुपये का अंतर पैदा हो गया है।
केंद्र सरकार से संशोधित आवंटन का अनुरोध
इस वित्तीय अंतर को देखते हुए बिहार शिक्षा विभाग ने केंद्र सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजकर आवंटन में संशोधन करने का अनुरोध किया है।
विभाग का मानना है कि यदि संशोधित राशि स्वीकृत हो जाती है, तो विद्यालयों में निर्धारित सभी विकास कार्य बिना किसी वित्तीय बाधा के पूरे किए जा सकेंगे। इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में विद्यालयों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और अनुभव आधारित शिक्षण से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। पीएम श्री योजना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है।
योजना के तहत विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मकता, डिजिटल साक्षरता और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षकों को भी मिलेगा लाभ
विद्यालयों के आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी योजना में विशेष जोर दिया गया है। उन्हें आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल उपकरणों और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी एवं सहभागितापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी।
राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो बिहार की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय न केवल छात्रों को बेहतर सीखने का वातावरण देंगे, बल्कि सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत करेंगे।
साथ ही डिजिटल शिक्षा, प्रयोगात्मक शिक्षण और तकनीक आधारित अधिगम को भी व्यापक बढ़ावा मिलेगा।
समय पर वित्तीय सहायता का महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े शैक्षणिक विकास कार्यक्रम की सफलता समय पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने पर निर्भर करती है। यदि स्वीकृत बजट और वास्तविक लागत में बड़ा अंतर रह जाता है, तो परियोजनाओं की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
इसी कारण शिक्षा विभाग ने समय रहते केंद्र सरकार से संशोधित आवंटन की मांग की है ताकि विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
बिहार में पीएम श्री योजना के अंतर्गत 836 विद्यालयों को आधुनिक मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि शिक्षा विभाग के अनुसार, केंद्र से मिलने वाली राशि और वास्तविक परियोजना लागत के बीच 2,196.06 लाख रुपये का अंतर सामने आया है। इसे देखते हुए विभाग ने केंद्र सरकार से आवंटन में संशोधन का अनुरोध किया है।
यदि संशोधित वित्तीय सहायता स्वीकृत होती है, तो चयनित विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षा, बेहतर आधारभूत संरचना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण जैसी सुविधाओं का विकास तेज गति से किया जा सकेगा। यह पहल बिहार की विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा देने और छात्रों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।