RSS के शताब्दी वर्ष पर शिक्षण संस्थानों में आयोजित हुआ 'युवा संवाद'
भागलपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गौरवशाली शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मंगलवार को भागलपुर के शैक्षणिक वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। जिले के विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों और महाविद्यालयों में 'युवा संवाद' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा शक्ति को उनके नागरिक कर्तव्यों, सामाजिक दायित्वों और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराना था।
'युवा संवाद' के माध्यम से संघ ने आज की युवा पीढ़ी को यह संदेश दिया कि वे केवल डिग्री और करियर तक सीमित न रहें, बल्कि वे भारत के भविष्य के निर्माता के रूप में अपनी भूमिका को समझें।
युवाओं के साथ संवाद: राष्ट्र निर्माण का भविष्य
भागलपुर के कई कॉलेजों और स्कूलों में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वक्ताओं ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसकी युवा शक्ति की चेतना पर निर्भर करती है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई:
नागरिक कर्तव्य: एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों—जैसे कानूनों का पालन, स्वच्छता, और सामाजिक सद्भाव—का भी निर्वहन करना चाहिए।
राष्ट्र प्रथम (Nation First): वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्र की प्रगति के साथ जोड़कर ही हम एक विकसित भारत का सपना साकार कर सकते हैं।
चरित्र निर्माण: स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को उद्धृत करते हुए कहा गया कि 'चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण है'। संघ की कार्यपद्धति में व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण को एक-दूसरे का पूरक माना गया है।
शताब्दी वर्ष: गौरव और जिम्मेदारी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। यह शताब्दी वर्ष संघ के लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक आत्म-मंथन और भविष्य की कार्ययोजना का काल है।
भागलपुर में आयोजित युवा संवाद में संघ के स्वयंसेवकों ने बताया कि पिछले 100 वर्षों में संघ ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में किस प्रकार रचनात्मक कार्य किए हैं। शताब्दी वर्ष का लक्ष्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक राष्ट्रवाद की भावना को पहुंचाना है। शिक्षण संस्थानों में इस कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य भी यही था कि युवा वर्ग, जो कल का नेतृत्व करेगा, वह इन मूल्यों को आत्मसात करे।
छात्रों की सक्रिय भागीदारी
शिक्षण संस्थानों में आयोजित इन सत्रों में छात्रों ने भी खुलकर अपनी बात रखी। कई छात्रों ने 'आज का युवा और राष्ट्र सेवा' विषय पर अपने विचार साझा किए।
नवाचार और कौशल: छात्रों ने चर्चा की कि कैसे तकनीक और आधुनिक शिक्षा के साथ पारंपरिक मूल्यों का समन्वय किया जाए।
सामाजिक सरोकार: संवाद के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन, और समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने में युवाओं की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
एक छात्रा ने कहा, "युवा संवाद के माध्यम से हमें यह समझने का मौका मिला कि राष्ट्र की सेवा का मतलब केवल सेना में जाना ही नहीं है, बल्कि एक जागरूक नागरिक बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।"
शिक्षा संस्थानों में अनुकरणीय पहल
कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में ऐसी चर्चाओं की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम से परे जाकर जब युवा अपने देश की संस्कृति और इतिहास को जानते हैं, तो उनमें स्वाभिमान की भावना जागृत होती है।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि भागलपुर जैसे ऐतिहासिक शहर में, जहां शिक्षा और संस्कृति का संगम रहा है, युवाओं में राष्ट्र प्रेम की भावना पहले से ही विद्यमान है। इस संवाद का प्रयास उसे एक सही दिशा और मंच प्रदान करना है।
विकसित भारत की ओर अग्रसर युवा
'युवा संवाद' का समापन एक संकल्प के साथ हुआ, जहां उपस्थित सभी छात्रों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का प्रण लिया। भागलपुर में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि भारत का युवा वर्ग जागरूक हो रहा है।
शताब्दी वर्ष के इन कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज के हर वर्ग के साथ जुड़ने का प्रयास कर रहा है। भागलपुर में मंगलवार का दिन युवाओं के लिए प्रेरणादायी रहा, जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि वे अपने देश के लिए क्या कर सकते हैं। राष्ट्र निर्माण की यह यात्रा, जो वर्षों पहले शुरू हुई थी, आज की युवा पीढ़ी के कंधों पर और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।