नवगछिया या बिहपुर क्षेत्र के नगर पंचायत कार्यालय में मजदूरों का फूटा गुस्सा; बकाया मानदेय और बदहाल व्यवस्था को लेकर प्रशासन व कार्यदायी एजेंसी के खिलाफ जमकर लगाए नारे, कचरे के ढेर के पास प्रदर्शन से मचा हड़कंप

भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले नगरीय निकायों में स्वच्छता व्यवस्था और सफाई कर्मियों के अधिकारों को लेकर हालात कितने बदतर हो चुके हैं, इसकी एक बानगी हाल ही में सामने आई एक गंभीर घटना से मिलती है। नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत स्वच्छता और साफ-सफाई का जिम्मा संभालने वाले सैकड़ों सफाई मजदूरों एवं दैनिक वेतनभोगियों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। समय पर मानदेय (वेतन) न मिलने, काम के दौरान सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी और प्रशासनिक उपेक्षा से त्रस्त मजदूरों ने नगर पंचायत प्रशासन और सफाई कार्य में लगी निजी एजेंसी के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है। शहर के एक मुख्य कचरे के ढेर के पास इकट्ठा होकर मजदूरों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया।

कचरे के ढेर के पास मजदूरों का फूटा आक्रोश

सुबह-सुबह जब शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले ये मजदूर अपने काम पर जुटे थे, तो उनका असंतोष सड़कों पर उतर आया:

नारेबाजी से गूंजा इलाका: शहर के बीचों-बीच स्थित कचरे के एक बड़े ढेर के पास दर्जनों की संख्या में सफाई मजदूर और स्वच्छता कर्मी जमा हो गए। हाथों में झाड़ू और तख्तियां थामे मजदूरों ने नगर पंचायत कार्यालय और संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

श्रम शोषण का आरोप: प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना था कि वे शहर को स्वच्छ रखने के लिए सुबह से शाम तक गंदगियों के बीच काम करते हैं, लेकिन उन्हें उनका हक समय पर नहीं दिया जाता है। महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया जाता, जिससे उनके परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।

क्यों भड़के हैं मजदूर? (बकाया वेतन और कार्यस्थल की समस्याएं)

इस विरोध प्रदर्शन के पीछे कई गंभीर और बुनियादी कारण छिपे हैं, जिन्हें मजदूर लंबे समय से झेल रहे थे:

महीनों का वेतन बकाया: मजदूरों ने मुख्य रूप से आरोप लगाया कि नगर पंचायत द्वारा जिस निजी एजेंसी को साफ-सफाई का ठेका दिया गया है, वह एजेंसी समय पर उनका भुगतान नहीं कर रही है। पिछले कई महीनों से वेतन रुका हुआ है, जिसके कारण मजदूरों को अपने बच्चों की फीस भरने, राशन खरीदने और घर का किराया चुकाने तक में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सुरक्षा उपकरणों (Safety Kits) का अभाव: प्रदर्शनकारियों ने यह भी मुद्दा उठाया कि कचरे के ढेर और खतरनाक जैविक कचरे (Biomedical and Hazardous Waste) के बीच काम करने के बावजूद उन्हें एजेंसी की ओर से कोई सुरक्षा किट, दस्ताने (Gloves), जूते या मास्क मुहैया नहीं कराए जाते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

मनमाने तरीके से काम से हटाने की धमकी: मजदूरों ने आरोप लगाया कि जब भी वे अपने वेतन या अधिकारों की मांग करते हैं, तो एजेंसी के सुपरवाइज़र और अधिकारी उन्हें नौकरी से हटाने की धमकी देते हैं।

नगर पंचायत प्रशासन और एजेंसी की कार्यशैली पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय नगर पंचायत प्रशासन और सफाई का जिम्मा संभालने वाली निजी एजेंसी की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है:

जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ते अधिकारी: जब मीडिया और स्थानीय लोगों ने इस संबंध में नगर पंचायत के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, तो अधिकारी हमेशा की तरह पल्ला झाड़ते नजर आए। अधिकारियों का कहना था कि मामला निजी एजेंसी और मजदूरों के बीच का भुगतान विवाद है, जिसे जल्द सुलझा लिया जाएगा।

भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप: स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन और एजेंसी के बीच अंदरखाने गहरी मिलीभगत है। कागजों पर पूरा भुगतान दिखाया जाता है, लेकिन धरातल पर मजदूरों का शोषण बदस्तूर जारी है। एजेंसी मोटी रकम डकार रही है और गरीब मजदूर पाई-पाई को मोहताज हैं।

प्रदर्शन के बाद प्रशासन में खलबली, चेतावनी

कचरे के ढेर के पास मजदूरों द्वारा किए गए इस उग्र प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है:

वार्ता का आश्वासन: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत के कुछ कनिष्ठ अधिकारियों और पुलिस बल को मौके पर भेजा गया। अधिकारियों ने मजदूरों को शांत कराते हुए आश्वासन दिया कि अगले कुछ दिनों के भीतर उनके रुके हुए वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा और उनकी अन्य समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी: हालांकि, मजदूरों ने साफ कह दिया है कि अगर तय समय सीमा के भीतर उनके खातों में बकाया वेतन नहीं भेजा गया, तो वे नगर पंचायत कार्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे और शहर की सफाई पूरी तरह ठप कर देंगे।

नगर पंचायत प्रशासन और कार्यदायी एजेंसी के खिलाफ मजदूरों द्वारा कचरे के ढेर के पास किया गया यह प्रदर्शन इस बात का जीता-जागता सबूत है कि कागजी विकास और स्वच्छता अभियानों के पीछे कितनी बड़ी मानवीय पीड़ा छिपी हुई है। शहर को साफ रखने वाले सफाई कर्मियों का इस तरह सड़कों पर उतरकर नारे लगाना प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा तमांचा है। जरूरत इस बात की है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन तुरंत कड़े कदम उठाए, एजेंसी की मनमानी पर लगाम कसे और मजदूरों के हक का एक-एक रुपया समय पर उनके खातों में सुनिश्चित करे।