बिहार के चार शहरों में मेट्रो कब दौड़ेगी? कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी परियोजना अधर में, तय हो चुके हैं रूट

पटना: बिहार में आधुनिक और तेज़ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में लंबे समय से चर्चा में रही चार शहरों में मेट्रो परियोजना अब भी शुरुआती चरण से आगे नहीं बढ़ पाई है। राज्य सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक इन परियोजनाओं पर जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन शहरों में मेट्रो चलाने की योजना बनाई गई है, वहां संभावित रूट भी तय किए जा चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बिहार के इन शहरों में मेट्रो ट्रेन कब दौड़ेगी।

राज्य सरकार का मानना है कि मेट्रो परियोजना भविष्य में शहरी परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देगी। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय, वित्तीय स्वीकृति और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के विभिन्न चरणों को समय पर पूरा करना जरूरी होगा।

किन शहरों में प्रस्तावित है मेट्रो?

पटना में पहले से मेट्रो रेल परियोजना पर काम चल रहा है, लेकिन इसके अलावा राज्य सरकार ने मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और दरभंगा जैसे प्रमुख शहरों में भी मेट्रो या मेट्रो-लाइट प्रणाली विकसित करने की योजना बनाई है।

इन चारों शहरों का चयन उनकी बढ़ती आबादी, यातायात के दबाव, औद्योगिक एवं शैक्षणिक महत्व तथा भविष्य की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी काम क्यों नहीं शुरू हुआ?

राज्य कैबिनेट से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद थी कि परियोजना जल्द ही निर्माण चरण में पहुंच जाएगी। हालांकि अब तक भूमि अधिग्रहण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), वित्तीय मॉडल, तकनीकी स्वीकृतियों और निवेश संबंधी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो सकी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी मेट्रो परियोजना को शुरू करने से पहले कई स्तरों पर तकनीकी और आर्थिक अध्ययन करना पड़ता है। इसके बाद ही अंतिम मंजूरी और फंडिंग सुनिश्चित होती है।

रूट तय, लेकिन निर्माण का इंतजार

सरकार की प्रारंभिक योजना के अनुसार चारों शहरों में संभावित मेट्रो कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। प्रस्तावित रूटों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, प्रमुख बाजार, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों को जोड़ सकें।

हालांकि रूट तय होने के बावजूद निर्माण एजेंसी के चयन, टेंडर प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं में देरी के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया है।

बढ़ते ट्रैफिक को मिलेगी राहत

बिहार के प्रमुख शहरों में पिछले कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके कारण ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और यात्रा में लगने वाला समय लगातार बढ़ रहा है।

मेट्रो परियोजना के लागू होने से सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और शहरों में यातायात व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो केवल परिवहन परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम होती है। मेट्रो के निर्माण से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

इसके अलावा रियल एस्टेट, व्यापार, पर्यटन, होटल उद्योग और छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। मेट्रो स्टेशनों के आसपास नए व्यावसायिक केंद्र विकसित होने की संभावना है।

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद

मेट्रो रेल को पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली माना जाता है। इसके संचालन से निजी वाहनों का उपयोग कम होगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और वायु प्रदूषण पर भी नियंत्रण मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से शहरीकरण वाले शहरों के लिए मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही है।

लोगों की बढ़ रही उम्मीदें

मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और दरभंगा के लोगों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस परियोजना पर ठोस कदम उठाएगी। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों का कहना है कि मेट्रो शुरू होने से यात्रा आसान, सुरक्षित और समयबद्ध हो जाएगी।

स्थानीय उद्योग संगठनों ने भी परियोजना को शीघ्र शुरू करने की मांग की है ताकि शहरों का आर्थिक विकास तेज हो सके।

वित्तीय और तकनीकी चुनौतियां

मेट्रो परियोजनाएं अत्यधिक लागत वाली होती हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय भागीदारी, ऋण व्यवस्था और निजी निवेश जैसे पहलुओं पर सहमति बनाना महत्वपूर्ण होता है।

इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, यातायात अध्ययन, पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी परीक्षण जैसी प्रक्रियाएं भी समय लेती हैं।

विशेषज्ञों की राय

शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए और आवश्यकता के अनुसार मेट्रो-लाइट या मेट्रो-नियो जैसी कम लागत वाली प्रणालियों को अपनाया जाए, तो यह बिहार के लिए अधिक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

उनका मानना है कि शहरों की आबादी, यात्री संख्या और आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर परिवहन मॉडल का चयन किया जाना चाहिए।

सरकार की आगे की योजना

सरकार का लक्ष्य सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर परियोजना को आगे बढ़ाना है। अधिकारियों के अनुसार, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, तकनीकी अध्ययन और वित्तीय मॉडल पर काम जारी है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि अभी तक किसी भी शहर के लिए निर्माण शुरू होने या मेट्रो संचालन की निश्चित समय-सीमा की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

बिहार के मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और दरभंगा में प्रस्तावित मेट्रो परियोजनाएं राज्य के शहरी विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। कैबिनेट से मंजूरी और संभावित रूट तय होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाने से लोगों में उत्सुकता और सवाल दोनों बने हुए हैं। यदि परियोजना समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में इन शहरों की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की निगाह सरकार के अगले कदम, वित्तीय स्वीकृतियों और निर्माण कार्य की आधिकारिक शुरुआत पर टिकी हुई है।