पूर्णिया में मौसम का यू-टर्न: तेज धूप और उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल, तापमान में बढ़ोतरी दर्ज

पूर्णिया: बिहार के सीमांचल और पूर्वोत्तर हिस्से में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मानसूनी बारिश और फुहारों के कारण लोगों को गर्मी से जो राहत मिली थी, वह शनिवार को अचानक गायब हो गई। पूर्णिया और उसके आसपास के इलाकों में सुबह से ही तेज धूप खिलने के कारण उमस भरी गर्मी एक बार फिर से लौट आई है, जिससे आम जनजीवन खासा प्रभावित हुआ है। लोग चिपचिपी गर्मी और चिलचिलाती धूप से परेशान नजर आए।

अचानक बदले मौसम का मिजाज और तापमान में उछाल

पूर्णिया में शनिवार का दिन पिछले कुछ दिनों के मुकाबले काफी गर्म और उमस भरा रहा। सुबह होते ही आसमान साफ हो गया और सूरज की तीखी किरणों ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। दोपहर तक धूप इतनी तेज हो गई कि सड़कों पर आवाजाही करने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अचानक धूप निकलने और बादलों के हटने के कारण अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हवा में नमी (Humidity) का स्तर अधिक होने के कारण लोगों को वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी और बेचैनी महसूस हुई। दिनभर लोग पसीने से तरबतर नजर आए और बाजारों में भी दोपहर के समय सन्नाटा पसरा रहा।

उमस भरी गर्मी से आम जनजीवन प्रभावित

इस अचानक आए बदलाव ने दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और खुले आसमान के नीचे काम करने वाले मजदूरों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

दुकानदारों और कारोबारियों की मुश्किलें: बाजारों में गर्मी इतनी अधिक थी कि खरीदार दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से बचते दिखे, जिससे स्थानीय व्यापार पर भी आंशिक असर पड़ा।

बिजली की बढ़ती मांग: गर्मी बढ़ते ही एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल बढ़ गया, जिसके कारण कई इलाकों में बिजली की आंख-मिचौली और लो-वोल्टेज की समस्या भी देखने को मिली।

स्वास्थ्य पर असर: इस तरह के चिपचिपे और उमस भरे मौसम में डिहाइड्रेशन, वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। डॉक्टरों ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचने की सलाह दी है।

किसानों की बढ़ी चिंताएं

एक तरफ जहाँ आम शहरवासी गर्मी से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ किसानों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। जुलाई के इस महीने में धान की रोपाई और फसलों के विकास के लिए नियमित बारिश का होना बेहद जरूरी होता है। बीच में कुछ दिनों के लिए बारिश थमने और तेज धूप निकलने से खेतों की नमी तेजी से सूखने लगी है। यदि आने वाले कुछ दिनों तक झमाझम बारिश नहीं हुई, तो किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ सकते हैं।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान: क्या आगे मिलेगी राहत?

मौसम विज्ञान केंद्र के जानकारों का मानना है कि मानसून की टर्फ लाइन (Trough Line) में आए बदलाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह स्थिति लंबे समय तक रहने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर एक बार फिर से मानसूनी हवाएं सक्रिय हो सकती हैं, जिससे बादलों का डेरा जमेगा और राज्य के कई जिलों के साथ-साथ पूर्णिया में भी हल्की से मध्यम बारिश होने की उम्मीद है।