पूर्णिया में मौसम का मिजाज: रविवार को सुबह से आसमान में बादलों का डेरा रहने से बना रहा सुहावना मौसम, बीच-बीच में धूप निकलने से बढ़ी उमस और बेचैनी

बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र में मौसम का मिजाज इन दिनों लगातार करवट बदल रहा है। पूर्णिया जिले में मौसम को लेकर एक नया और दिलचस्प दौर देखने को मिल रहा है। रविवार के दिन सुबह से ही आसमान में घने बादलों का डेरा जमा रहा, जिसके चलते पूरे दिन हल्की छांव बनी रही और तापमान में नरमी आने से मौसम काफी सुहावना महसूस हुआ। हालांकि, बादलों की लुकाछिपी के बीच जब-जब तीखी धूप निकली, तब-तब वातावरण में उमस (Humidity) और बेचैनी काफी बढ़ गई। बादलों और धूप के इस दोहरे खेल के कारण आम जनजीवन और दैनिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं, जहां एक तरफ लोगों को चिलचिलाती धूप से कुछ राहत मिली, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती उमस ने लोगों को खासा परेशान किया।

बादलों की छांव से सुबह-सवेरे मिली राहत

रविवार का दिन पूर्णिया वासियों के लिए अन्य दिनों की तुलना में थोड़ा अलग और सुकून भरा लेकर आया था।

सुहानी सुबह और बादलों का पहरा: सुबह की शुरुआत सुहाने मौसम के साथ हुई। जब लोगों की आंखें खुलीं, तो उन्होंने आसमान में काले और घने बादलों की लंबी चादर तनी हुई पाई। सूरज बादलों के आगोश में छिपा हुआ था, जिससे सुबह की धूप की चुभन महसूस नहीं हुई।

ठंडी हवाओं का अहसास: बादलों की मौजूदगी और हल्के पूरवा हवा के झोंकों के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरों से बाहर निकलने वाले लोगों और सुबह की सैर पर जाने वाले मॉर्निंग वॉकर्स को काफी राहत और ठंडक का अहसास हुआ। मौसम के इस खुशनुमा मिजाज ने लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी थी।

 धूप निकलते ही उमस भरी गर्मी ने किया बेहाल

मौसम का यह सुहाना रूप ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया और दोपहर चढ़ते-चढ़ते बादलों के बीच से सूरज ने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी।

उमस का प्रकोप: जैसे ही बादलों के बीच से धूप खिली, वैसे ही वातावरण में मौजूद नमी (Moisture) के कारण भारी उमस पैदा हो गई। इस उमस भरी गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया। पसीना पोंछते हुए लोग छांव की तलाश करते नजर आए।

दोहरा मौसम: पूर्णिया के मौसम में यह उतार-चढ़ाव पूरे दिन बना रहा। कुछ पलों के लिए आसमान में बादल छा जाते और ठंडी हवा चलती, तो तुरंत बाद तेज धूप निकलकर शरीर को झुलसाने वाली गर्मी और घुटन महसूस कराने लगती। इस लुकाछिपी के खेल ने लोगों को मौसम के प्रति असमंजस में डाले रखा।

 उमस और बदलते मौसम का जनजीवन पर प्रभाव

मौसम के इस परिवर्तनशील और अस्थिर मिजाज का सीधा असर आम लोगों के दैनिक जीवन और स्वास्थ्य पर भी देखने को मिल रहा है।

बाजारों और सड़कों पर असर: दोपहर के समय उमस और घुटन इतनी अधिक बढ़ गई थी कि लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। बाजारों में अन्य दिनों की तुलना में थोड़ी कम चहल-पहल देखने को मिली, क्योंकि लोग तीखी धूप और उमस के इस मेल से बचते नजर आए।

स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां: मौसम में हो रहे इस बार-बार बदलाव—कभी ठंडक तो कभी भारी उमस—के कारण मौसमी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

 कृषि और किसानों पर मौसम का असर

पूर्णिया एक कृषि प्रधान क्षेत्र है, इसलिए यहां के किसानों की नजरें हमेशा आसमान और मौसम पर टिकी रहती हैं।

धान की फसल के लिए स्थिति: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की फसल के विकास के लिए बादलों की छांव और नमी कुछ मायनों में ठीक मानी जाती है, लेकिन उमस और उच्च आर्द्रता (High Humidity) के कारण कीटों और फफूंद जनित रोगों (Diseases) का खतरा काफी बढ़ जाता है।

बारिश की उम्मीद: बादलों के छाए रहने के बावजूद पर्याप्त बारिश न होने के कारण खेतों में नमी की कमी महसूस हो रही है। किसान आसमान में मंडरा रहे बादलों को देखकर अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि फसलों की सिंचाई की समस्या से निजात मिल सके और उन्हें बेहतर पैदावार मिल सके।