दीवारों में दरारें आते ही भड़के ग्रामीणों ने किया हंगामा, निर्माण कार्य को रुकवाकर उच्चस्तरीय जांच की मांग

बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने, आम जनता को सभी सरकारी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता लाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से पंचायत सरकार भवन (Panchayat Sarkar Bhawan) का निर्माण कराया जा रहा है। इसी कड़ी में पूर्णिया जिले के अंतर्गत आने वाली भटौनी पंचायत (Bhatauni Panchayat) में तीन करोड़ छह लाख रुपये (Rs 3.06 Crore) की भारी-भरकम लागत से निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन इन दिनों भारी भ्रष्टाचार और अनियमितता के कारण सुर्खियों में आ गया है।

भवन के निर्माण कार्य के दौरान ही दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें (Cracks) उभरने लगीं, जिसे देखकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में निर्माण स्थल पर एकत्र होकर जमकर हंगामा किया और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोक दिया। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में संवेदक (ठेकेदार) और संबंधित अभियंत्रण विभाग की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। आइए भटौनी पंचायत में चल रहे इस पंचायत सरकार भवन निर्माण में भ्रष्टाचार के खेल, ग्रामीणों के आक्रोश और प्रशासनिक लापरवाही का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

परियोजना की पृष्ठभूमि: क्यों बनाई जा रही है यह बड़ी इमारत?

पंचायतों के विकास के लिए सरकार द्वारा पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, ताकि ग्रामीण भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल सकें।

एक छत के नीचे सभी सुविधाएं: भटौनी पंचायत में बनने वाले इस पंचायत सरकार भवन के पीछे सरकार की मंशा यह थी कि मुखिया, पंचायत सचिव, राजस्व कर्मचारी और अन्य ग्रामीण कर्मी एक ही कार्यालय में बैठकर जनता के कार्यों का निष्पादन कर सकें। इसके अलावा इसमें मीटिंग हॉल, कंप्यूटर कक्ष और अभिलेखों के रखरखाव के लिए सुरक्षित कमरे बनाए जाने का प्रावधान है।

बड़ी लागत राशि: इस आधुनिक और बहुउद्देशीय भवन के निर्माण के लिए सरकार के खजाने से 3 करोड़ 6 लाख रुपये की भारी राशि स्वीकृत की गई थी, ताकि उच्च गुणवत्ता का निर्माण हो सके। लेकिन धरातल पर तस्वीर इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।

भ्रष्टाचार की पोल खुली: दीवारों में आईं गहरी दरारें

किसी भी सरकारी भवन के निर्माण के शुरुआती चरण में ही यदि दीवारों में दरारें आने लगें, तो उसकी मजबूती और उसमें बरती गई अनियमितता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

निर्माण पूरा होने से पहले ही जर्जर स्थिति: भटौनी पंचायत में बन रहे इस भवन की अभी दीवारें ही खड़ी हुई थीं और प्लास्टर का काम शुरू होने वाला था कि दीवारों में लंबी और चौड़ी दरारें स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगीं।

घटिया सामग्री का इस्तेमाल: स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा मानक के विपरीत बालू, सीमेंट और ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। छड़ और कंक्रीट के अनुपात में भी बड़े पैमाने पर धांधली की गई है, जिसके कारण दीवारें अभी से ही वजन सहन नहीं कर पा रही हैं और चटकने लगी हैं।

बालू और सीमेंट की मिलावट: ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य में इतनी अधिक अनियमितता बरती गई है कि हाथों से रगड़ने पर दीवारें भरभराकर उखड़ने लगी हैं। यह सीधे तौर पर सरकारी धन की लूट और जनता के साथ धोखाधड़ी का मामला है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: निर्माण स्थल पर किया हंगामा और काम ठप

जब ग्रामीणों ने करोड़ों की लागत से बनने वाले इस भवन में इस प्रकार की घटिया निर्माण शैली देखी, तो उनका सब्र टूट गया।

निर्माण स्थल पर नारेबाजी: बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और स्थानीय बुद्धिजीवी भटौनी पंचायत में निर्माणाधीन स्थल पर पहुँच गए। उन्होंने निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को काम करने से रोक दिया और 'ठेकेदार मुर्दाबाद' तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

काम को पूरी तरह रुकवाया: ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक जिले के वरीय अधिकारी मौके पर आकर जांच नहीं करेंगे और इस घटिया निर्माण को तोड़कर दोबारा मानक के अनुसार कार्य शुरू नहीं कराया जाएगा, तब तक वे यहाँ एक ईंट भी नहीं रखने देंगे।

सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता: ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह भवन इसी तरह घटिया सामग्री से बनकर तैयार हो गया, तो भविष्य में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे इसमें आने वाले पंचायत कर्मियों और आम नागरिकों की जान को खतरा पैदा हो सकता है।

ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका

इस प्रकार के मामलों में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय स्तर पर निगरानी रखने वाले अभियंताओं (Engineers) और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठता है।

लापरवाही की इंतहा: नियमानुसार किसी भी सरकारी निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग के लिए कनीय अभियंता (Junior Engineer) और सहायक अभियंता की नियुक्ति होती है, जो समय-समय पर निर्माण की गुणवत्ता की जांच करते हैं। लेकिन भटौनी पंचायत में दीवारों में दरारें आने तक किसी भी अधिकारी का ध्यान इस ओर क्यों नहीं गया, यह बड़ा सवाल है।

मिलीभगत की आशंका: ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही खुलेआम घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो सरकारी खजाने का पैसा पानी की तरह बह जाएगा और इमारत खंडहर में तब्दील हो जाएगी।

पूर्णिया जिले की भटौनी पंचायत में तीन करोड़ छह लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन में दीवारों का चटकना और ग्रामीणों द्वारा कार्य रोका जाना यह साबित करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किस स्तर पर धांधली हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उठाया गया यह कदम पूरी तरह से जायज है और यह सरकारी धन की बर्बादी के खिलाफ एक बड़ा संदेश है। जिला प्रशासन और ग्रामीण विकास विभाग को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक उच्चस्तरीय जांच टीम गठित करनी चाहिए, दोषी ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए तथा भवन का निर्माण पूरी पारदर्शिता और मानक के साथ दोबारा सुनिश्चित कराना चाहिए।