सबलपुर गांव की पीड़िता ने इंसाफ की गुहार लगाई, थाना परिसर में मचा हड़कंप
पीरपैंती (भागलपुर): भागलपुर जिले के पीरपैंती थाना क्षेत्र में एक महिला द्वारा पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मामला सामने आया है। सबलपुर गांव की एक निवासी महिला ने पीरपैंती थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। इस घटना के बाद से स्थानीय क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और यह मामला पीरपैंती थाने की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि: क्या है पूरा विवाद?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सबलपुर गांव की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके साथ हुई किसी घटना की शिकायत लेकर वह पिछले कई दिनों से पीरपैंती थाने का चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है। पीड़िता का दावा है कि उसके साथ हुई प्रताड़ना के बावजूद पुलिस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय टालमटोल कर रही है।
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब वह अपनी आपबीती सुनाने के लिए थाने पहुंची, तो उसे उचित सम्मान नहीं दिया गया और न ही उसकी प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। महिला का कहना है कि पुलिस के इस उदासीन रवैये के कारण आरोपी पक्ष का मनोबल बढ़ रहा है और उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं।
पीड़िता का आरोप: 'न्याय के लिए भटक रही हूं'
सबलपुर गांव की पीड़िता ने मीडिया से बात करते हुए फफकते हुए कहा, "मैं एक महिला हूं और अपने गांव में असुरक्षित महसूस कर रही हूं। मैंने पीरपैंती थाना को कई बार लिखित शिकायत दी, लेकिन हर बार मुझे सिर्फ कोरे आश्वासन मिले हैं। पुलिस की कार्यशैली से ऐसा लगता है कि अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है।"
उसने यह भी दावा किया कि थाना में उसकी बात सुनने के बजाय उसे वहां से बार-बार वापस भेज दिया जाता है। इस स्थिति ने उसे मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। पीड़िता ने स्पष्ट कहा है कि यदि पुलिस ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की, तो वह आत्मदाह जैसा कदम उठाने पर मजबूर होगी।
थानाध्यक्ष का पक्ष: आरोपों को सिरे से किया खारिज
इस पूरे प्रकरण पर जब पीरपैंती थानाध्यक्ष से संपर्क किया गया, तो उन्होंने पीड़िता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत करार दिया। उन्होंने कहा, "पुलिस के पास जब भी कोई शिकायत आती है, हम उसकी जांच करते हैं। मामले में वास्तविकता कुछ और ही है, जिसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। पुलिस कानून के दायरे में रहकर काम करती है और किसी भी प्रकार के पक्षपात का सवाल ही नहीं उठता।"
थानाध्यक्ष ने आगे बताया कि उक्त मामला आपसी जमीन विवाद या पारिवारिक कलह से जुड़ा हो सकता है, जिसकी पुलिस पहले ही जांच कर रही है। कानून की प्रक्रिया पूरी किए बिना केस दर्ज नहीं किया जा सकता, इसलिए कानूनी बारीकियों को समझाना 'टालमटोल' नहीं कहा जा सकता।
क्षेत्र में चर्चा: पुलिस और आम जनता के बीच की खाई
पीरपैंती के सबलपुर गांव में हुई यह घटना समाज में पुलिस और आम जनता के बीच के 'विश्वास की कमी' को दर्शाती है।
आम धारणा: ग्रामीणों का एक वर्ग मान रहा है कि छोटी-मोटी शिकायतों को समय पर सुलझाने में अक्सर देरी होती है, जिससे मामला बड़ा हो जाता है।
पुलिस का दृष्टिकोण: दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई बार आपसी रंजिश के कारण लोग गलत एफआईआर (FIR) दर्ज कराने का दबाव बनाते हैं।
इस घटना के बाद से स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी भी सक्रिय हो गए हैं। उनका कहना है कि थानों में 'महिला हेल्प डेस्क' की सक्रियता बढ़ानी चाहिए ताकि महिलाएं बिना डरे अपनी बात कह सकें।
आगे क्या? उच्चाधिकारियों तक पहुंचा मामला
पीड़िता ने केवल थाना स्तर पर ही नहीं, बल्कि वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) को भी आवेदन देकर इंसाफ की गुहार लगाई है। उसने अपने आवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया है कि उसे स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है और उसने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
समाधान या राजनीतिक खेल?
पीरपैंती की यह घटना प्रशासन और आम जनता के बीच के संवाद की कमी को उजागर करती है। चाहे आरोप सही हों या गलत, लेकिन एक महिला का थाना परिसर में जाकर न्याय न मिलने की बात कहना पुलिस की छवि के लिए घातक है।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या मामले की निष्पक्ष जांच होगी, या यह केस भी फाइलों के ढेर में कहीं दब जाएगा? सबलपुर गांव की इस महिला की हताशा का समाधान ही पुलिस की असली परीक्षा होगी। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि पुलिस हर एक शिकायत को गंभीरता से ले, ताकि आम आदमी का खाकी पर से विश्वास न डगमगाए।