कार खराब होने से घंटों रेंगते रहे वाहन, प्रशासन की तैयारियों पर फिर उठे सवाल
भागलपुर: विक्रमशिला सेतु पर सोमवार की सुबह एक बार फिर यातायात व्यवस्था चरमरा गई। पुल के बीचों-बीच एक कार के अचानक खराब हो जाने से वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। घंटों तक चले इस जाम के कारण ऑफिस जाने वाले लोगों, मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पुल पर लगे अस्थायी डिवाइडरों के कारण वाहनों का निकलना दूभर हो गया था, जिससे समस्या और भी विकराल हो गई।
सुबह का समय और जाम का 'ट्रैफिक नर्क'
सोमवार की सुबह, जब लोग अपने काम और दफ्तरों के लिए निकल रहे थे, तभी करीब 9:30 बजे पुल के मध्य भाग में एक कार अचानक खराब होकर बंद हो गई। कार के बंद होते ही उसके पीछे वाहनों की एक लंबी कतार लग गई। चूंकि सेतु पर मरम्मत कार्य के चलते अस्थायी डिवाइडर और बैरिकेड्स लगाए गए हैं, इसलिए पीछे से आ रहे भारी वाहन या अन्य गाड़ियां कार को ओवरटेक नहीं कर सकीं। देखते ही देखते जाम का दायरा बढ़ता गया और यह पुल के दोनों सिरों—बरारी और नवगछिया की ओर—कई किलोमीटर तक फैल गया।
डिवाइडर बने बाधा, नहीं मिल सकी जगह
स्थानीय यात्रियों ने बताया कि पुल की चौड़ाई पहले से ही कम है और उस पर अस्थायी डिवाइडरों ने सड़क को और भी संकरा बना दिया है। सोमवार की घटना ने यह साबित कर दिया कि पुल पर यदि कोई छोटी सी भी तकनीकी खराबी आती है, तो पूरा ट्रैफिक सिस्टम ध्वस्त हो जाता है। जाम में फंसे एक यात्री ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "पुल पर रेंगना मजबूरी बन गई है। जब तक प्रशासन यहां क्रेन या क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की स्थायी तैनाती नहीं करेगा, तब तक जनता को इस नर्क से मुक्ति नहीं मिलेगी।"
टीओपी (TOP) पुलिस की त्वरित कार्रवाई
जाम की सूचना मिलते ही ट्रैफिक आउट पोस्ट (TOP) की पुलिस टीम हरकत में आई। पुलिस बल के जवान कड़ी मशक्कत करते हुए जाम के बीच से होते हुए घटना स्थल तक पहुंचे। वहां पहुंचकर पुलिस ने क्रेन की मदद से खराब कार को सड़क के किनारे किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल हो सका। हालांकि, इस प्रक्रिया में करीब डेढ़ से दो घंटे का समय लग गया, तब तक हजारों यात्री धूप और उमस में परेशान होते रहे।
क्या प्रशासन की योजनाएं नाकाफी हैं?
विक्रमशिला सेतु पर बढ़ते जाम को देखते हुए प्रशासन ने हाल ही में कई वादे किए थे, जिनमें फेरी सेवा को मजबूत करना और क्रेन की तैनाती शामिल थी। बावजूद इसके, सोमवार की घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्विक रिस्पांस की कमी: क्या पुल के दोनों छोरों पर पर्याप्त क्रेन और टो-वेन (Tow-van) तैनात हैं? सोमवार को पुलिस को कार हटाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, जो दर्शाता है कि संसाधन कम पड़ रहे हैं।
अस्थायी डिवाइडरों का गणित: क्या इन डिवाइडरों की डिजाइन में कोई गलती है, जिससे ट्रैफिक ओवरटेक नहीं कर पा रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि डिवाइडरों के बीच 'इमरजेंसी गेट' का अभाव इस समस्या का मुख्य कारण है।
ट्रैफिक मैनेजमेंट की विफलता: सोमवार जैसे पीक-ऑवर के दौरान, जब पुल पर पहले से ही निर्माण कार्य चल रहा है, तब अधिक पुलिस बल की तैनाती क्यों नहीं की जाती?
जनता की मांग: स्थायी समाधान ही एकमात्र रास्ता
भागलपुर के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि जब तक विक्रमशिला सेतु का नया ट्रस ब्रिज या दूसरा पुल पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक 'कामचलाऊ' व्यवस्था से काम नहीं चलेगा। सेतु पर 24/7 पेट्रोलिंग टीम, आपातकालीन क्रेन सेवा और लाउडस्पीकर के माध्यम से ट्रैफिक अपडेट देने जैसी व्यवस्थाएं तत्काल लागू की जानी चाहिए।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद जिला पुलिस ने एक बार फिर सेतु के रखरखाव करने वाली एजेंसी को निर्देश दिए हैं कि वे पुल के हर 500 मीटर पर एक क्रेन की सुविधा सुनिश्चित करें। साथ ही, डिवाइडरों में अंतराल देने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि वाहन खराब होने की स्थिति में उन्हें साइड में किया जा सके।
सोमवार की यह घटना केवल एक कार की खराबी नहीं थी, बल्कि यह विक्रमशिला सेतु की उस कमजोर कड़ी की ओर इशारा है, जो रोजाना लाखों लोगों की जिंदगी के कीमती घंटों को जाम की भेंट चढ़ा रही है।