श्रावणी मेले में अटूट आस्था और अनहोनी का दर्द; गंगा घाट से बाबाधाम जा रही 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला कांवरिया को बाइक ने मारी टक्कर, डायल 112 की तत्परता से बचाई गई जान
भागलपुर/सुल्तानगंज, कार्यालय संवाददाता: विश्व प्रसिद्ध पवित्र श्रावणी मेले के दौरान जहाँ एक ओर देश के कोने-कोने से आ रहे शिवभक्तों की अटूट आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कभी-कभार होने वाली असावधानीपूर्ण घटनाएं श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती हैं। सुल्तानगंज के पावन उत्तरवाहिनी गंगा तट से जल भरकर देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम की कठिन यात्रा पर निकली एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला कांवरिया सड़क हादसे का शिकार हो गई। यात्रा के दौरान एक तेज रफ्तार अनियंत्रित बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस नाज़ुक और संकट के क्षण में डायल 112 की पुलिस टीम एक बार फिर फरिश्ता बनकर सामने आई और तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुँचाकर उनका जीवन सुरक्षित किया।
घटनाक्रम: जब आस्था की डगर पर हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सावन के इस पवित्र माहौल में जहाँ हर तरफ बम-बम भोले के जयकारों की गूंज थी, वहीं सुल्तानगंज क्षेत्र में अचानक हुई इस दुर्घटना ने कुछ पलों के लिए अफरा-तफरी मचा दी:
गंगा जल उठाकर बढ़ रही थीं आगे: यह हृदयविदारक घटना उस समय घटी जब 80 साल की यह बुजुर्ग महिला अपनी उम्र और शारीरिक कमजोरी को दरकिनार करते हुए, केवल भगवान शिव के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और विश्वास के बल पर सुल्तानगंज गंगा घाट से पवित्र जल उठाकर कांवर के साथ देवघर की लंबी पदयात्रा पर रवाना हुई थीं।
लापरवाह बाइक ने मारी टक्कर: कांवरिया पथ या मुख्य सड़क मार्ग के पास से गुजरते वक्त तेज गति से आ रही एक अनियंत्रित मोटरसाइकिल ने बुजुर्ग महिला को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वे संभल नहीं पाईं और सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं।
बुजुर्ग महिला की स्थिति और मौके पर भगदड़ जैसा माहौल
इस दुर्घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य कांवरियों और राहगीरों के होश उड़ गए:
दर्द से कराहती रहीं बुजुर्ग: अत्यधिक उम्र होने के कारण शरीर की सहनशक्ति कम होती है, और इस भीषण ठोकर के कारण बुजुर्ग महिला दर्द से बेहाल होकर सड़क पर ही कराहने लगीं। उनके पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक दर्द के कारण वे अचेत होने की स्थिति में पहुँच गईं।
राहगीरों की भीड़ और असमंजस: दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस तरह के मामलों में अक्सर लोग कानूनी पचड़ों में फंसने के डर से आगे आने से कतराते हैं, लेकिन गनीमत यह रही कि उसी दौरान वहां से बिहार पुलिस की डायल 112 की पेट्रोलिंग टीम गुजर रही थी।
डायल 112 की टीम बनी देवदूत: त्वरित कार्रवाई से मिला नया जीवन
संकट के इस बादल के बीच डायल 112 के जवानों ने अपनी जिम्मेदारी का उत्कृष्ट परिचय दिया:
बिना वक्त गंवाए संभाला मोर्चा: डायल 112 वाहन पर तैनात पुलिसकर्मियों की नजर जैसे ही घायल बुजुर्ग महिला और वहां जुटी भीड़ पर पड़ी, उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रोक दी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस बल के जवानों ने बिना एक पल भी गंवाए तुरंत बुजुर्ग महिला के पास पहुँचे।
खुद उठाया और गाड़ी में लिटाया: पुलिसकर्मियों ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए घायल महिला को बेहद सावधानी के साथ उठाया और अपनी सरकारी डायल 112 की गाड़ी में लिटाया। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर अन्य औपचारिकताएं छोड़कर सीधे अस्पताल की तरफ रुख किया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ सफल इलाज
डायल 112 के जवानों ने सायरन बजाते हुए कम से कम समय में बुजुर्ग कांवरिया को सुल्तानगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया:
अस्पताल में आपातकालीन उपचार: अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए बुजुर्ग महिला का तुरंत उपचार शुरू किया। उनके घावों पर मरहम-पट्टी की गई और एक्स-रे व अन्य जांचें कर यह सुनिश्चित किया गया कि अंदरूनी चोटें कितनी गंभीर हैं।
डॉक्टरों की प्रतिक्रिया: चिकित्सकों ने बताया कि समय पर अस्पताल पहुंचाए जाने के कारण बुजुर्ग महिला की स्थिति अब खतरे से बाहर है। यदि अस्पताल पहुँचने में थोड़ी भी और देर होती, तो अत्यधिक दर्द और उम्र के कारण उनकी हालत और अधिक बिगड़ सकती थी। डॉक्टरों ने डायल 112 की इस त्वरित और मानवीय कार्रवाई की खुलकर प्रशंसा की है।
80 वर्ष की उम्र में भी बाबा भोलेनाथ के प्रति ऐसी अटूट निष्ठा और समर्पण हर किसी को भावुक कर देने वाला है। हालांकि बाइक की ठोकर से उन्हें चोट जरूर आई, लेकिन डायल 112 की तत्परता और समय पर मिले चिकित्सीय उपचार ने यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक सतर्कता किस प्रकार किसी की जान बचा सकती है। यह घटना एक तरफ जहां सड़क पर वाहन चालकों को नियंत्रण रखने की नसीहत देती है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग की संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण भी पेश करती है।