इंजीनियर बनने का विकल्प ठुकराकर आकृति ने चुनी चिकित्सा की राह, नीट (NEET-UG) में 625 अंकों के साथ हासिल की सफलता

सपनों को पूरा करने का जज्बा हो तो इंसान अपने तय किए हुए रास्ते को भी बदल सकता है। दरभंगा की मेधावी छात्रा आकृति कुमारी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। जेईई मेन (JEE Main) में 98 परसेंटाइल जैसी शानदार उपलब्धि हासिल करने के बाद एनआईटी (NIT) पटना में दाखिला न लेकर, आकृति ने अपने दादाजी के सपने को अपना लक्ष्य बनाया। आज उन्होंने नीट यूजी (NEET-UG) में 625 अंक और 98.8 परसेंटाइल प्राप्त कर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है।

इंजीनियर से डॉक्टर बनने तक का सफर

आकृति की कहानी लीक से हटकर है। जब अधिकांश छात्र इंजीनियरिंग की ओर भागते हैं, तब आकृति ने अपने परिवार की इच्छा और दादाजी के सपने को प्राथमिकता दी।

जेईई मेन में सफलता: 2025 में आकृति ने जेईई मेन परीक्षा में 98 परसेंटाइल का स्कोर हासिल किया था। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी और उन्हें एनआईटी पटना जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में सीट भी मिल रही थी।

लक्ष्य में बदलाव: करियर के इस अहम मोड़ पर आकृति ने एनआईटी का विकल्प छोड़ दिया। उनके दादाजी हमेशा उन्हें डॉक्टर के रूप में देखना चाहते थे। उनके उस अधूरे सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी आकृति ने अपने कंधों पर ली।

नीट में दूसरा प्रयास: अपने पहले प्रयास में कुछ कमी रहने के बाद, आकृति ने हार नहीं मानी। उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ दूसरे प्रयास की तैयारी की।

मेहनत और तैयारी की रणनीति

आकृति की सफलता के पीछे उनके द्वारा अपनाई गई अनुशासित तैयारी और अटूट संकल्प का बड़ा हाथ है।

कड़ी मेहनत: आकृति ने बताया कि इंजीनियरिंग के विषय और मेडिकल के विषयों में काफी अंतर होता है। उन्होंने शून्य से शुरुआत की और जीव विज्ञान (Biology) के कॉन्सेप्ट्स को गहराई से समझा।

समय प्रबंधन: पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना पूरा ध्यान नीट के पाठ्यक्रम (Syllabus) पर केंद्रित किया। मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों ने उन्हें परीक्षा के दबाव से निपटने में मदद की।

पारिवारिक सहयोग: आकृति के इस निर्णय में उनके माता-पिता ने उनका पूरा साथ दिया। दादाजी के सपने को पूरा करने की प्रेरणा ही उन्हें हर कठिन दौर से बाहर निकालती रही।

उपलब्धियों का सारांश

विवरणआकृति कुमारी का प्रदर्शन
जेईई मेन (2025)98 परसेंटाइल
नीट यूजी (2026)625 अंक / 98.8 परसेंटाइल
उद्देश्यदादाजी का सपना पूरा करना
स्थानदरभंगा

भविष्य की योजना और प्रेरणा

आकृति अब एक डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं। उनका मानना है कि इंजीनियरिंग का ज्ञान कहीं नहीं जाता, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र में सेवा करने से जो संतुष्टि मिलती है, वह अद्भुत है। आकृति की यह उपलब्धि दरभंगा के उन सभी छात्रों के लिए एक मिसाल है जो अक्सर दूसरों के दबाव में आकर अपने करियर का चुनाव करते हैं। आकृति ने साबित कर दिया है कि यदि आपका लक्ष्य स्पष्ट हो और आपके पास उसे पाने का साहस हो, तो सफलता जरूर मिलती है।

दादाजी का सपना हुआ पूरा

आकृति की सफलता से उनके घर में खुशी का माहौल है। दादाजी के सपने को धरातल पर उतारने वाली आकृति पर आज पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। उनकी मेहनत ने न केवल उनका करियर संवारा, बल्कि एक पारिवारिक परंपरा और सपने को भी सम्मान दिया है।

आकृति कुमारी का यह सफर हमें सिखाता है कि कभी-कभी सफलता को छोड़कर एक बड़े और महान उद्देश्य की ओर बढ़ना ही असली कामयाबी है। जेईई से नीट तक का यह सफर उनके धैर्य, लगन और दादाजी के प्रति उनके प्रेम का प्रमाण है। आकृति अब आने वाले समय में एक कुशल चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएँ देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।