मुजफ्फरपुर में मार्क्सवादी चिंतक शिवदास घोष के स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन: वक्ताओं ने उनके क्रांतिकारी विचारों को किया याद, शोषण और अन्याय के खिलाफ हुंकार
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में महान मार्क्सवादी चिंतक, विचारक और एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के संस्थापक महासचिव शिवदास घोष की पुण्यतिथि पर एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न क्षेत्रों से आए राजनीतिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और पार्टी के समर्पित सदस्यों ने हिस्सा लिया और उनके तैलচিত্র पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सभा के दौरान पार्टी सदस्यों ने शिवदास घोष के जीवन दर्शन, उनके संघर्षपूर्ण इतिहास और वर्तमान समय में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पार्टी सदस्य अर्जुन कुमार का ओजस्वी संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने मार्क्सवादी सिद्धांतों के आलोक में समाज के दबे-कुचले लोगों के अधिकारों और व्यवस्थागत अन्याय के खिलाफ मुखर होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
मार्क्सवादी चिंतक शिवदास घोष का जीवन और उनका ऐतिहासिक योगदान
शिवदास घोष भारतीय उपमहाद्वीप के उन महान और दूरदर्शी राजनीतिक विचारकों में गिने जाते हैं जिन्होंने मार्क्सवाद-लेनिनवाद और माओ त्से-तुंग के विचारों को पूरी वैचारिक दृढ़ता और ईमानदारी के साथ देश की राजनीति में स्थापित करने का काम किया।
एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) की स्थापना: उन्होंने अपने जीवनकाल में आम मेहनतकश अवाम, किसानों और मजदूरों को एक सही क्रांतिकारी दिशा देने के उद्देश्य से सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (SUCI) की नींव रखी थी। उनका पूरा जीवन पूंजीवादी व्यवस्था, शोषण और साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ संघर्ष करते हुए बीता।
सच्चे मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारक: वक्ताओं ने याद किया कि शिवदास घोष ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन से समाज में वास्तविक बदलाव नहीं आ सकता, बल्कि जब तक समाज से हर प्रकार का आर्थिक और सामाजिक शोषण समाप्त नहीं होता, तब तक सच्ची स्वतंत्रता अधूरी है।
अर्जुन कुमार का संबोधन: शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का आह्वान
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रमुख सदस्य अर्जुन कुमार ने शिवदास घोष के राजनीतिक और दार्शनिक विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का समय वैचारिक संकट और तानाशाही प्रवृत्तियों का दौर है, ऐसे में शिवदास घोष के विचार समाज को एक नई दिशा दिखाने का काम करते हैं।
पूंजीवादी व्यवस्था पर प्रहार: अर्जुन कुमार ने अपने संबोधन में वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और कॉरपोरेट परस्ती की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज देश की अधिकांश संपत्ति गिने-चुने लोगों के हाथों में सिमटती जा रही है, जबकि आम मजदूर, किसान और नौजवान दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है।
एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत: उन्होंने जोर देकर कहा कि शिवदास घोष के सपनों का समाज तभी बन सकता है जब देश का शोषित और पीड़ित वर्ग जाति, धर्म और संकीर्ण दीवारों से ऊपर उठकर अन्याय के खिलाफ एक मजबूत और संगठित जन-आंदोलन खड़ा करे। मार्क्सवादी विचारधारा ही वह माध्यम है जो समाज में बराबरी और न्याय स्थापित कर सकती है।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और वैचारिक प्रासंगिकता
सभा में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के दौर में जब लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के मौलिक अधिकारों पर चौतरफा हमले हो रहे हैं, तब शिवदास घोष की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है।
नैतिक और राजनीतिक पतन के खिलाफ चेतना: वक्ताओं ने कहा कि शिवदास घोष ने हमेशा राजनीति में उसूलों, नैतिकता और जनहित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने कभी भी अवसरवादी राजनीति का समर्थन नहीं किया, बल्कि हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की पैरोकारी की।
युवाओं से वैचारिक प्रेरणा लेने की अपील: श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से युवा पीढ़ी से आह्वान किया गया कि वे इतिहास के पन्नों को पलटें और शिवदास घोष जैसी महान हस्तियों के जीवन व साहित्य का अध्ययन करें, ताकि वे समाज की वास्तविक सच्चाइयों से रूबरू हो सकें और देश की दशा-दिशा बदलने में अपनी सार्थक भूमिका निभा सकें।
संकल्प सभा के रूप में संपन्न हुआ कार्यक्रम
यह श्रद्धांजलि सभा केवल एक औपचारिकता मात्र नहीं रही, बल्कि यह एक संकल्प सभा में तब्दील हो गई। सभा के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों और नागरिकों ने दो मिनट का मौन रखकर महान चिंतक को श्रद्धांजलि दी और उनके बताए गए रास्तों पर पूरी निष्ठा के साथ चलने का संकल्प लिया। मुजफ्फरपुर में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वैचारिक राजनीति और जनसंघर्ष की जमीन पर शिवदास घोष के विचार आज भी प्रासंगिक और जीवंत हैं।