पूर्णिया के भट्ठा बाजार में शाम ढलते ही चरमरा जाती है यातायात व्यवस्था: बेतरतीब पार्किंग और सड़क किनारे अतिक्रमण से रोज लग रहा भीषण जाम, खरीदारी करने आने वाले लोग और राहगीर हो रहे हैं बेहाल
बिहार के पूर्णिया जिले के सबसे व्यस्त, प्रमुख और प्रतिष्ठित व्यावसायिक केंद्र कहे जाने वाले भट्ठा बाजार में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी है। यहाँ स्थिति यह हो गई है कि जैसे ही शाम ढलती है और सूरज अस्त होता है, वैसे ही पूरे बाजार में भयंकर जाम की समस्या एक गंभीर नासूर बन जाती है। शाम के समय खरीदारी करने के लिए दूर-दूर से आने वाले आम नागरिकों, महिलाओं, बुजुर्गों और वाहन चालकों को इस भीषण जाम के कारण भारी परेशानियों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और नियमित खरीदारों का कहना है कि सड़क के दोनों किनारों पर अनियंत्रित अतिक्रमण और वाहनों की बेतरतीब (अव्यवस्थित) पार्किंग के कारण यह समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल रूप धारण करती जा रही है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है भट्ठा बाजार की जमीनी हकीकत? शाम होते ही क्यों लगता है महाजाम?
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, पूर्णिया का भट्ठा बाजार उत्तर बिहार के प्रमुख बाजारों में गिना जाता है, जहाँ कपड़ों, आभूषणों, इलेक्ट्रॉनिक सामानों, किराना और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की दुकानें भारी संख्या में मौजूद हैं। सुबह के समय तो स्थिति फिर भी सामान्य रहती है, लेकिन जैसे ही दोपहर ढलती है और शाम का वक्त शुरू होता है, बाजारों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगती है।
इसी भीड़ और व्यस्तता के बीच सड़कों पर फैला अतिक्रमण और गलत तरीके से खड़े किए जाने वाले वाहन आग में घी का काम करते हैं। स्थिति इतनी दयनीय हो जाती है कि चार पहिया वाहन तो दूर, दो पहिया वाहनों और पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए भी सड़क पर एक कदम आगे बढ़ाना दूभर हो जाता है। लोग घंटों तक इस महाजाम में फंसे रहते हैं, जिससे उनका बहुमूल्य समय बर्बाद होता है और त्योहारों या सामान्य दिनों की खरीदारी का आनंद किरकिरा हो जाता है।
जाम के मुख्य कारण: सड़क किनारे अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग
स्थानीय निवासियों और व्यापारिक संगठनों से बातचीत करने पर यह स्पष्ट हुआ कि भट्ठा बाजार में शाम के समय लगने वाले इस भीषण जाम के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण जिम्मेदार हैं:
सड़क किनारे अवैध अतिक्रमण (Encroachment):
भट्ठा बाजार में कई दुकानदारों और फुटपाथ के दुकानदारों (ठेला-खोमचा वालों) द्वारा अपनी दुकानों का सामान और ठेले सड़क की सीमा से बाहर तक फैला दिए जाते हैं। कई जगहों पर पक्की दुकानों के आगे सीढ़ियां या काउंटर निकालकर सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लिया गया है, जिससे सड़क की चौड़ाई अपने आप आधी से भी कम रह जाती है।
अव्यवस्थित और बेतरतीब पार्किंग (Disorganized Parking):
बाजार में आने वाले लोग अपने दो पहिया और चार पहिया वाहनों को बिना किसी अनुशासन के सड़क के बीचों-बीच या दुकानों के ठीक आगे आड़े-तिरछे खड़ा कर देते हैं। यहाँ तक कि कई बार ग्राहक सड़क पर ही गाड़ी पार्क करके खरीदारी करने चले जाते हैं, जिससे पीछे आने वाले वाहनों का काफिला पूरी तरह रुक जाता है और लंबा ट्रैफिक जैम लग जाता है।
खरीदारी करने आए लोगों और महिलाओं का छलका दर्द
भट्ठा बाजार में खरीदारी करने पहुँची महिलाओं और परिवारों का कहना है कि शाम के वक्त यहाँ आना किसी जंग जीतने जैसा हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ बाजार पहुँचना तो और भी जोखिम भरा साबित होता है।
समय की बर्बादी: जो दूरी तय करने में महज पांच मिनट का समय लगना चाहिए, वह जाम के कारण आधे से एक घंटे में भी पूरी नहीं हो पाती।
वाहन चालकों की खीझ: ऑटो चालकों, ई-रिक्शा चालकों और निजी वाहन चालकों के बीच जगह पाने की होड़ में स्थिति और अधिक उलझ जाती है, जिससे कई बार आपस में नोकझोंक और विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।
प्रदूषण और घुटन: गाड़ियों के हॉर्न की कर्कश आवाज और धुएं के कारण आसपास के लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
स्थानीय दुकानदारों की भी चिंता, व्यापार पर पड़ रहा है बुरा असर
दिलचस्प बात यह है कि इस जाम से केवल ग्राहक ही परेशान नहीं हैं, बल्कि भट्ठा बाजार के स्थायी दुकानदार भी इससे खासे चिंतित हैं। दुकानदारों का कहना है कि इस भयंकर जाम और अव्यवस्था के कारण अब धीरे-धीरे ग्राहकों ने शाम के वक्त बाजार आना कम कर दिया है, जिसका सीधा असर उनके दैनिक कारोबार और बिक्री पर पड़ रहा है। दुकानदारों का मानना है कि यदि प्रशासन द्वारा समय रहते इस पर नकेल नहीं कसी गई, तो बाजार का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई और ठोस उपायों की पुरजोर मांग
भट्ठा बाजार की इस गंभीर समस्या से त्रस्त होकर स्थानीय नागरिकों, बुद्धिजीवियों और व्यापारियों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से निम्नलिखित ठोस कदम उठाने की जोरदार मांग की है:
एंटी-इन्क्रोचमेंट ड्राइव (अतिक्रमण हटाओ अभियान): नगर निगम की टीम द्वारा नियमित रूप से भट्ठा बाजार क्षेत्र में अभियान चलाकर सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को बुलडोजर या जब्ती की कार्रवाई के जरिए हटाया जाए।
नो-एंट्री और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती: शाम के व्यस्त समय में बाजार के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड के जवानों की स्थायी रूप से तैनाती की जाए, जो चार पहिया वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित कर सकें।
वैध पार्किंग जोन का निर्धारण: बाजार के आसपास किसी सुरक्षित जगह पर वाहन पार्किंग की उचित व्यवस्था की जाए और सड़क पर गाड़ियां पार्क करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
पूर्णिया के भट्ठा बाजार के लोग अब प्रशासन से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस और सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं ताकि इस ऐतिहासिक बाजार की रौनक बरकरार रह सके और आम जनता को जाम के इस नासूर से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।