धमदाहा में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर संकट के बादल: केवाईसी (KYC) और दस्तावेजों की अनिवार्यता से सैकड़ों उपभोक्ताओं की गैस आपूर्ति पर लग सकता है ग्रहण

पूर्णिया/धमदाहा: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) ने देश और बिहार के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के जीवन को धुएं से मुक्त करने में एक क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल क्षेत्र में भी हजारों गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए थे। लेकिन वर्तमान समय में प्रशासनिक और तकनीकी सख्ती के कारण धमदाहा के सैकड़ों उज्ज्वला उपभोक्ताओं की गैस आपूर्ति पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। यदि समय रहते उपभोक्ताओं ने अपनी औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया, तो उन्हें मिलने वाली गैस सब्सिडी और रिफिल आपूर्ति बाधित हो सकती है।

उज्ज्वला योजना पर संकट का मुख्य कारण: केवाईसी और आधार प्रमाणीकरण

तेल विपणन कंपनियों (OMCs - IOC, BPCL, HPCL) और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अपने गैस कनेक्शन का ई-केवाईसी (e-KYC) और बायोमेट्रिक सत्यापन करवाना अनिवार्य कर दिया गया है।

धमदाहा क्षेत्र के विभिन्न गैस वितरकों (Gas Agencies) और ग्रामीण वितरक केंद्रों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, अभी भी एक बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्होंने अपनी अनिवार्य ई-केवाईसी या बैंक खातों की सीडिंग (Aadhaar Seeding) का कार्य पूरा नहीं किया है। प्रशासनिक स्तर पर बार-बार चेतावनी और समय-सीमा दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कई उपभोक्ता तकनीकी जानकारी के अभाव या अन्य कारणों से औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे उपभोक्ता और बढ़ती समस्याएं

धमदाहा बाजार और आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्थित गैस एजेंसियों के कार्यालयों में इन दिनों उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।

तकनीकी बाधाएं और सर्वर की समस्या: कई उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे गैस एजेंसी या जन सेवा केंद्र (CSC) पहुंचते हैं, तो सर्वर डाउन होने या फिंगरप्रिंट मैच न होने के कारण उनका ई-केवाईसी पूरा नहीं हो पाता।

जागरूकता की कमी: ग्रामीण अंचल की कई महिला लाभार्थियों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि केवाईसी न कराने पर उनकी सब्सिडी या नया सिलेंडर मिलना बंद हो सकता है।

दस्तावेजों में त्रुटियां: आधार कार्ड, राशन कार्ड और बैंक पासबुक में नाम या पते की स्पेलिंग में अंतर होने के कारण भी सत्यापन प्रक्रिया में भारी रुकावटें आ रही हैं।

गैस आपूर्ति रुकने से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी मुश्किलें

यदि समय सीमा के भीतर इन उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी पूरा नहीं होता है, तो कंपनियों के सॉफ्टवेयर द्वारा उनके कनेक्शन को अस्थायी रूप से ब्लॉक या डी-एक्टिवेट किया जा सकता है। इसका सीधा असर यह होगा कि:

उपभोक्ताओं को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी (Direct Benefit Transfer - DBT) का पैसा उनके खातों में आना बंद हो जाएगा।

उन्हें रियायती दरों या निर्धारित प्रक्रिया के तहत मिलने वाला अगला गैस सिलेंडर मिलने में भारी कठिनाई होगी।

गरीब परिवारों को एक बार फिर से चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी और उपलों (कठोर पारंपरिक ईंधनों) की तरफ लौटना पड़ सकता है, जिससे उज्ज्वला योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होगा।

प्रशासन और गैस एजेंसियों की अपील

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए धमदाहा क्षेत्र के गैस वितरकों ने सभी उपभोक्ताओं से त्वरित अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए तुरंत अपनी नजदीकी गैस एजेंसी या अधिकृत जन सेवा केंद्र से संपर्क करें।

वितरकों ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और उज्ज्वला योजना का पासबुक लेकर केंद्र पर पहुंचे और बिना किसी देरी के अपना बायोमेट्रिक ई-केवाईसी पूरा करवाएं। प्रशासन ने भी स्थानीय स्तर पर मुनादी और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी गरीब परिवार इस महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।