मुजफ्फरपुर में ट्रेड यूनियन आंदोलन का 'सूरज' अस्त! SUCI के फायरब्रांड नेता कॉमरेड मोहम्मद इदरीश का कैंसर से निधन, नम आंखों से मजदूरों ने कहा 'लाल सलाम'!
मुजफ्फरपुर के लाल झंडा आंदोलन, मजदूर सियासत और वामपंथी गलियारे से एक बेहद भावुक और आंखें नम कर देने वाली खबर सामने आई है। SUCI (कम्युनिस्ट) के वरिष्ठ नेता, मजदूरों के मसीहा और शोषितों की बुलंद आवाज कॉमरेड मोहम्मद इदरीश अब हमारे बीच नहीं रहे।
वे लंबे समय से गले के कैंसर (Throat Cancer) जैसी जानलेवा बीमारी से बहादुरी से जंग लड़ रहे थे। मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान इस योद्धा ने अपनी अंतिम सांस ली। कॉमरेड इदरीश के जाने की खबर मिलते ही पूरी उत्तर बिहार की मजदूर यूनियनों, कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। हर किसी की जुबान पर बस एक ही नारा है—"जब तक सूरज चांद रहेगा, कॉमरेड इदरीश आपका नाम रहेगा!"
सर्वहारा के सच्चे सिपाही: रिक्शाचालकों से लेकर मिल-मजदूरों के लिए लड़ी लड़ाई
कॉमरेड मोहम्मद इदरीश कोई ड्राइंग-रूम वाले नेता नहीं थे; वे जमीन पर उतरकर हक की लड़ाई लड़ने वाले जमीनी 'फायरब्रांड' एक्टिविस्ट थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शोषित वर्ग (Working Class) के अधिकारों को सुरक्षित करने में झोंक दी थी।
मजदूरों के 'वकील': मुजफ्फरपुर के रिक्शा चालकों, ठेला खींचने वालों, कपड़ा मिल के मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के हक के लिए वे हमेशा ढाल बनकर खड़े रहे। पूंजीपतियों और प्रशासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ उन्होंने कभी समझौता नहीं किया।
लाठियां खाईं, जेल गए पर झुके नहीं : आंदोलनों के दौरान पुलिस की लाठियां खाना और जेल की सलाखों के पीछे जाना उनके लिए आम बात थी। लाल झंडे को थामे हुए उन्होंने आखिरी सांस तक व्यवस्था के खिलाफ इंकलाबी बिगुल फूंके रखा।
सादगी की जिंदा मिसाल: इतने वरिष्ठ पद पर होने के बावजूद कॉमरेड इदरीश की सादगी ऐसी थी कि वे अक्सर साइकिल से या पैदल ही मजदूरों की बस्तियों में पहुंच जाते थे। उनके पास कोई धन-दौलत नहीं थी, उनकी असली पूंजी गरीबों का प्यार था।
कैंसर की मार भी नहीं डिगा सकी हौसला
गले का कैंसर जैसी दर्दनाक बीमारी भी इस कम्युनिस्ट सिपाही के हौसले को डिगा नहीं सकी। जब तक शरीर ने साथ दिया, वे जनता के मुद्दों पर मुखर रहे। हाल ही में तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद कैंसर की आखिरी स्टेज के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका और एक महान संघर्षशील अध्याय का अंत हो गया।
अंतिम विदाई: 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों से गूंज उठा आसमान
जैसे ही कॉमरेड इदरीश का पार्थिव शरीर अस्पताल से बाहर लाया गया, वहां मौजूद हजारों कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और रोते-बिलखते मजदूरों ने उन्हें घेर लिया। पार्टी सहयोगियों ने उनके पार्थिव शरीर को लाल झंडे में लपेटा।
पार्टी और नेताओं की भावभीनी प्रतिक्रियाएं:
SUCI जिला कमेटी: "हमने अपना सबसे समर्पित सिपाही खो दिया है। कॉमरेड इदरीश की वैचारिक दृढ़ता और ईमानदारी हमारे लिए हमेशा एक मशाल की तरह काम करेगी।"
मजदूर संगठन: "आज हमारा भाई, हमारा नेता और हमारी हर मुसीबत का साथी चला गया। अब हमारे हक के लिए आधी रात को कौन लड़ेगा?"
उनके अंतिम संस्कार में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सीपीआई, सीपीएम, भाकपा-माले और राजद समेत कई राजनीतिक दलों के नेताओं और शहर के वरिष्ठ समाजसेवियों ने शिरकत की और नम आंखों से इस जननेता को अंतिम विदाई दी।
कॉमरेड मोहम्मद इदरीश का जाना सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि मुजफ्फरपुर के मजदूर आंदोलन के एक स्वर्णिम युग का अंत है। आज के दौर में जहां राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है, वहां इदरीश जी जैसी निस्वार्थ सेवा और ईमानदारी की मिसाल मिलना नामुमकिन है। उनके संघर्षों और इंकलाबी जज्बे को हमारा शत-शत नमन। कॉमरेड मोहम्मद इदरीश को आखिरी 'लाल सलाम'!