करंट की चपेट में गिरी गीता देवी, चचेरी सास चंद्रकला देवी की सूझबूझ से टली बड़ी घटना; 10 महिलाएं गई थीं घास लेने

सहरसा। जिले के पतरघट प्रखंड क्षेत्र की धबौली पूर्वी पंचायत में शनिवार सुबह घास लेने गई महिलाओं के समूह के साथ हुए हादसे में 40 वर्षीय गीता देवी की करंट लगने से मौत हो गई। इस दौरान उनकी चचेरी सास चंद्रकला देवी की सूझबूझ और तत्परता से एक बड़ी घटना होने से टल गई। हादसे के समय गीता देवी समेत करीब 10 महिलाएं घास लेने के लिए खेत की ओर गई थीं।

बताया जा रहा है कि खेत के आसपास बिजली का करंट प्रवाहित हो रहा था। घास काटने के दौरान गीता देवी अचानक करंट की चपेट में आ गईं और गिर पड़ीं। स्थिति को देखते हुए चंद्रकला देवी ने तत्काल समझदारी दिखाई और अन्य महिलाओं को घटनास्थल से दूर रहने के लिए सचेत किया। उनकी तत्परता के कारण बाकी महिलाओं को करंट की चपेट में आने से बचाया जा सका।

घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। वहीं, ग्रामीणों ने खेतों में इस तरह बिजली का करंट छोड़े जाने को गंभीर और खतरनाक बताया है। लोगों ने मामले की जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

10 महिलाएं घास लेने गई थीं

जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह धबौली पूर्वी पंचायत की करीब 10 महिलाएं मवेशियों के लिए घास लेने खेत की ओर गई थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले परिवारों के लिए घास और चारा जुटाना रोजमर्रा की जरूरत है।

महिलाएं समूह में खेत की ओर गई थीं और सामान्य तरीके से घास काटने का काम कर रही थीं। किसी को अंदाजा नहीं था कि खेत के आसपास बिजली का करंट प्रवाहित हो रहा है।

इसी दौरान गीता देवी करंट की चपेट में आ गईं।

अचानक करंट की चपेट में आईं गीता देवी

बताया जा रहा है कि घास काटने के दौरान गीता देवी अचानक बिजली के करंट की चपेट में आ गईं। करंट लगते ही वह जमीन पर गिर गईं।

हादसे को देखकर आसपास मौजूद महिलाओं में अफरातफरी मच गई। कुछ महिलाएं उनकी मदद के लिए आगे बढ़ने लगीं, लेकिन चंद्रकला देवी ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत समझ लिया।

उन्होंने अन्य महिलाओं को तत्काल पीछे हटने और गीता देवी के पास सीधे नहीं जाने की चेतावनी दी। इससे अन्य महिलाएं भी करंट की चपेट में आने से बच गईं।

चंद्रकला देवी ने दिखाई सूझबूझ

घटना के दौरान चंद्रकला देवी की सूझबूझ बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। करंट की चपेट में आने के बाद किसी व्यक्ति को तुरंत छूना भी खतरनाक हो सकता है, यदि बिजली का प्रवाह जारी हो।

चंद्रकला देवी ने बिना घबराए पहले स्थिति को समझने की कोशिश की और अन्य महिलाओं को घटनास्थल से दूर रहने को कहा।

उनकी इस सतर्कता से एक साथ कई महिलाओं के करंट की चपेट में आने की आशंका टल गई।

ग्रामीणों के अनुसार, यदि सभी महिलाएं घबराकर गीता देवी को बचाने के लिए एक साथ आगे बढ़ जातीं तो हादसा और बड़ा हो सकता था।

हादसे के बाद मची अफरातफरी

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घटनास्थल की ओर पहुंचे। गीता देवी के करंट की चपेट में आने की खबर उनके परिवार तक पहुंचाई गई।

हादसे के बाद गांव में अफरातफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।

परिजनों को घटना की जानकारी मिलने के बाद घर में मातम छा गया। अचानक हुई मौत से परिवार के सदस्य सदमे में हैं।

ग्रामीणों ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

घटना के बाद ग्रामीणों ने खेतों में बिजली का करंट छोड़े जाने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में बड़ी संख्या में लोग और मवेशी आते-जाते हैं। यदि किसी खेत में करंट प्रवाहित किया जाता है तो इसकी जानकारी आसपास के लोगों को नहीं होती।

ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

लोगों ने मांग की है कि घटना की जांच कर यह पता लगाया जाए कि खेत में करंट कैसे और क्यों प्रवाहित किया गया था।

करंट के कारण बढ़ जाता है खतरा

खुले खेत में बिजली का करंट छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अक्सर बिना किसी निर्धारित रास्ते के खेतों से होकर गुजरते हैं।

मवेशी भी खेतों के आसपास घूमते हैं। ऐसे में जमीन या तार में प्रवाहित बिजली की जानकारी न होने पर इंसान और पशु दोनों इसकी चपेट में आ सकते हैं।

गीता देवी की मौत इस खतरे का गंभीर उदाहरण है।

महिलाओं ने नहीं खोया धैर्य

हादसे के समय करीब 10 महिलाएं मौके पर मौजूद थीं। अचानक हुई घटना से सभी घबरा गईं, लेकिन चंद्रकला देवी की समझदारी के कारण बाकी महिलाओं ने जल्दबाजी में गीता देवी को छूने की कोशिश नहीं की।

ऐसी परिस्थितियों में सबसे पहले बिजली के स्रोत को बंद करना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी होता है।

चंद्रकला देवी ने इसी तरह सावधानी बरतते हुए अन्य महिलाओं को पीछे रहने के लिए कहा।

परिवार में पसरा मातम

गीता देवी की मौत के बाद उनके परिवार में मातम छा गया है। परिजनों के लिए यह घटना बेहद दुखद है।

ग्रामीणों के अनुसार गीता देवी सामान्य रूप से अन्य महिलाओं के साथ घास लेने गई थीं। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद इतनी बड़ी त्रासदी हो जाएगी।

उनकी मौत की खबर से गांव के लोग भी दुखी हैं।

जांच की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से घटना की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि खेत में बिजली का करंट किस परिस्थिति में पहुंचा।

यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर खेत में करंट छोड़ा था तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए खेतों और ग्रामीण रास्तों के आसपास बिजली सुरक्षा की निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।

बिजली विभाग को भी सतर्क रहने की जरूरत

घटना के बाद बिजली विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तारों और कनेक्शनों की समय-समय पर जांच जरूरी है।

यदि कहीं अवैध कनेक्शन या खतरनाक तरीके से बिजली का इस्तेमाल हो रहा है तो उसे तत्काल हटाने की जरूरत है।

ग्रामीणों को भी बिजली से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक किया जाना आवश्यक है।

लोगों को बरतनी होगी सावधानी

ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में जाने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। यदि कहीं बिजली का तार जमीन के करीब दिखाई दे या खेत के आसपास तारों की असामान्य व्यवस्था नजर आए तो वहां जाने से बचना चाहिए।

किसी व्यक्ति के करंट की चपेट में आने पर उसे सीधे हाथ से छूना भी खतरनाक हो सकता है। पहले बिजली का स्रोत बंद करना और सुरक्षित तरीके से मदद पहुंचाना जरूरी है।

एक महिला की मौत, कई जिंदगियां बचीं

इस घटना में गीता देवी की जान चली गई, लेकिन चंद्रकला देवी की सूझबूझ के कारण बाकी महिलाओं को बचाया जा सका।

करीब 10 महिलाओं का समूह एक साथ खेत में मौजूद था। यदि करंट की स्थिति को समझे बिना सभी महिलाएं गीता देवी को बचाने के लिए आगे बढ़ जातीं, तो हादसा और गंभीर हो सकता था।

चंद्रकला देवी की तत्परता ने संभावित रूप से कई जिंदगियों को खतरे में पड़ने से बचाया।

सहरसा के पतरघट क्षेत्र की धबौली पूर्वी पंचायत में शनिवार को करंट लगने से गीता देवी की मौत की घटना ने ग्रामीण इलाकों में बिजली सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार गीता देवी समेत करीब 10 महिलाएं घास लेने खेत गई थीं। इसी दौरान गीता देवी करंट की चपेट में आकर गिर गईं। हादसे के समय उनकी चचेरी सास चंद्रकला देवी ने सूझबूझ दिखाते हुए अन्य महिलाओं को तत्काल पीछे रहने के लिए कहा, जिससे बड़ी घटना होने से टल गई।

घटना के बाद ग्रामीणों ने खेत में करंट प्रवाहित किए जाने की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि खुले खेतों में असुरक्षित तरीके से बिजली का इस्तेमाल इंसानों और पशुओं दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। प्रशासन और बिजली विभाग को ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ाने के साथ ग्रामीणों को बिजली सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की दिशा में भी कदम उठाने की जरूरत है।