खेत में छोड़े गए बिजली के करंट की चपेट में आने से 40 वर्षीय महिला की मौत, मवेशियों के लिए चारा लेकर लौट रही थी
सहरसा। जिले के पतरघट प्रखंड क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। धबौली पूर्वी पंचायत में शनिवार सुबह खेत में छोड़े गए बिजली के करंट की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान 40 वर्षीय गीता देवी के रूप में हुई है। घटना उस समय हुई जब गीता देवी एक अन्य महिला के साथ मवेशियों के लिए चारा लेकर घर लौट रही थीं।
बताया जा रहा है कि खेत में बिजली का करंट छोड़ा गया था। इसी दौरान रास्ते से गुजरते समय गीता देवी करंट की चपेट में आ गईं। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घटना की जानकारी परिजनों और ग्रामीणों को दी।
घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने खेतों के आसपास इस तरह से बिजली का करंट छोड़े जाने को बेहद खतरनाक बताया है और मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
चारा लेकर घर लौट रही थीं गीता देवी
जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह गीता देवी मवेशियों के लिए चारा लेने गई थीं। उनके साथ एक अन्य महिला भी थी। दोनों महिलाएं खेत की ओर से चारा लेकर वापस लौट रही थीं।
इसी दौरान खेत के आसपास बिजली का तार या करंट प्रवाहित किए जाने की वजह से रास्ते में खतरा पैदा हो गया था। गीता देवी अनजाने में उस स्थान के संपर्क में आ गईं और करंट की चपेट में आ गईं।
हादसा इतना गंभीर था कि महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
दूसरी महिला के साथ होने के कारण घटना की जानकारी जल्द ही आसपास के लोगों तक पहुंची। ग्रामीण मौके पर पहुंचे और परिवार के सदस्यों को घटना की सूचना दी।
खेत में करंट छोड़ने से हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार खेत में करंट छोड़े जाने की वजह से यह हादसा हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और फसलों को जानवरों से बचाने के लिए कभी-कभी अवैध तरीके से बिजली का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं।
ऐसा करना बेहद खतरनाक है, क्योंकि खेत के आसपास से गुजरने वाले लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि जमीन या तार में करंट प्रवाहित हो रहा है।
गीता देवी के मामले में भी यही स्थिति बताई जा रही है। वह सामान्य रूप से चारा लेकर घर लौट रही थीं, लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि खेत में करंट छोड़ा गया है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
गीता देवी की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया। अचानक हुई मौत से परिजन सदमे में हैं।
परिजनों के लिए सबसे दुखद बात यह रही कि गीता देवी रोजमर्रा के काम के लिए घर से निकली थीं और कुछ समय बाद उनकी मौत की खबर सामने आई।
घटना के बाद परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण भी बड़ी संख्या में परिवार के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी।
गांव में पसरा मातम
घटना के बाद धबौली पूर्वी पंचायत में मातम का माहौल है। गीता देवी की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण घटनास्थल और उनके घर के आसपास जुटने लगे।
ग्रामीणों ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि खेत में खुले तौर पर करंट छोड़ना किसी की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में आने-जाने वाले लोगों, किसानों और मवेशियों को ऐसे बिजली के करंट का पता नहीं चल पाता। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने खेत में करंट छोड़े जाने की जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में इस तरह नहीं किया जाना चाहिए जिससे दूसरे लोगों की जान खतरे में पड़े।
यदि खेत के चारों ओर करंट प्रवाहित किया गया था, तो यह भी जांच का विषय है कि बिजली कहां से ली गई और किस तरीके से खेत में करंट पहुंचाया गया।
अवैध तरीके से करंट छोड़ना जानलेवा
किसी खेत या खुले स्थान में बिना सुरक्षा व्यवस्था के बिजली का करंट छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है।
ऐसे मामलों में केवल इंसान ही नहीं बल्कि पशु भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
ग्रामीण इलाकों में खेतों के आसपास बड़ी संख्या में लोग और मवेशी आवाजाही करते हैं। यदि बिजली का करंट खुले क्षेत्र में प्रवाहित हो तो किसी भी व्यक्ति को इसकी जानकारी नहीं होती।
गीता देवी की मौत ने एक बार फिर इस तरह की लापरवाही से होने वाले खतरे को सामने ला दिया है।
प्रशासन से जांच की उम्मीद
घटना के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस मामले की जांच करेगी।
जांच के दौरान यह पता लगाने की आवश्यकता होगी कि खेत में करंट किसने छोड़ा था, बिजली की व्यवस्था किस तरह की गई थी और क्या इसके लिए किसी विद्युत तार या अन्य साधन का इस्तेमाल किया गया था।
जिम्मेदारी तय होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
बिजली विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बिजली विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
यदि कहीं अवैध तरीके से बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है तो इसकी पहचान कर कार्रवाई करने की जरूरत है।
ग्रामीण क्षेत्रों में खुले तार, अवैध कनेक्शन और बिजली के गलत इस्तेमाल की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
इसलिए समय-समय पर जांच अभियान चलाकर ऐसे जोखिम वाले स्थानों की पहचान की जा सकती है।
ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत
घटना के बाद ग्रामीणों को भी खेतों और खुले क्षेत्रों में जाते समय सावधानी बरतने की जरूरत है।
यदि किसी स्थान पर बिजली का तार जमीन के पास दिखाई दे या किसी खेत के आसपास असामान्य तरीके से तार बिछे हों, तो वहां जाने से बचना चाहिए।
ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना देना सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
मवेशियों के लिए चारा लेने गई थी महिला
गीता देवी की मौत की घटना इसलिए भी दुखद है क्योंकि वह किसी असामान्य गतिविधि के लिए नहीं बल्कि अपने मवेशियों के लिए चारा लेकर घर लौट रही थीं।
ग्रामीण परिवारों में महिलाएं अक्सर पशुओं के लिए चारा लाने और अन्य घरेलू कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
रोजमर्रा के इसी काम के दौरान उनकी जान चली गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना ने खेतों और ग्रामीण रास्तों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
खेतों में बिजली का करंट छोड़े जाने की स्थिति में वहां से गुजरने वाले लोगों को कोई चेतावनी नहीं मिलती। यदि किसी स्थान पर ऐसा खतरा मौजूद है तो लोगों को इसकी जानकारी देना आवश्यक है।
प्रशासन को भी ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों की शिकायतों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
एक हादसा, कई सवाल
गीता देवी की मौत केवल एक परिवार के लिए त्रासदी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि खेतों में इस तरह बिजली का इस्तेमाल आखिर क्यों किया जा रहा है।
यदि फसलों को जानवरों से बचाने के लिए ऐसा किया गया था, तो इसके लिए सुरक्षित और कानूनी विकल्प अपनाए जाने चाहिए।
किसी भी स्थिति में ऐसा तरीका नहीं अपनाया जाना चाहिए जिससे खेत से गुजरने वाले इंसान या पशु की जान को खतरा हो।
सहरसा के पतरघट प्रखंड की धबौली पूर्वी पंचायत में शनिवार सुबह खेत में छोड़े गए बिजली के करंट की चपेट में आने से 40 वर्षीय गीता देवी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह एक अन्य महिला के साथ मवेशियों के लिए चारा लेकर घर लौट रही थीं।
इसी दौरान वह खेत में प्रवाहित करंट की चपेट में आ गईं और उनकी जान चली गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और ग्रामीणों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में खुले स्थानों पर अवैध या असुरक्षित तरीके से बिजली का इस्तेमाल किए जाने के खतरे को फिर सामने ला दिया है। खेतों में करंट छोड़ना न केवल इंसानों बल्कि पशुओं के लिए भी जानलेवा हो सकता है।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक जांच पर है। यदि जांच में खेत में जानबूझकर करंट छोड़े जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की जा रही है। साथ ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।