मनरेगा का नया स्वरूप 'वीबी-जी राम जी' योजना — बिहार में ग्रामीण रोजगार की नई गारंटी और वित्तीय संरचना

1 जुलाई 2026 से बिहार में ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर अब 'विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी 'वीबी-जी राम जी' (VB-G RAM G) को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस योजना को राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक "गेम चेंजर" करार दिया है।

'वीबी-जी राम जी' योजना: एक नज़र में

यह योजना 'विकसित भारत @2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य न केवल रोजगार देना है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी बुनियादी ढांचे का निर्माण करना और आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है।

रोजगार के दिनों में वृद्धि: पहले मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों के रोजगार को बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया गया है।

दैनिक मजदूरी में बढ़ोतरी: श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के उद्देश्य से दैनिक मजदूरी को 255 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है।

मिशन का लक्ष्य: इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, कृषि कार्यों में सहयोग करना और ग्रामीण युवाओं के पलायन को प्रभावी ढंग से रोकना है।

वित्तीय ढांचा और राज्य का योगदान

योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए एक बड़ी वित्तीय राशि आवंटित की गई है। मंत्री श्रवण कुमार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:

केंद्र सरकार का अंतरिम बजट: इस योजना के संचालन के लिए केंद्र सरकार की ओर से 6,715 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

राज्य सरकार का हिस्सा: मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब इस योजना के लिए 4,477 करोड़ रुपये (लगभग 4500 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम योगदान देगी। यह राशि राज्य के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बिहार सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कार्यान्वयन में समयबद्धता और विशेष छूट

योजना को लागू करते समय कृषि कार्यों की व्यस्तता का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

कृषि कार्यों को प्राथमिकता: राज्य के 6 प्रमुख जिलों—जमुई, लखीसराय, मुंगेर, शेखपुरा, भागलपुर और बांका—में धान की खेती का कार्य जोरों पर है।

कार्य पर अस्थायी विराम: इन जिलों में किसानों और मजदूरों को खेती के कार्यों में दिक्कत न हो, इसके लिए 20 जुलाई तक इस योजना के तहत काम करने पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।

पुनर्निर्धारण: इन जिलों में कृषि कार्य संपन्न होने के बाद, 21 जुलाई से पुनः पूरी क्षमता के साथ काम शुरू कर दिया जाएगा।

योजना की प्रमुख विशेषताएं (तकनीकी और सामाजिक पक्ष)

'वीबी-जी राम जी' योजना को पारंपरिक मनरेगा से अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाया गया है:

तकनीक आधारित निगरानी: प्रत्येक कार्य की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।

सोशल ऑडिट: कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर सोशल ऑडिट की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

टिकाऊ परिसंपत्ति निर्माण: केवल गड्ढे खोदने तक सीमित न रहकर, यह योजना पक्के रास्ते, जल संरक्षण के ढांचे और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर जोर देगी।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

इस योजना के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है:

स्थानीय रोजगार: गाँव के लोगों को गाँव में ही 125 दिन काम मिलने से पलायन की दर में कमी आएगी।

आर्थिक सशक्तीकरण: मजदूरी में वृद्धि से ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे स्थानीय बाजार भी गतिमान होंगे।

आत्मनिर्भर गाँव: यह मिशन गाँवों को बुनियादी ढांचे में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

बिहार सरकार द्वारा 'वीबी-जी राम जी' योजना में लगभग 4500 करोड़ रुपये का योगदान यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखती है। यदि योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से हुआ, तो यह न केवल बिहार के ग्रामीण परिदृश्य को बदलेगा, बल्कि राज्य को 'विकसित भारत' की दौड़ में भी आगे ले जाएगा।