अकीदत और उत्साह के साथ मनाया गया हजरत शाह हसन पीर बासफा (रह.) का 87वां सालाना उर्स-ए-पाक; नगर आयुक्त ने किया उद्घाटन, मजार पर चादरपोशी कर मांगी देश में अमन-चैन की दुआ

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर में गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करने वाला हजरत शाह हसन पीर बासफा (रह.) का 87वां सालाना उर्स-ए-पाक पूरे हर्षोल्लास, अकीदत और रूहानी माहौल के बीच धूमधाम से संपन्न हुआ। दो दिवसीय इस वार्षिक उर्स समारोह के दौरान भागलपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे हजारों अकीदतमंदों (श्रद्धालुओं) ने हजरत की दरगाह पर पहुंचकर हाजिरी दी और जियारत की। उर्स के पहले दिन नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में विधिवत रूप से इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का उद्घाटन किया गया। चादरपोशी के साथ शुरू हुए इस उर्स में दिनभर दुआओं का दौर चला, जबकि रात के वक्त रूहानी कव्वाली के कार्यक्रमों ने महफिल में चार चांद लगा दिए।

दरगाह परिसर में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, चादरपोशी और मन्नतें

उर्स-ए-पाक के अवसर पर हजरत शाह हसन पीर बासफा (रह.) की दरगाह को बेहद खूबसूरत ढंग से दुल्हन की तरह सजाया गया था:

सुबह से जुटने लगे थे लोग: उर्स के पहले दिन से ही दरगाह परिसर में श्रद्धालुओं के आने का तांता लग गया था। सुबह होते ही कुरआन ख्वानी और फातिहाख्वानी का सिलसिला शुरू हो गया। हर वर्ग, उम्र और धर्म के लोगों ने मजार पर पहुंचकर अकीदत के फूल और चादरें पेश कीं।

अमन-चैन और भाईचारे की दुआ: देश-विदेश से आए जायरीन ने मजार पर सिर झुकाकर अपने परिवार की सलामती के साथ-साथ देश में शांति, भाईचारे और आपसी सौहार्द (अमन-चैन) की विशेष दुआएं मांगी। मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई मन्नतें जरूर पूरी होती हैं, जिसके चलते भक्तों में भारी उत्साह देखा गया।

नगर आयुक्त ने किया भव्य उर्स का उद्घाटन

इस 87वें सालाना उर्स-ए-पाक के औपचारिक उद्घाटन समारोह में प्रशासनिक और स्थानीय गणमान्य लोग विशेष रूप से उपस्थित रहे:

फीता काटकर और चादर चढ़ाकर किया शुभारंभ: भागलपुर के नगर आयुक्त ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए इस पावन उर्स का विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने मजार-ए-मुबारक़ पर चादरपोशी की और राज्य व शहर की खुशहाली की कामना की।

प्रशासनिक सहयोग की सराहना: उर्स कमेटी और आयोजकों ने इस दौरान जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। नगर आयुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे संतों की दरगाहें समाज को जोड़ने का काम करती हैं और भागलपुर की साझी संस्कृति की पहचान को मजबूत करती हैं।

रूहानी कव्वाली की महफिल में झूमे श्रोता

उर्स के मुख्य आकर्षणों में से एक रात के वक्त आयोजित होने वाला कव्वाली का कार्यक्रम रहा, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया:

प्रसिद्ध कव्वालों की प्रस्तुतियां: उर्स की रात देश के जाने-माने कव्वाल कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। जैसे ही कव्वालों ने सूफियाना कलाम और हजरत की शान में मनकबत पेश करना शुरू किया, पूरा दरगाह परिसर 'या अली' और सूफी नारों से गूंज उठा।

देर रात तक जमा रहा मेला: कव्वाली की इस महफिल का आनंद लेने के लिए दूर-दराज से संगीत प्रेमी और अकीदतमंद पहुंचे थे। ठंडक भरी सुहानी रात में गूंजते सूफियाना सुरों ने उपस्थित सभी लोगों के दिलों को सुकून और रूहानी आनंद से भर दिया।

मेला जैसा माहौल और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

उर्स के मौके पर दरगाह के आसपास के इलाकों में एक बड़े मेले जैसा दृश्य देखने को मिला:

दुकानों और सजीं स्टॉल: जायरीन के लिए खान-पान, किताबें, तस्बीह, इत्र और बच्चों के खिलौनों की दर्जनों दुकानें सजी थीं। विशेषकर पारंपरिक पकवानों और चादर-फूल की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ रही।

सुरक्षा और प्रशासनिक मुस्तैदी: भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और उर्स कमेटी के स्वयंसेवक पूरी तरह मुस्तैद नजर आए। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष मार्ग निर्देश जारी किए गए थे, जिससे किसी भी श्रद्धालु को आवागमन में कोई असुविधा न हो।

हजरत शाह हसन पीर बासफा (रह.) का 87वां सालाना उर्स-ए-पाक एक बार फिर यह साबित कर गया कि भागलपुर की धरती मोहब्बत, भाईचारे और रूहानी सुकून का एक अनूठा संगम है। नगर आयुक्त के कर-कमलों से हुए उद्घाटन से लेकर चादरपोशी और रातभर चली कव्वाली की महफिल तक, इस आयोजन ने हर आने वाले के दिल पर एक गहरी छाप छोड़ी है। यह उर्स न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोने का सराहनीय संदेश भी दिया।