टेंडर घोटाले में SVU की जांच का दायरा बढ़ा, रिशुश्री से 30 घंटे की पूछताछ के बाद अब रडार पर बड़े अधिकारी

पटना। राज्य के बहुचर्चित टेंडर घोटाले की जांच कर रही स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने आरोपी ठेकेदार रिशुश्री से लंबी पूछताछ के बाद जांच की दिशा बदल दी है। करीब 30 घंटे की सघन पूछताछ के दौरान ठेकेदार द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर अब एसवीयू की टीम आईएएस अधिकारी संजीव हंस और मुमुक्षु चौधरी जैसे रसूखदार नामों पर अपना शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।

30 घंटे की गहन पूछताछ: एसवीयू ने रिमांड के दौरान आरोपी ठेकेदार रिशुश्री से लगातार 30 घंटों तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती असहयोग के बाद ठेकेदार ने कई वित्तीय लेन-देन और टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों की संलिप्तता के बारे में महत्वपूर्ण सुराग दिए हैं।

अधिकारियों पर शिकंजा: पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर एसवीयू अब विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषकर मुमुक्षु चौधरी और संजीव हंस की भूमिका की जांच कर रही है। एसवीयू यह पता लगाने में जुटी है कि इन अधिकारियों ने ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने के बदले क्या 'कमीशन' प्राप्त किया था।

डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य: जांच एजेंसी अब ठेकेदार के बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) और कंपनी के टेंडर संबंधी डिजिटल दस्तावेजों का मिलान कर रही है ताकि अधिकारियों के साथ उनकी मिलीभगत को कानूनी रूप से साबित किया जा सके।

पहलूस्थिति
पूछताछ की अवधि30 घंटे (रिमांड के दौरान)
मुख्य आरोपीरिशुश्री (ठेकेदार)
अगला कदमवरिष्ठ अधिकारियों (संजीव हंस, मुमुक्षु चौधरी) से पूछताछ या समन
मुख्य फोकसटेंडर आवंटन में धांधली और भ्रष्टाचार का नेक्सस (Nexus)

रिशुश्री का एसवीयू की गिरफ्त में होना और अधिकारियों के नाम सामने आना, इस घोटाले की सबसे बड़ी कड़ी साबित हो सकता है। यदि एसवीयू इन अधिकारियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटा लेती है, तो राज्य के प्रशासनिक गलियारों में यह एक बड़ी कार्रवाई होगी। फिलहाल, एसवीयू के अधिकारी इस मामले पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।