धमदाहा में 24 वर्षीय महिला की संदिग्ध मौत का मामला 15 दिन बाद भी अधर में; न्याय की आस लगाए बैठा पीड़ित परिवार
बिहार के पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल अंतर्गत नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर 19 में हुई 24 वर्षीय एक महिला की संदिग्ध मौत का मामला दिनों-दिन पेचीदा होता जा रहा है। इस दर्दनाक और रहस्यमयी घटना को बीते हुए 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद पुलिसिया अनुसंधान किसी मुकाम पर नहीं पहुँच पाया है। मामले के अधर में लटके रहने से जहाँ एक ओर मृतका के मायके वालों में भारी आक्रोश है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमदाहा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 19 में लगभग दो हफ्ते पहले 24 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया था और पोस्टमार्टम के लिए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल भेज दिया था।
शुरुआती दौर में यह मामला आत्महत्या या संदिग्ध बीमारी के रूप में सामने आया था, लेकिन मृतका के मायके पक्ष के लोगों ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए। मायके वालों का आरोप था कि यह सामान्य मौत नहीं है, बल्कि दहेज या पारिवारिक विवाद के चलते उनकी बेटी की हत्या की गई है और इसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
15 दिन बीतने के बाद भी नहीं सुलझ पाया रहस्य
घटना के 15 दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस की सुस्त चाल के कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी।
विसरा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम का इंतजार: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के असल कारणों का खुलासा विसरा रिपोर्ट (Visra Report) और मेडिकल बोर्ड के अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। हालांकि, इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट के नहीं आने से जाँच प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।
परिजनों का दर्द: मृतका के माता-पिता और अन्य स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि वे न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, लेकिन पुलिस की ओर से उन्हें अभी तक कोई संतोषजनक आश्वासन या ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।
कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में पुलिस को त्वरित और पेशेवर रुख अपनाना चाहिए ताकि दोषियों को जल्द बेनकाब किया जा सके। मामले के लंबे समय तक अधर में लटके रहने से सबूतों के साथ छेड़छाड़ होने की आशंका भी बनी रहती है।
धमदाहा थाना पुलिस का इस संबंध में कहना है कि वे मामले की हर एंगल से सूक्ष्मता से जाँच कर रहे हैं। पुलिस का दावा है कि पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट हाथ आते ही स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी और यदि इसमें किसी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।
जाँच की सुस्त रफ्तार: 15 दिन बीत जाने के बावजूद संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच पाई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर निर्भरता: मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि के लिए विसरा और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
न्याय की गुहार: पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष और जल्द जाँच पूरी कर दोषियों को सजा दिलाने की पुरजोर मांग की है।