धमदाहा अनुमंडल मुख्यालय के मध्य विद्यालय (एससी) में औचक निरीक्षण के दौरान खुली पोल: व्यापक अनियमितताएं और लापरवाही उजागर, महकमे में मचा हड़कंप
बिहार के शिक्षा विभाग द्वारा राज्यभर के सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने और पठन-पाठन का स्तर ऊंचा उठाने के लिए लाख दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी दावों की कलई खोलने के लिए काफी है। ताजा मामला पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल मुख्यालय से सामने आया है, जहां मध्य विद्यालय (अनुसूचित जाति - एससी) के औचक निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था की ऐसी पोल खुली कि प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के वक्त विद्यालय परिसर के भीतर कई गंभीर अनियमितताएं, भारी प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की धज्जियां उड़ती हुई पाई गईं। इस औचक जांच के बाद से लापरवाह शिक्षकों और शिक्षा विभाग के स्थानीय तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे सामने आई अनियमितताएं?
यह पूरा प्रकरण धमदाहा अनुमंडल मुख्यालय स्थित प्रतिष्ठित मध्य विद्यालय (एससी) का है, जहां पिछले कुछ समय से लगातार मिल रही शिकायतों और व्यवस्था की सुस्ती के मद्देनजर उच्चाधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण का निर्णय लिया गया था।
अचानक हुई जांच से मचा हड़कंप: जैसे ही जांच टीम अचानक स्कूल परिसर में दाखिल हुई, वहां चल रही कथित अनियमितताओं का पर्दाफाश होना शुरू हो गया। स्कूल के अंदर का नजारा विभागीय निर्देशों और सरकारी मानकों के बिल्कुल विपरीत पाया गया।
गंभीर कमियों की फेरिस्त: निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि स्कूल के संचालन में बुनियादी नियमों की अनदेखी की जा रही है। बच्चों की उपस्थिति से लेकर शिक्षकों की कार्यशैली और मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) जैसी कल्याणकारी योजनाओं तक में भारी गड़बड़ियां पाई गईं।
निरीक्षण में उजागर हुईं मुख्य खामियां और लापरवाही
जांच टीम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, मध्य विद्यालय धमदाहा (एससी) में निम्नलिखित प्रमुख अनियमितताएं पाई गईं:
शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति में घालमेल: विद्यालय के निरीक्षण के दौरान कई शिक्षक अपने निर्धारित समय पर या तो अनुपस्थित पाए गए या फिर कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति और कागजों में दर्ज उपस्थिति रजिस्टर (Attendance Register) में भारी अंतर मिला।
पठन-पाठन व्यवस्था का बुरा हाल: बच्चों के भविष्य के साथ किस तरह खिलवाड़ हो रहा था, इसकी बानोगी कक्षाओं में देखने को मिली। निर्धारित समयानुसार कक्षाओं का संचालन नहीं हो रहा था और छात्र बिना किसी शिक्षण मार्गदर्शन के इधर-उधर भटकते नजर आए।
बुनियादी सुविधाओं और साफ-सफाई का अभाव: विद्यालय परिसर और कमरों की साफ-सफाई का स्तर बेहद दयनीय पाया गया। बच्चों के पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के रख-रखाव में भी भारी लापरवाही बरती जा रही थी, जिससे छात्रों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने का खतरा बना हुआ है।
विभागीय कार्रवाई की सुगबुगाहट और जवाबदेही पर सवाल
इस औचक निरीक्षण में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।
स्पष्टीकरण और नोटिस की तैयारी: जांच रिपोर्ट के आधार पर स्कूल के प्रधानाध्यापक और संबंधित लापरवाह शिक्षकों से स्पष्टीकरण (Show Cause) मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह अंदेशा जताया जा रहा है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर कड़ी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय लोगों में रोष: इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय अभिभावकों और बुद्धिजीवियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब अनुमंडल मुख्यालय के स्कूलों का यह हाल है, तो दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के विद्यालयों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की चुनौती
धमदाहा के इस मध्य विद्यालय की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब तक जमीनी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और सख्त प्रशासनिक शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक सरकारी विद्यालयों की सूरत नहीं बदल सकती।
सख्त मॉनिटरिंग की जरूरत: शिक्षाविदों का मानना है कि केवल कागजी निर्देश जारी करने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, बल्कि इस तरह के औचक निरीक्षणों का दौर लगातार जारी रहना चाहिए ताकि दोषी शिक्षकों में कानून और प्रशासन का भय बना रहे।
छात्रों के भविष्य की रक्षा: स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में लिप्त दोषियों के खिलाफ मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी स्कूल में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत कोई न जुटा सके।