हत्या के प्रयास के दोषी सुनील पहाड़िया को 5 साल की कठोर कारावास की सजा, ब्रदी देवी पर हमले के मामले में आया ऐतिहासिक फैसला
भागलपुर: न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ितों के लिए भागलपुर न्यायालय से एक अहम और सख्त फैसला सामने आया है। अदालत ने हत्या के प्रयास के एक गंभीर मामले में सुनवाई पूरी करते हुए दोषी करार दिए गए सुनील पहाड़िया को 5 साल की सजा सुनाई है। यह पूरा मामला महिला ब्रदी देवी पर हुए जानलेवा हमले और हत्या के प्रयास से जुड़ा हुआ है, जिसमें अभियोजन पक्ष की दमदार दलीलों और सबूतों के आधार पर अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले से न्याय व्यवस्था में अपराधियों के प्रति कड़ा संदेश गया है।
क्या है पूरा मामला? जानिए घटना की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला भागलपुर क्षेत्र का है, जहां कुछ समय पूर्व आपसी रंजिश या विवाद के चलते ब्रदी देवी नामक महिला को निशाना बनाया गया था। आरोपियों द्वारा ब्रदी देवी पर इस प्रकार का घातक हमला किया गया कि उनकी जान पर बन आई थी। हमलावरों ने उन्हें मौत के घाट उतारने की नीयत से गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय थाने में इस मामले को लेकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी। हालांकि शुरुआत में इस मामले में महिला ब्रदी देवी की हत्या या हत्या के प्रयास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई और पुलिस ने अपनी तफ्तीश के दौरान साक्ष्य जुटाए। पुलिस अनुसंधान के बाद अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया गया, जिसके बाद से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
अदालत में चली लंबी सुनवाई और एपीपी की दमदार बहस
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच लंबी और गहन कानूनी बहस चली। सरकार की ओर से इस महत्वपूर्ण मुकदमे में अपर लोक अभियोजक (APP) विभाषचंद्र चौधरी ने पैरवी की।
एपीपी विभाषचंद्र चौधरी ने अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष का मजबूत पक्ष रखते हुए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, चिकित्सीय रिपोर्ट (Medical Report), और चश्मदीद गवाहों के बयान पेश किए। अपनी तीखी और तर्कसंगत बहस के दौरान उन्होंने अदालत को बताया कि किस प्रकार अभियुक्त सुनील पहाड़िया ने सुनियोजित तरीके से पीड़ित महिला पर जानलेवा हमला किया था। उन्होंने दलील दी कि इस तरह के अपराध समाज के लिए एक गंभीर खतरा हैं और ऐसे अपराधियों को नरमी बख्शना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों और एपीपी विभाषचंद्र चौधरी की दमदार दलीलों के आगे बचाव पक्ष के वकील अभियुक्त के गुनाह को झुठला नहीं सके।
अदालत का फैसला और सजा का ऐलान
दोनो पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद भागलपुर न्यायालय के न्यायाधीश ने अभियुक्त सुनील पहाड़िया को हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) के आरोप में दोषी करार दिया।
दोषी साबित होने के बाद अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए सुनील पहाड़िया को 5 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय के इस फैसले से साफ हो गया है कि कानून व्यवस्था और न्यायपालिका महिलाओं पर अत्याचार या किसी भी प्रकार के हिंसक हमलों को लेकर कितनी सख्त है।
फैसले का सामाजिक प्रभाव और लोगों की प्रतिक्रिया
न्यायालय के इस त्वरित और सख्त निर्णय के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों ने राहत की सांस ली है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा होता है। महिला सुरक्षा और हिंसक वार मामलों में समय पर न्याय मिलना पीड़ित परिवार के लिए बहुत बड़ी राहत साबित होता है।
सरकारी वकील (APP) विभाषचंद्र चौधरी की कुशल पैरवी और न्यायालय के इस कड़े रुख ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कानून के लंबे हाथ अपराधियों तक जरूर पहुंचते हैं, चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो। 5 साल की सजा पाने वाला सुनील पहाड़िया अब सलाखों के पीछे रहकर अपने किए की सजा भुगतेगा।