सुल्तानगंज: नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का अभाव, एक्स-रे मशीन धूल फांकने को मजबूर
सुल्तानगंज (भागलपुर): सुल्तानगंज के नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बड़े-बड़े दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। करोड़ों की लागत से बने इस अत्याधुनिक भवन में मरीजों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का वादा किया गया था, लेकिन उद्घाटन के बाद से ही यहां की मुख्य मशीनें केवल शो-पीस बनी हुई हैं। इनमें सबसे प्रमुख 'एक्स-रे मशीन' है, जो अस्पताल में स्थापित होने के बावजूद आज तक चालू नहीं हो सकी है।
मरीजों की जेब पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
एक्स-रे मशीन के चालू न होने से सुल्तानगंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों को सामान्य चोट या फ्रैक्चर की जांच के लिए बाहर के निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। एक ओर सरकार मुफ्त स्वास्थ्य सेवा का वादा करती है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के भीतर मशीन मौजूद होने के बावजूद मरीजों को निजी केंद्रों पर जाकर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने पर डॉक्टर केवल पर्ची थमा देते हैं और जांच के लिए बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा न होने के कारण न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ रहा है।
तकनीकी खामियां या प्रशासनिक लापरवाही?
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे मशीन के निष्क्रिय रहने के पीछे कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं, बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही मुख्य कारण मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो मशीन स्थापित तो कर दी गई, लेकिन इसे संचालित करने के लिए आवश्यक तकनीशियन (Radiologist/Technician) की नियुक्ति अब तक नहीं की गई है। इसके अलावा, बिजली के कनेक्शन या अन्य छोटे-मोटे तकनीकी सुधारों के लिए भी विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी ने लोगों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। लोगों का सवाल है कि यदि मशीन चलानी ही नहीं थी, तो उसे यहां मंगाकर अस्पताल में डंप क्यों किया गया?
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल
नवनिर्मित भवन का उद्देश्य ही यही था कि मरीजों को शहर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी, लेकिन व्यवस्था में सुधार के बजाय स्थिति वैसी ही बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक किसी ने भी इस दिशा में सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। अस्पताल में एक्स-रे मशीन के साथ-साथ अन्य पैथोलॉजिकल जांच की सुविधाएं भी सुचारू नहीं हैं, जिससे पूरे अस्पताल परिसर की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान लग गया है।
सुल्तानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह तस्वीर उन सभी दावों की पोल खोलती है जिनमें स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही जाती है। मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का यह सिलसिला कब थमेगा, यह बड़ा सवाल है। यदि जल्द ही मशीन चालू नहीं की गई, तो स्थानीय लोग इसे लेकर बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए तकनीशियन की नियुक्ति और मशीन की जांच-पड़ताल कर उसे चालू करना चाहिए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।