रूपौली प्रखंड की भिखना और कांप पंचायत में विशेष सहयोग शिविर का सफल आयोजन: सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत मिले 361 आवेदन, अधिकारियों ने समस्याओं के त्वरित निष्पादन का दिया भरोसा
पूर्णिया (रूपौली): बिहार के पूर्णिया जिले के रूपौली प्रखंड अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके घर-द्वार तक पहुँचाने के उद्देश्य से विशेष प्रशासनिक पहलों का सिलसिला तेजी से चल रहा है। इसी कड़ी में रूपौली प्रखंड की दो महत्वपूर्ण पंचायतों—भिखना पंचायत और कांप पंचायत—में बुधवार को विशेष पंचायत सहयोग शिविर (Sahyog Shivir) का आयोजन किया गया। इस शिविर में ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड, आवास योजना और भूमि विवाद जैसे विभिन्न मामलों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया। दोनों पंचायतों में लगाए गए इन शिविरों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित कुल 361 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कई मामलों का मौके पर ही निष्पादन किया गया, जबकि शेष आवेदनों को संबंधित विभागों को अग्रसारित कर दिया गया।
शिविर में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़: विभिन्न योजनाओं के लिए उमड़े आवेदक
भिखना और कांप पंचायत में आयोजित इन शिविरों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें सुबह से ही ग्रामीण महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की लंबी कतारें लग गईं।
जनता की सक्रिय भागीदारी: सुदूर ग्रामीण अंचल के लोगों के लिए प्रखंड मुख्यालय या जिला मुख्यालय के चक्कर काटने की मजबूरी को खत्म करने के लिए सरकार की यह पहल वरदान साबित हो रही है। शिविर में पहुँचकर लोगों ने बिना किसी बिचौलिए के सीधे अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी।
प्रमुख विभागों के स्टॉल: शिविर स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग काउंटर (स्टॉल) लगाए गए थे, जहाँ पंचायत स्तर के कर्मचारी और अधिकारी मुस्तैदी से आवेदन लेते नजर आए। ग्रामीणों ने अपनी सुविधानुसार अलग-अलग योजनाओं के फॉर्म भरे और उन्हें जमा कराया।
प्राप्त आवेदनों का विस्तृत ब्योरा: किन समस्याओं पर रहा जोर?
बुधवार को आयोजित इन दोनों पंचायतों के शिविरों में कुल 361 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें सबसे अधिक संख्या सामाजिक सुरक्षा और आवास योजनाओं से जुड़े मामलों की थी।
पेंशन और राशन कार्ड से जुड़े मामले: वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और विकलांगता पेंशन से वंचित बुजुर्गों व जरूरतमंदों ने नए नाम जुड़वाने या रुका हुआ भुगतान चालू करवाने के लिए आवेदन दिए। इसके अलावा, नए राशन कार्ड बनवाने और पुराने राशन कार्ड में सदस्यों के नाम जोड़ने के लिए भी बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए।
प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा: कई ग्रामीणों ने कच्चे मकानों की स्थिति का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृति के लिए गुहार लगाई। साथ ही, मनरेगा जॉब कार्ड और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन से जुड़ी समस्याएं भी अधिकारियों के समक्ष रखी गईं।
भूमि विवाद और अन्य शिकायतें: ग्रामीण इलाकों में भूमि-सुधार और आपसी जमीन विवादों से जुड़े कई मामले भी सामने आए, जिन्हें राजस्व कर्मचारियों की मदद से सुलझाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति: त्वरित निष्पादन का आश्वासन
शिविर के सफल संचालन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रूपौली प्रखंड के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार मुस्तैद नजर आए।
मौके पर समाधान: शिविर का निरीक्षण कर रहे अधिकारियों ने बताया कि जितने भी आवेदन प्राप्त हुए हैं, उनकी स्क्रूटनी (जांच) तेजी से की जा रही है। जो मामले पंचायत स्तर पर निबटाए जा सकते हैं, उनका ऑन-द-स्पॉट (On-the-spot) समाधान किया जा रहा है।
पारदर्शिता और जवाबदेही: अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी आवेदक को बिना किसी वैध कारण के चक्कर न कटवाए जाएं। सभी प्राप्त आवेदनों को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर एक निश्चित समयावधि के भीतर निष्पादित किया जाएगा, ताकि सरकार की हर कल्याणकारी योजना का लाभ अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुँच सके।
ग्रामीणों में जगी नई उम्मीद: प्रशासनिक सुस्ती पर पड़ी लगाम
लंबे समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे ग्रामीणों के लिए इस तरह के पंचायत स्तर के शिविर एक बड़ी राहत बनकर आए हैं।
राहत की सांस लेते ग्रामीण: शिविर में अपना आवेदन जमा करने के बाद एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा कि पहले छोटे-छोटे काम के लिए भी ब्लॉक ऑफिस के कई चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब घर के पास ही शिविर लग जाने से समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।
सकारात्मक संदेश: रूपौली प्रखंड की भिखना और कांप पंचायत में हुए इस सफल आयोजन से अन्य पंचायतों के लोगों में भी ऐसे शिविर जल्द लगाए जाने की उम्मीद बढ़ गई है।
रूपौली प्रखंड की भिखना और कांप पंचायतों में आयोजित यह सहयोग शिविर ग्रामीण विकास और सुशासन की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है। 361 आवेदनों का प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण आज भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पारदर्शी और सुलभ प्रशासनिक तंत्र की तलाश में रहते हैं। यदि इस प्रकार के शिविरों का आयोजन नियमित रूप से किया जाए, तो भ्रष्टाचार और बिचौलिया राज पर पूरी तरह लगाम लग सकती है और आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत हो सकता है।