जलालगढ़ में पल्स पोलियो अभियान का सफल समापन: 27,810 बच्चों को पिलाया गया 'सुरक्षा कवच'

जलालगढ़ (पूर्णिया)। पोलियो जैसी लाइलाज बीमारी को जड़ से मिटाने के संकल्प के साथ चलाए गए पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान का जलालगढ़ प्रखंड में सफलतापूर्वक समापन हो गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस पांच दिवसीय सघन अभियान के दौरान 27,810 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर उन्हें जीवन की सुरक्षा का कवच प्रदान किया गया है। 28 जून 2026 से शुरू हुआ यह अभियान 2 जुलाई 2026 तक पूरे प्रखंड में युद्ध स्तर पर चलाया गया।

घर-घर दस्तक, स्वास्थ्य कर्मियों का संकल्प

पोलियो मुक्त भारत के सपने को साकार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरी तरह से मुस्तैद रहीं। स्वास्थ्य कर्मियों ने केवल मुख्य बस्तियों ही नहीं, बल्कि प्रखंड के सुदूर और दुर्गम इलाकों में भी घर-घर जाकर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि स्वास्थ्य कर्मियों ने तपती धूप और विपरीत परिस्थितियों की परवाह किए बिना अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।

टीम के सदस्यों ने हर उस बच्चे तक पहुँचने का प्रयास किया, जिसे खुराक की आवश्यकता थी। जिन घरों में बच्चे नहीं मिल सके, वहां कर्मियों ने दोबारा जाकर दस्तक दी, ताकि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।

'कोई बच्चा छूटे न, सुरक्षा चक्र टूटे न'

अभियान की सफलता के पीछे स्वास्थ्य विभाग की व्यापक कार्ययोजना थी। प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि अभियान के तहत लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 'माइक्रो प्लान' तैयार किया गया था। इस योजना के तहत:

निगरानी दल: प्रत्येक पंचायत में विशेष निगरानी दल गठित किए गए थे, जो टीकाकरण की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए थे।

मिस्ड केस (छूटे हुए बच्चे): अभियान के अंतिम दो दिनों में उन बच्चों पर विशेष ध्यान दिया गया जो पहले दिन अपने घरों में नहीं मिल पाए थे या जिनके घर बंद थे।

माइग्रेंट आबादी पर फोकस: ईंट-भट्टों, निर्माणाधीन साइटों और अस्थाई बस्तियों में रहने वाले परिवारों के बच्चों को ढूंढकर दवा पिलाना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे विभाग ने सफलतापूर्वक पूरा किया।

बंद घरों और बाहर रहने वालों के लिए विशेष रणनीति

अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती 'बंद घरों' की थी। कई परिवार काम के सिलसिले में घर से बाहर थे। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रणनीति में लचीलापन लाते हुए शाम के समय 'फॉलो-अप' अभियान चलाया। प्रखंड के विभिन्न मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों ने उन घरों की सूची बनाई जहाँ ताले लगे थे। अभियान के अंतिम दिन, एक विशेष ड्राइव चलाकर उन घरों के बच्चों को भी सुरक्षा चक्र में शामिल किया गया।

जन-भागीदारी और जागरूकता का असर

जलालगढ़ के निवासियों में भी इस बार जागरूकता का स्तर काफी ऊंचा देखा गया। अभिभावकों ने खुद आगे बढ़कर अपने बच्चों को दवा पिलाई। कई जगहों पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर अभिभावकों को पोलियो के प्रति संवेदनशील बनाया, जिसके परिणामस्वरूप शत-प्रतिशत लक्ष्य के करीब पहुंचना संभव हो सका।

भविष्य की राह: सतत निगरानी

भले ही आधिकारिक रूप से यह पांच दिवसीय अभियान 2 जुलाई को समाप्त हो गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता अभी भी बरकरार है। चिकित्सा प्रभारी ने बताया कि आगामी कुछ दिनों तक उन इलाकों पर नजर रखी जाएगी जहाँ संक्रमण का थोड़ा भी अंदेशा हो सकता है। साथ ही, अगले चरण के टीकाकरण अभियान की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है।

27,810 बच्चों का टीकाकरण केवल एक संख्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग और समाज के बीच के समन्वय की जीत है। पोलियो का उन्मूलन भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। जलालगढ़ प्रखंड प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मियों ने जिस तत्परता से काम किया है, वह अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक आदर्श है।