शिक्षा के प्रति समर्पित एक युग का अंत: मध्य विद्यालय महेंद्र नगर दियारा के जमीनदाता शमशेर चांद उर्फ बच्चन का निधन

धमदाहा (पूर्णिया)। समाज सेवा और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण रखने वाले, महान समाजसेवी और मध्य विद्यालय महेंद्र नगर दियारा के जमीनदाता शमशेर चांद उर्फ बच्चन का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। वे अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार और शिक्षा के क्षेत्र में छोड़ी गई अपनी अमूल्य विरासत छोड़ गए हैं।

एक महान व्यक्तित्व का अवसान

शमशेर चांद उर्फ बच्चन केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था थे। उनका पूरा जीवन निस्वार्थ भाव से समाज की बेहतरी के लिए समर्पित रहा। उनका व्यक्तित्व बेहद सरल, सहज और मिलनसार था। वे हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में जो कार्य किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे।

शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान

मध्य विद्यालय महेंद्र नगर दियारा की स्थापना के समय शमशेर चांद ने जो योगदान दिया, वह अविस्मरणीय है। उन्होंने अपने पूर्वजों की जमीन को विद्यालय के नाम कर दिया ताकि क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर न जाना पड़े। उस समय जब शिक्षा के प्रति लोगों में बहुत अधिक जागरूकता नहीं थी, उन्होंने जमीन दान देकर न केवल एक विद्यालय की नींव रखी, बल्कि हजारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया।

आज उस विद्यालय में पढ़ने वाले सैंकड़ों बच्चे उन्हीं के त्याग और दूरदर्शी सोच के कारण अक्षर ज्ञान प्राप्त कर पा रहे हैं। उनके इस योगदान को याद करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि "शमशेर चांद ने विद्यालय के लिए जमीन देकर दियारा क्षेत्र में शिक्षा की मशाल जलाई थी।"

अंतिम विदाई: नम आँखों से दी गई श्रद्धांजलि

उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों का कहना था कि उनके जाने से न केवल परिवार ने एक अभिभावक खोया है, बल्कि क्षेत्र ने एक ऐसा व्यक्ति खोया है जो हमेशा समाज के विकास के लिए तत्पर रहता था।

उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए। हर किसी की आँखें नम थीं। शमशेर चांद का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव के पास ही पूरे सम्मान के साथ किया गया। उनके बड़े बेटे ने मुखाग्नि दी, जिसे देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति का हृदय विदीर्ण हो गया।

क्षेत्र में शोक की लहर

धमदाहा के स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शमशेर चांद का निधन एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि पूरे समाज की क्षति है। उनके निधन पर शोक व्यक्त करने वालों में कई पूर्व मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और शिक्षा प्रेमी शामिल थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

जीवन से जुड़ी यादें

शमशेर चांद केवल दानवीर ही नहीं थे, बल्कि वे एक कुशल सलाहकार भी थे। गांव के विवादों को सुलझाने में उनकी भूमिका हमेशा निष्पक्ष होती थी। युवा पीढ़ी उनसे जीवन जीने की सादगी और दूसरों की मदद करने का पाठ सीखती थी। उन्होंने अपनी मेहनत से जो सम्मान अर्जित किया था, वह आज उनके अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ से स्पष्ट था।

एक अमिट विरासत

शमशेर चांद उर्फ बच्चन भले ही आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन मध्य विद्यालय महेंद्र नगर दियारा की इमारत और वहां पढ़ने वाले बच्चों की खिलखिलाहट हमेशा उनकी याद दिलाती रहेगी। जब भी क्षेत्र में शिक्षा की बात होगी, उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा। यह विद्यालय उनके द्वारा समाज को दी गई सबसे बड़ी भेंट है, जो सदियों तक उनका स्मरण कराती रहेगी।

उनके निधन से क्षेत्र में एक गहरा शून्य उत्पन्न हो गया है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दे।