लखीसराय की दारोगा प्रियंका कुमारी बनीं डीएसपी, 70वीं बीपीएससी में लहराया परचम; पीरपैंती लौटने पर ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत

पीरपैंती (भागलपुर)/लखीसराय: कड़ी मेहनत, सच्ची लगन और अटूट हौसले के दम पर लखीसराय में दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) के पद पर तैनात प्रियंका कुमारी ने 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। अपने दूसरे प्रयास में इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास कर उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक (डिप्टी एसपी) का पद हासिल किया है। अपनी इस अभूतपूर्व कामयाबी से उन्होंने न केवल पुलिस विभाग का बल्कि अपने गृह क्षेत्र पीरपैंती का भी नाम पूरे राज्य में रोशन किया है।

पीरपैंती में हुआ बेटी का ऐतिहासिक स्वागत

शनिवार को जब प्रियंका कुमारी डीएसपी बनने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पीरपैंती पहुंचीं, तो वहां का नजारा किसी बड़े उत्सव से कम नहीं था। ग्रामीणों ने अपनी इस होनहार बेटी का ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की थाप और फूल-मालाओं के साथ प्रियंका को पूरे गांव में घुमाया गया।

गांव के बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद दिया, जबकि युवाओं के लिए वह रातों-रात एक 'आदर्श' (रोल मॉडल) बन गईं। ग्रामीणों का कहना था कि प्रियंका ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश की बेटियां भी अगर ठान लें, तो वे बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकती हैं।

चुनौतीपूर्ण ड्यूटी और पढ़ाई का शानदार संतुलन

प्रियंका की यह सफलता इसलिए भी बेहद खास और प्रेरणादायक है, क्योंकि उन्होंने पुलिस की अपनी सख्त और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी के साथ-साथ यह मुकाम हासिल किया है।

कठिन दिनचर्या: दारोगा के रूप में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की 24 घंटे की जिम्मेदारी के बीच समय निकालकर बीपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना आसान काम नहीं था।

असफलता से ली सीख: यह बीपीएससी में उनका दूसरा प्रयास था। पहले प्रयास में मिली असफलता से वे निराश नहीं हुईं, बल्कि उन्होंने अपनी कमियों का विश्लेषण किया और दोगुनी ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट गईं। उनके स्वाध्याय (Self-study) और टाइम मैनेजमेंट ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

'अभी मंजिल दूर है, अगला लक्ष्य है आईपीएस'

डीएसपी के पद पर चयनित होने के बावजूद प्रियंका कुमारी के सपनों की उड़ान अभी थमी नहीं है। गांव वालों और मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी बनना है।

उन्होंने स्पष्ट किया, "डीएसपी बनना मेरे लिए एक बहुत बड़ा पड़ाव जरूर है, लेकिन मेरी असली मंजिल यूपीएससी (UPSC) क्रैक करके आईपीएस बनना है। मैं समाज और देश की सेवा और बड़े स्तर पर करना चाहती हूं।"

युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा स्रोत

प्रियंका कुमारी की यह उपलब्धि उन हजारों-लाखों युवाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा बन गई है, जो अक्सर संसाधनों की कमी या कठिन परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं। उनकी कहानी यह साफ संदेश देती है कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो और इंसान निरंतर प्रयास करता रहे, तो कोई भी बाधा सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती।