मदारघाट दरगाह के पास कोसी नदी पर पुल निर्माण की पुरजोर मांग: अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष सह सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाई आवाज; हजारों ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या के समाधान को लेकर आंदोलन की चेतावनी

बिहार के पूर्णिया जिले के गढ़बनैली और आसपास के ग्रामीण इलाकों से जनहित से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आई है। क्षेत्र के लोगों को आवागमन की भारी कठिनाइयों से मुक्ति दिलाने के लिए मदारघाट दरगाह के पास कोसी नदी पर पुल निर्माण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।

अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष सह प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता ने इस बहुप्रतीक्षित मांग को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर आवाज बुलंद की है। उनका कहना है कि इस पुल के निर्माण न होने के कारण सीमांचल के लाखों लोगों को हर साल बरसात के दिनों में भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है और व्यापारिक गतिविधियाँ भी बुरी तरह प्रभावित होती हैं। यदि जल्द ही सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो स्थानीय जनता के सहयोग से एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला? (मदारघाट दरगाह के पास पुल की आवश्यकता)

पूर्णिया और इसके पड़ोसी जिलों को जोड़ने वाले भौगोलिक परिदृश्य में कोसी नदी एक बड़ी बाधा साबित होती रही है।

नदी पार करने का जोखिम भरा सफर: गढ़बनैली और मदारघाट दरगाह के आसपास के क्षेत्रों के लोगों को नदी के दूसरे छोर पर जाने के लिए या तो लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर जान जोखिम में डालकर नावों के सहारे आवागमन करना पड़ता है।

सालों से लंबित मांग: स्थानीय निवासियों और प्रबुद्धजनों द्वारा पिछले कई वर्षों से मदारघाट दरगाह के पास कोसी नदी पर एक पक्के पुल (Bridge) के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अब तक इस पर कोई मूर्त रूप नहीं मिल सका है।

व्यापार और कृषि पर असर: पुल न होने के कारण इस इलाके के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुँचाने में भारी परिवहन लागत चुकानी पड़ती है, जिससे क्षेत्र का आर्थिक विकास भी अवरुद्ध हो रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता की हुंकार: सरकार और प्रशासन को चेतावनी

अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष ने इस मुद्दे को लेकर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है और प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है।

जनता का नारकीय जीवन: सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि आजादी के इतने दशक बाद भी यदि लोगों को एक अदद पुल के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह क्षेत्र के विकास के दावों की पोल खोलता है। बरसात के दिनों में जब कोसी नदी का जलस्तर बढ़ता है, तब स्थिति और भी अधिक भयावह हो जाती है।

आपातकालीन सेवाओं की बदहाली: इस क्षेत्र में स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान मरीजों को अस्पताल पहुँचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। पुल के अभाव में एंबुलेंस समय पर नहीं पहुँच पाती, जिससे कई बार मरीजों की जान तक चली जाती है।

चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी: चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि सरकार या संबंधित विभाग ने आगामी कुछ हफ्तों के भीतर इस पुल के निर्माण के लिए डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार कर प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी, तो आम जनता और युवाओं को साथ लेकर सड़क से लेकर सदन तक जोरदार आंदोलन किया जाएगा।

स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों का समर्थन

इस मांग के समर्थन में गढ़बनैली और मदारघाट क्षेत्र के हजारों ग्रामीण, युवा और स्थानीय व्यापारी एकजुट होने लगे हैं।

व्यापारिक सुगमता की जरूरत: व्यापारियों का कहना है कि यदि मदारघाट दरगाह के पास पुल बन जाता है, तो पूर्णिया और कोसी प्रमंडल के अन्य जिलों के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी, जिससे व्यापारिक रिश्तों को नया पंख मिलेगा।

युवाओं में आक्रोश: स्थानीय युवाओं का कहना है कि चुनाव के समय सभी दल और नेता इस मुद्दे पर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई सुधि नहीं लेता। इस बार युवा चुप बैठने वाले नहीं हैं और अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

मदारघाट दरगाह के पास कोसी नदी पर पुल निर्माण की मांग अब एक जन-आंदोलन का रूप लेती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष सह सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उठाई गई इस आवाज ने एक बार फिर सरकार और जिला प्रशासन के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की धुरी है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और जनता को इस बड़ी समस्या से कब मुक्ति मिलती है।