सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी उपलब्ध न कराने पर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का सख्त आदेश; विद्युत उपभोक्ताओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं में मची हलचल

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी महकमों में जनहित से जुड़े मामलों में हो रही हीला-हवाली के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाया गया है। मुजफ्फरपुर में बिजली विभाग (Bihar State Power Holding Company Limited/South Bihar Power Distribution Company Ltd) के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) मो. साजिद हुसैन इन दिनों गंभीर प्रशासनिक मुश्किलों में घिर गए हैं। उन पर सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information - RTI Act) के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियों को तय समय-सीमा के भीतर उपलब्ध न कराने का गंभीर आरोप लगा है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित सक्षम प्राधिकार द्वारा कार्यपालक अभियंता मो. साजिद हुसैन को नोटिस जारी कर महज 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण (Show Cause Notice) देने का कड़ा आदेश दिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस घटना के बाद से मुजफ्फरपुर के बिजली विभाग और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, वहीं विद्युत उपभोक्ताओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। आइए मुजफ्फरपुर के इस बहुचर्चित आरटीआई मामले, कार्यपालक अभियंता को मिले नोटिस, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और इसके व्यापक प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

आरटीआई (RTI) कानून और जनता के अधिकार: पारदर्शिता की अनिवार्यता

भारत का सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 देश के प्रत्येक नागरिक को सरकारी विभागों, उपक्रमों और सार्वजनिक प्राधिकरणों से पारदर्शी तरीके से जानकारी प्राप्त करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।

समयबद्धता का प्रावधान: आरटीआई कानून के नियमों के मुताबिक, किसी भी आवेदक द्वारा मांगी गई सूचना को सामान्यतः 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है। यदि मामला किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ा हो, तो इसे 48 घंटे के भीतर देने का प्रावधान है।

विद्युत विभाग से जुड़ी मांगें: आम तौर पर विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा अपने बिजली बिलों, ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतों, नए कनेक्शन, मीटर में गड़बड़ी और सरकारी योजनाओं के फंड के उपयोग से संबंधित जानकारियां आरटीआई के माध्यम से मांगी जाती हैं। मुजफ्फरपुर में भी इसी प्रकार की किसी महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाने या उसमें भारी विलंब करने के कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ है।

कार्यपालक अभियंता मो. साजिद हुसैन को 24 घंटे का अल्टीमेटम

बिजली विभाग जैसे महत्वपूर्ण और आवश्यक सेवा प्रदान करने वाले महकमे में जनशिकायतों और सूचनाओं के प्रति बरती जाने वाली उदासीनता को उच्च अधिकारियों ने बेहद गंभीरता से लिया है।

स्पष्टीकरण का आदेश: कार्यपालक अभियंता मो. साजिद हुसैन पर आरोप है कि उन्होंने बार-बार अनुरोध या तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी आरटीआई आवेदक को अपेक्षित सूचनाएं मुहैया नहीं कराईं। इसे लोक सूचना प्राधिकारी (PIO) के दायित्वों का सीधा उल्लंघन माना गया है।

जवाब तलब: जारी किए गए आदेश के तहत मो. साजिद हुसैन से पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ विभागीय नियमों के तहत लापरवाही बरतने और आरटीआई अधिनियम की अवहेलना करने के लिए सख्त कार्रवाई की जाए। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए केवल 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है।

विद्युत उपभोक्ताओं और आम जनता की समस्याएं: जवाबदेही की मांग

मुजफ्फरपुर में बिजली उपभोक्ताओं को अक्सर विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, और जब वे कानून का सहारा लेकर अपनी बात जानना चाहते हैं, तो अधिकारियों का ऐसा रवैया जनता के गुस्से को भड़काने का काम करता है।

पारदर्शिता का अभाव: उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली विभाग के कई अधिकारी अपनी कमियों और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए आरटीआई के तहत मांगी जाने वाली जानकारियों को दबाने की कोशिश करते हैं।

दबाव की राजनीति और सुधार की उम्मीद: इस तरह के सख्त प्रशासनिक आदेशों से अधिकारियों में यह संदेश जाता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि समय पर जानकारी नहीं दी जाती है, तो उच्च स्तर पर गाज गिरनी तय है।

मुजफ्फरपुर में बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता मो. साजिद हुसैन को आरटीआई के तहत जानकारी न देने के मामले में 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का यह आदेश प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक सख्त कदम है। यह घटना स्पष्ट करती है कि जनहित और कानून के मामलों में अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कार्यपालक अभियंता अपने ऊपर लगे आरोपों का संतोषजनक जवाब देने में असफल रहते हैं, तो उन पर विभागीय कार्रवाई होना तय है, जो अन्य लापरवाह अधिकारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश साबित होगी।