प्रशासनिक बैठकों में सुशासन का सख्त संदेश; जनता की शिकायतों के त्वरित निष्पादन और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के दिए गए कड़े निर्देश, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के प्रशासनिक भवनों में जनता की समस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को दुरुस्त करने को लेकर उच्च स्तर पर बैठकों का दौर तेज हो गया है। आम नागरिकों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई (Quick Disposal) सुनिश्चित करने और थानों से लेकर विभिन्न विभागों में धूल फांक रहे पेंडिंग मामलों का समयबद्ध निपटारा करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनशिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली या सुस्ती कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का यह कदम आम जनता को त्वरित न्याय और राहत दिलाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम माना जा रहा है।
लंबित मामलों की नियमित समीक्षा: मॉनिटरिंग के लिए नई व्यवस्था
विभिन्न विभागों, थानों, अंचलों और लोक शिकायत निवारण कार्यालयों में अक्सर फाइलों के लंबित रहने की शिकायतें आम जनता द्वारा की जाती रही हैं। इस समस्या पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने अब 'नियमित समीक्षा' (Regular Review) की नीति अपनाई है:
साप्ताहिक और पाक्षिक बैठकें: सभी जिला स्तरीय अधिकारियों, अनुमंडल अधिकारियों (SDO) और अंचल अधिकारियों (CO) को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने कार्यालयों में लंबित मामलों की सूची तैयार कर हर सप्ताह इसकी समीक्षा करें।
फाइलों के निष्पादन की डेडलाइन: प्रत्येक मामले के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की गई है। यदि कोई फाइल बिना किसी ठोस कारण के तय सीमा से अधिक समय तक लंबित पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारी से इसका स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही: जनता के काम समय पर हों, इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल और जनता दरबार में आने वाले आवेदनों की ट्रैकिंग सीधे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
जनशिकायतों का त्वरित निष्पादन: जनता दरबार और थानों में विशेष फोकस
सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता है कि आम आदमी को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके लिए जमीनी स्तर पर शिकायतों के निस्तारण की गति को तेज किया गया है:
थाना दिवस और जनता दरबार का प्रभावी संचालन: भूमि विवाद, आपसी खींचतान और पारिवारिक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक शनिवार को थानों में लगने वाले जनता दरबार को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। पुलिस और अंचल अधिकारी संयुक्त रूप से मामलों की सुनवाई कर मौके पर ही उनका निष्पादन कर रहे हैं।
फर्जी या झूठे मामलों पर लगाम: जनशिकायतों के त्वरित निष्पादन के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई झूठी शिकायत के जरिए किसी को परेशान न कर सके, इसके लिए मामलों की जमीनी जांच के बाद ही अंतिम कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारियों को दो टूक चेतावनी: लापरवाही बरती तो होगी सख्त विभागीय कार्रवाई
समीक्षा बैठक के दौरान जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि प्रशासनिक व्यवस्था में सुस्ती किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है:
कार्यों में प्रगति न दिखने पर नपे अधिकारी: जिन विभागों या थानों में जनशिकायतों के निष्पादन की गति धीमी पाई जाएगी, उनके प्रभारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई (Departmental Proceedings) शुरू की जाएगी।
फील्ड विजिट और औचक निरीक्षण: आला अधिकारियों द्वारा अब केवल बैठकों में रिपोर्ट लेने के बजाय मैदानी स्तर पर जाकर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया जा रहा है, ताकि यह परखा जा सके कि वास्तव में आम जनता की समस्याओं का समाधान हो रहा है या नहीं।
आम जनता को मिल रही राहत, उम्मीदें बढ़ीं
प्रशासन के इस सख्त और त्वरित रवैये से आम नागरिकों में एक सकारात्मक संदेश गया है। लोग अब बिना डरे अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं और उन्हें समय पर न्याय मिलने की उम्मीद भी बंधने लगी है। विशेष रूप से भूमि विवाद, वृद्धा पेंशन, राशन कार्ड, सड़क, बिजली और पानी से जुड़ी समस्याओं के समाधान में तेजी आने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली है।
भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा शिकायतों के त्वरित निष्पादन और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा को लेकर उठाया गया यह कदम सुशासन और पारदर्शिता की मिसाल पेश कर रहा है। यदि यह सख्ती और प्रतिबद्धता इसी तरह निरंतर बनी रही, तो निश्चित रूप से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सकेगा।