बिहपुर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित स्मृति सभा में सामाजिक न्याय के पुरोधा को याद किया गया

बिहपुर (भागलपुर/नवगछिया): भारत के पूर्व उपप्रधानमंत्री, महान स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक न्याय के सबसे सशक्त हस्ताक्षर 'बाबू जगजीवन राम' की पुण्यतिथि सोमवार को बिहपुर में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। स्थानीय कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक विशेष श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने बाबूजी के नाम से विख्यात जगजीवन राम के जीवन, उनके संघर्ष और देश निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान का स्मरण किया।

कार्यक्रम का भव्य आयोजन

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद इबरार आलम ने की। श्रद्धांजलि सभा का शुभारंभ बाबू जगजीवन राम के तैलचित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित करके किया गया। सभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बाबूजी के सिद्धांतों को आज के दौर में और अधिक प्रासंगिक बताया।

सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के मसीहा

सभा को संबोधित करते हुए मोहम्मद इबरार आलम ने कहा, "बाबू जगजीवन राम भारतीय राजनीति के उस शिखर पुरुष का नाम है, जिन्होंने अभावों से जूझते हुए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज बनकर देश की सत्ता के गलियारे तक का सफर तय किया। उन्होंने न केवल देश की आजादी की लड़ाई लड़ी, बल्कि आजादी के बाद एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए जीवन पर्यंत संघर्ष किया।"

वक्ताओं ने उनके प्रमुख कार्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला:

हरित क्रांति के शिल्पकार: बतौर कृषि मंत्री, बाबूजी ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की नींव रखी। उनके कार्यकाल में ही भारत में हरित क्रांति का सूत्रपात हुआ, जिससे भुखमरी की समस्या पर अंकुश लगा।

सामाजिक समानता के प्रणेता: उन्होंने जातिगत भेदभाव को मिटाने और समाज के दलित एवं शोषित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए निरंतर कार्य किए। उन्होंने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा की।

अदम्य राजनीतिक सूझबूझ: 1971 के युद्ध के दौरान रक्षा मंत्री के रूप में उनकी भूमिका ऐतिहासिक थी। उनके नेतृत्व में भारत ने सैन्य दक्षता का परिचय देते हुए एक नया इतिहास रचा, जिसके फलस्वरूप बांग्लादेश का उदय हुआ।

कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

इस स्मृति सभा में कांग्रेस के जिला एवं प्रखंड स्तर के नेताओं ने कहा कि आज के दौर में जब लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक समरसता को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं, बाबू जगजीवन राम के विचार एक दिशा-सूचक का काम करते हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि बाबूजी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सत्य के मार्ग पर चलकर समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए जा सकते हैं।

नेताओं ने कहा कि बाबूजी के 'श्रम' के प्रति सम्मान के कारण ही उनकी जयंती को 'समता दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे उनके पदचिह्नों पर चलकर समाज के कमजोर वर्गों की सेवा करें और देश की एकता-अखंडता को मजबूत बनाएं।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर प्रखंड कांग्रेस के कई पदाधिकारी, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता और समाजसेवी उपस्थित थे। सबने एक स्वर में बाबूजी के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने बाबूजी के बताए गए 'अहिंसा', 'समानता' और 'भाईचारे' के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

श्रद्धांजलि सभा का समापन बाबू जगजीवन राम अमर रहें के नारों के साथ हुआ। बिहपुर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह बाबूजी के उन महान आदर्शों के प्रति एक निष्ठा थी, जिन्होंने भारत को आधुनिक और लोकतांत्रिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाबू जगजीवन राम का जीवन सदैव आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना रहेगा, जो हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।