बिहार में रोजगार सृजन की रफ्तार पर सवाल, नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर कंपनियों का पंजीकरण धीमा; युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने की जरूरत
पटना। बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। इसका संकेत नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल पर नियोक्ताओं के पंजीकरण से भी मिलता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 57 लाख 47 हजार 866 कंपनियों और संस्थानों ने बतौर नियोक्ता अपना पंजीकरण कराया है, लेकिन बिहार की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है। इससे राज्य में निजी क्षेत्र के रोजगार बाजार और उद्योगों की सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी राज्य में जितनी अधिक कंपनियां रोजगार पोर्टलों पर पंजीकरण कराती हैं, उतने ही अधिक औपचारिक रोजगार के अवसर युवाओं तक पहुंचने की संभावना होती है। ऐसे में बिहार में कंपनियों के सीमित पंजीकरण को रोजगार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है नेशनल करियर सर्विस पोर्टल?
नेशनल करियर सर्विस (NCS) केंद्र सरकार का एक डिजिटल रोजगार मंच है, जहां नौकरी तलाशने वाले उम्मीदवार और नियोक्ता एक ही प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर सकते हैं। इस पोर्टल के माध्यम से कंपनियां रिक्त पदों की जानकारी साझा करती हैं, जबकि नौकरी चाहने वाले अपनी योग्यता और अनुभव के आधार पर आवेदन करते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और सुलभ बनाना है। साथ ही यह सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच रोजगार संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
बिहार में कम क्यों है पंजीकरण?
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में कंपनियों के सीमित पंजीकरण के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें राज्य में बड़े उद्योगों की अपेक्षाकृत कम संख्या, विनिर्माण क्षेत्र का सीमित विस्तार, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का कम डिजिटलीकरण और कई निजी संस्थानों द्वारा वैकल्पिक भर्ती माध्यमों का उपयोग शामिल हो सकता है।
इसके अलावा, कई स्थानीय कंपनियां अभी भी पारंपरिक तरीके से भर्ती करना पसंद करती हैं और डिजिटल रोजगार पोर्टलों का पर्याप्त उपयोग नहीं करतीं। इससे योग्य उम्मीदवारों तक रोजगार संबंधी जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाती।
युवाओं पर क्या होगा असर?
बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में युवा हर वर्ष रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। यदि निजी कंपनियों का पंजीकरण सीमित रहेगा, तो औपचारिक रोजगार के अवसर भी अपेक्षाकृत कम दिखाई देंगे।
इसका प्रभाव विशेष रूप से तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं, स्नातकों और कौशल प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है, जो ऑनलाइन माध्यम से नौकरी की तलाश करते हैं।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि एनसीएस पोर्टल पर कम पंजीकरण का अर्थ यह नहीं है कि राज्य में कोई निजी भर्ती नहीं हो रही है। कई कंपनियां अपने स्वयं के पोर्टल, कैंपस प्लेसमेंट, निजी जॉब वेबसाइटों या भर्ती एजेंसियों के माध्यम से भी नियुक्तियां करती हैं।
उद्योगों की भूमिका महत्वपूर्ण
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि बिहार में नए उद्योगों, विनिर्माण इकाइयों और सेवा क्षेत्र में निवेश बढ़ता है, तो रोजगार के अवसर भी स्वाभाविक रूप से बढ़ेंगे। इसके साथ ही अधिक कंपनियां डिजिटल रोजगार प्लेटफॉर्म पर भी पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित हो सकती हैं।
औद्योगिक विकास, बेहतर आधारभूत संरचना, निवेश-अनुकूल नीतियां और कुशल मानव संसाधन राज्य में रोजगार सृजन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सरकार की पहल
राज्य और केंद्र सरकार समय-समय पर कौशल विकास, रोजगार मेले, स्टार्टअप प्रोत्साहन और उद्योगों में निवेश आकर्षित करने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू करती रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन पहलों के साथ कंपनियों को एनसीएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो नौकरी तलाशने वाले युवाओं और नियोक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
डिजिटल भर्ती को बढ़ावा देने की जरूरत
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक नियोक्ताओं के जुड़ने से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बन सकती है। इससे नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिलेंगे और कंपनियों को भी योग्य प्रतिभाओं तक पहुंच आसान होगी।
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि उद्योग संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और सरकारी एजेंसियों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक कंपनियों को डिजिटल रोजगार पोर्टलों पर पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
रोजगार के नए अवसरों की आवश्यकता
बिहार की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए रोजगार सृजन राज्य की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक माना जाता है। कृषि, विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवा क्षेत्र में नए निवेश रोजगार के अवसरों का विस्तार कर सकते हैं।
साथ ही स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने से भी निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों की राय
श्रम बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि रोजगार पोर्टलों पर पंजीकरण की संख्या किसी राज्य की रोजगार क्षमता का एक संकेतक हो सकती है, लेकिन यह अकेला पैमाना नहीं है। वास्तविक स्थिति का आकलन उद्योगों में निवेश, नई भर्तियों, श्रम भागीदारी, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों जैसे कई अन्य कारकों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर नियोक्ताओं के पंजीकरण से जुड़े आंकड़े बिहार में निजी क्षेत्र की भागीदारी और औपचारिक रोजगार के अवसरों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में उद्योगों का विस्तार, निवेश को बढ़ावा, डिजिटल भर्ती व्यवस्था का व्यापक उपयोग और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने से रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अधिक से अधिक कंपनियों को डिजिटल रोजगार प्लेटफॉर्म से जोड़ने और युवाओं को औपचारिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार, उद्योग जगत और अन्य संस्थाएं किस प्रकार के कदम उठाती हैं।