सिमरी बख्तियारपुर का 'बड़ी दुर्गा स्थान': मंदिर के सामने लगा ट्रांसफार्मर बना मौत का जाल, पूजा समिति ने उठाई स्थानांतरित करने की मांग
सिमरी बख्तियारपुर: कोसी क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र, सिमरी बख्तियारपुर का ऐतिहासिक 'बड़ी दुर्गा स्थान' मंदिर इन दिनों न केवल अपनी भव्यता, बल्कि एक गंभीर खतरे के लिए भी चर्चा में है। मंदिर के मुख्य द्वार और श्रद्धालुओं के आवागमन के मार्ग के ठीक सामने लगा एक विशाल बिजली का ट्रांसफार्मर अब स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों के लिए 'मौत का जाल' बन गया है। दुर्गा पूजा समिति ने प्रशासन और विद्युत विभाग को चेतावनी देते हुए इस ट्रांसफार्मर को अविलंब हटाने की मांग की है, ताकि आगामी त्योहारों के दौरान कोई बड़ी अनहोनी न हो।
आस्था बनाम खतरा: क्या है पूरा मामला?
बड़ी दुर्गा स्थान सिमरी बख्तियारपुर की पहचान है। वर्ष भर यहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु माँ दुर्गा के दर्शन के लिए आते हैं। विशेषकर दुर्गा पूजा के दौरान यहाँ जनसैलाब उमड़ता है। पिछले कुछ समय से मंदिर के ठीक सामने लगा ट्रांसफार्मर जर्जर स्थिति में है। इसके नीचे से गुजरने वाले तारों का जंजाल और लटकते हुए तार किसी भी समय एक बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रांसफार्मर से अक्सर चिंगारियां निकलती रहती हैं, जिससे हर पल डर का माहौल बना रहता है। मंदिर परिसर में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक आते हैं, ऐसे में यह विद्युत उपकरण अब एक 'टाइम बम' की तरह व्यवहार कर रहा है।
दुर्गा पूजा समिति की चिंता: त्योहारों पर बढ़ेगा जोखिम
आगामी दुर्गा पूजा को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि पूजा के दौरान मंदिर के सामने सजावट, लाइट-साउंड और श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण जोखिम कई गुना बढ़ जाएगा। समिति के अध्यक्ष ने कहा:
"हमने कई बार विद्युत विभाग के कनीय अभियंता और अनुमंडल पदाधिकारी को पत्र लिखकर इस ट्रांसफार्मर को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। पूजा के दौरान यहां लाखों की भीड़ होती है। यदि कोई तार टूटकर भीड़ पर गिर गया, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?"
प्रशासनिक लापरवाही: बार-बार की अपीलें, कोई ठोस कार्रवाई नहीं
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर उन्होंने पिछले दो वर्षों में आधा दर्जन से अधिक बार आवेदन दिए हैं। हर बार विभाग की ओर से 'सर्वेक्षण करने' का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि जब कहीं कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तब प्रशासन हरकत में आता है, लेकिन समय रहते समाधान करने की इच्छाशक्ति किसी में नहीं है।
क्या हैं मुख्य खतरे?
जर्जर तार और चिंगारियां: ट्रांसफार्मर के तारों पर इंसुलेशन पूरी तरह खत्म हो चुका है, जो नमी या तेज हवाओं के दौरान अक्सर शॉर्ट सर्किट का कारण बनते हैं।
ऊंचाई का मानक न होना: यह ट्रांसफार्मर जमीन से इतनी कम ऊंचाई पर है कि कोई भी अनजाने में या भीड़ के दबाव में इसके संपर्क में आ सकता है।
भीड़भाड़ वाला इलाका: मंदिर के सामने वाली सड़क मुख्य बाजार की ओर जाती है, जिससे यहाँ हमेशा आवाजाही बनी रहती है।
प्रशासन से मांग: समय रहते जागे तंत्र
दुर्गा पूजा समिति और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
स्थानांतरण: ट्रांसफार्मर को मंदिर के मुख्य मार्ग से कम से कम 50-100 मीटर दूर किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।
अस्थायी सुरक्षा: जब तक शिफ्टिंग नहीं होती, तब तक ट्रांसफार्मर के चारों ओर सुरक्षा घेरा (फेंसिंग) और चेतावनी बोर्ड लगाया जाए।
स्थायी समाधान: विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले में हस्तक्षेप कर सुरक्षा मानकों की जांच करनी चाहिए।
जन-भागीदारी और भविष्य का डर
सिमरी बख्तियारपुर के जागरूक नागरिकों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि विभाग ने दुर्गा पूजा से पहले इस खतरे को नहीं हटाया, तो वे मंदिर के सामने धरना देने और सड़क जाम करने को मजबूर होंगे। लोगों का मानना है कि ‘पूजा का अवसर खुशियों का होता है, मौत का न्योता देने का नहीं।’
बड़ी दुर्गा स्थान केवल एक इमारत नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सामूहिक चेतना का हिस्सा है। एक ट्रांसफार्मर की वजह से हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को दांव पर लगाना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। विद्युत विभाग के लिए यह एक मामूली तकनीकी कार्य हो सकता है, लेकिन सिमरी बख्तियारपुर के निवासियों के लिए यह उनके अपनों की सुरक्षा का प्रश्न है।