श्रावणी मेला 2026: कच्ची कांवरिया मार्ग पर बोल बम के जयकारों से गूंजा इलाका; उमड़ी भारी भीड़, सेवा शिविरों और जमालपुर स्टेशन पर उमड़े श्रद्धालु
सहरसा/जमालपुर/सुल्तानगंज (बिहार): पवित्र सावन मास के पावन अवसर पर शुरू हुए विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले (Shravani Mela) के दौरान आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। भगवान शिव को श्रद्धासुमन अर्पित करने और उनका जलाभिषेक करने के लिए लाखों की संख्या में शिवभक्त (कांवरिया) सुल्तानगंज से उत्तर वाहिनी गंगा से जल भरकर देवघर (झारखंड) की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। श्रावणी मेले के इस उल्लासपूर्ण माहौल के बीच कांवरियों की भारी भीड़ भगवान शिव को जलाभिषेक करने के लिए सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले पारंपरिक 'कच्ची कांवरिया मार्ग' पर उमड़ पड़ी है, जिससे पूरा क्षेत्र 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा है।
'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस कठिन और लंबी यात्रा को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संस्थाएं कांवरियों की सेवा में दिन-रात जुटी हुई हैं। जगह-जगह निःशुल्क सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहाँ कांवरियों को भोजन, चिकित्सा, और विश्राम जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके साथ ही, रेल मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण जमालपुर रेलवे स्टेशन पर भी भारी भीड़ देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं श्रावणी मेले के इस भव्य आयोजन, कच्ची कांवरिया मार्ग की महत्ता, सेवा शिविरों के कार्यों और जमालपुर स्टेशन की व्यवस्थाओं का विस्तृत विवरण।
श्रावणी मेला और कच्ची कांवरिया मार्ग की महत्ता
सावन के महीने में बिहार के सुल्तानगंज स्थित उत्तर वाहिनी गंगे से जल उठाने के बाद कांवरिया सुल्तानगंज से बांका, कटोरिया और देवघर के रास्ते लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करते हैं।
कच्ची कांवरिया मार्ग का आकर्षण: पक्की सड़कों की दौड़-भाग से दूर, कांवरिया विशेष रूप से मिट्टी से बने 'कच्ची कांवरिया मार्ग' पर चलना पुण्यदायी मानते हैं। इस मार्ग पर नंगे पांव चलना और भगवान शिव का स्मरण करते हुए आगे बढ़ना भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक है।
भक्तिमय माहौल: इस मार्ग पर चारों तरफ केसरिया वस्त्र पहने शिवभक्तों का रेला नजर आता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भजन-कीर्तन और 'बोल बम' के जयकारों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं—हर वर्ग के श्रद्धालुओं में इस यात्रा को लेकर गजब का उत्साह देखा जा रहा है।
सेवा ही परमो धर्मः विभिन्न संस्थाओं द्वारा निःशुल्क सेवा शिविर
कच्ची कांवरिया मार्ग पर चलने वाले कांवरियों की सेवा के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आए स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय ग्रामीण बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
निःशुल्क भोजन और जलपान: कांवरियों के लिए जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया गया है, जहाँ उन्हें दिन-रात सात्विक भोजन, चाय, फल और पेयजल निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है।
चिकित्सा और स्वास्थ्य शिविर: लंबी पदयात्रा के दौरान कई बार कांवरियों के पैर में छाले पड़ जाते हैं या वे थकान और डिहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सेवा शिविरों में डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है, जो निःशुल्क दवाइयां, मलहम और प्राथमिक उपचार दे रही है।
विश्राम और ठहरने की व्यवस्था: रात के समय कांवरियों को विश्राम करने के लिए टेंट और धर्मशालाओं की पुख्ता व्यवस्था की गई है, ताकि वे अगले दिन की यात्रा तरोताजा होकर शुरू कर सकें।
जमालपुर स्टेशन पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
सड़क मार्ग के साथ-साथ रेल मार्ग से आने वाले शिवभक्तों की संख्या में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर जमालपुर रेलवे स्टेशन पर दिखाई दे रहा है।
यात्रियों का तांता: पूर्व मध्य रेल के अंतर्गत आने वाले जमालपुर जंक्शन पर देश के विभिन्न राज्यों से आने वाली ट्रेनों से उतरने वाले कांवरियों का तांता लगा हुआ है। स्टेशन परिसर से लेकर प्लेटफॉर्म तक हर तरफ केसरिया वस्त्रधारी श्रद्धालु ही नजर आ रहे हैं।
रेलवे और स्वयंसेवकों की व्यवस्था: भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जमालपुर स्टेशन पर सुरक्षा बलों (RPF और GRP) की अतिरिक्त तैनाती की गई है। इसके अलावा, स्टेशन परिसर में स्थानीय युवा संगठनों द्वारा कांवरियों के लिए सहायता केंद्र और जलपान की व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रशासनिक चौकसी और सुरक्षा प्रबंध
लाखों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी: कच्ची कांवरिया मार्ग और प्रमुख मेलों के पड़ाव स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।
पेयजल और स्वच्छता: प्रशासन द्वारा मार्ग पर लगातार साफ-सफाई और पेयजल टैंकरों की व्यवस्था की गई है ताकि महामारी या संक्रमण का कोई खतरा न उत्पन्न हो।
श्रावणी मेले के दौरान कच्ची कांवरिया मार्ग और जमालपुर स्टेशन पर उमड़ी यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति में आस्था और निष्ठा कितनी गहरी है। एक तरफ जहाँ शिवभक्त अपनी कठिन यात्रा को आस्था के बल पर पार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क सेवाएं 'वसुधैव कुटुंबकम' और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रही हैं। प्रशासन और समाज के इस समन्वित प्रयास से यह पावन मेला न केवल शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहा है, बल्कि हर श्रद्धालु के दिल में एक यादगार अनुभव छोड़ रहा है।