सेवानिवृत्त अधिकारी के घर चोरी से मची सनसनी; दूसरी ओर ‘स्मार्ट बिजली’ योजना का भविष्य अब भी फाइलों में कैद

भागलपुर: भागलपुर शहर से आज दो अलग-अलग महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं, जो एक ओर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती हैं, तो दूसरी ओर विकास कार्यों की कछुआ गति को उजागर करती हैं। जहाँ एक ओर पश्चिमी विक्रमशिला कॉलोनी में एक सेवानिवृत्त अधिकारी के घर को चोरों ने अपना निशाना बनाया है, वहीं दूसरी ओर शहर की बहुप्रतीक्षित 'अंडरग्राउंड बिजली वायरिंग' योजना अभी भी सरकारी गलियारों की फाइलों में उलझी हुई है।

पश्चिमी विक्रमशिला कॉलोनी में सेवानिवृत्त अधिकारी के घर चोरी

भागलपुर के पॉश इलाकों में शुमार पश्चिमी विक्रमशिला कॉलोनी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। यहाँ रहने वाले सीबीआई के सेवानिवृत्त अधिकारी त्रिपुरारी कुमार पांडेय के घर को चोरों ने अपना निशाना बनाया है। मिली जानकारी के अनुसार, अज्ञात चोरों ने उनके आवास में घुसकर चोरी की घटना को अंजाम दिया।

इस घटना के बाद न केवल पांडेय परिवार, बल्कि पूरे मोहल्ले में डर का माहौल व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सेवानिवृत्त अधिकारी के घर में हुई यह चोरी यह साबित करती है कि शहर में अपराधी बेखौफ हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मामले की जांच में जुट गई है, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड की मदद से सबूत जुटाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे प्रशासनिक अधिकारियों और सेवानिवृत्त उच्च पदस्थ अधिकारियों के घरों को भी सुरक्षित नहीं छोड़ रहे हैं। कॉलोनी में हुई इस चोरी ने पुलिस की गश्ती और सतर्कता व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

भागलपुर की ‘स्मार्ट बिजली’ योजना: कब होगा तारों के मकड़जाल से मुक्ति?

एक तरफ जहाँ शहरवासी अपराध की घटनाओं से त्रस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर की बिजली व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने वाली महत्वाकांक्षी 'अंडरग्राउंड बिजली वायरिंग' योजना 11 महीनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी केवल कागजी फाइलों तक सीमित है।

योजना की प्रमुख बातें:

बजट और विस्तार: इस परियोजना के तहत शहर की मुख्य सड़कों और तंग गलियों में लगभग 355 किलोमीटर दूरी तक बिजली के तारों को भूमिगत किया जाना है। इसके लिए 301.58 करोड़ रुपये का विस्तृत बजट (DPR) तैयार कर कई महीने पहले ही मंजूरी के लिए भेजा गया था।

पटना से तुलना: सबसे निराशाजनक बात यह है कि बिहार के अन्य बड़े शहरों, जैसे पटना, को इस तरह की परियोजनाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है और वहां काम भी शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर, भागलपुर के हिस्से में अब तक सिर्फ आश्वासन और तारीखों का खेल ही आया है।

सुरक्षा और सुंदरता का लाभ: यदि यह योजना धरातल पर उतरती है, तो 33 हजार और 11 हजार वोल्ट के हाई-टेंशन तार जमीन के नीचे चले जाएंगे। इससे न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि मानसून और आंधी-तूफान के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी। साथ ही, बिजली के खंभों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं व यातायात की बाधाओं से भी शहर को राहत मिलेगी।

प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा आक्रोश

हाल ही में विश्व बैंक की एक उच्च स्तरीय टीम ने भी भागलपुर का दौरा कर विभिन्न विकास योजनाओं का जायजा लिया था, जिसमें बिजली तारों को अंडरग्राउंड करने के प्रस्ताव पर सहमति बनी थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कई बार बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों को जल्द से जल्द प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दिलाने और काम शुरू करने का निर्देश दिया है।

बावजूद इसके, फाइलें एक मेज से दूसरी मेज तक घूम रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका है। भागलपुर के नागरिक अब इस बात को लेकर बेहद आक्रोशित हैं कि आखिर कब तक उनके शहर को केवल कागजी योजनाओं से ही बहलाया जाएगा। शहर में आए दिन ओवरहेड तारों में शॉर्ट-सर्किट की घटनाएं होती रहती हैं, जिससे कई बार आगजनी और जान-माल का नुकसान भी हुआ है, फिर भी जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है।

प्रशासन को लेनी होगी सुध

भागलपुर एक ओर बढ़ते अपराध और सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर वर्षों से लटकी विकास योजनाएं शहर के आधुनिकीकरण में बाधक बनी हुई हैं। नागरिकों की मांग है कि त्रिपुरारी कुमार पांडेय के घर हुई चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस को अपनी रात्रि गश्ती तेज करनी चाहिए और अपराधी तत्वों में खौफ पैदा करना चाहिए।

साथ ही, सरकार और बिजली विभाग को यह समझना होगा कि 'अंडरग्राउंड बिजली परियोजना' केवल एक सौंदर्यीकरण की योजना नहीं है, बल्कि यह भागलपुर के निवासियों की सुरक्षा और निर्बाध बिजली आपूर्ति की एक अनिवार्य आवश्यकता है। समय आ गया है कि इस परियोजना को फाइलों से बाहर निकाल कर धरातल पर उतारा जाए, अन्यथा यह शहर विकास की दौड़ में पिछड़ता ही चला जाएगा।