मार्ग परिवर्तन से पूर्णिया और कटिहार के यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें; बढ़ा हुआ किराया और अतिरिक्त समय बना जी का जंजाल, आम जनता त्रस्त
विशेष संवाददाता, पूर्णिया/कटिहार/मुंगेर: बिहार के सीमांचल क्षेत्र के दो प्रमुख जिलों — पूर्णिया और कटिहार — से मुंगेर और दक्षिण बिहार की ओर यात्रा करने वाले आम नागरिकों, दैनिक यात्रियों और व्यवसायियों को इन दिनों भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। मुंगेर रेल सह सड़क सेतु (श्रीकृष्ण सेतु) के आसपास या संपर्क पथों पर आवागमन से जुड़े बदलावों और मार्ग परिवर्तन (डाइवर्टेड रूट) के कारण यात्रा का दायरा काफी बढ़ गया है। स्थिति यह है कि यात्रियों को अब न केवल अपनी जेब ढीली कर अधिक भाड़ा (Fare Hike) चुकाना पड़ रहा है, बल्कि उनके कीमती समय की भी भारी बर्बादी हो रही है। इस समस्या को लेकर यात्रियों और स्थानीय ट्रांसपोर्ट संगठनों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला? क्यों बढ़ी यात्रियों की परेशानी
पूर्णिया और कटिहार से मुंगेर, लखीसराय, बेगूसराय या दक्षिण बिहार जाने वाली बसों और छोटे वाहनों को अक्सर मुंगेर सेतु का उपयोग करना पड़ता है। हाल के दिनों में यातायात प्रबंधन, सड़क मरम्मत या प्रशासनिक कारणों से रूट में किए गए बदलावों के कारण वाहनों को लंबे फेरबदल वाले रास्तों से गुजरना पड़ रहा है:
दूरी का बढ़ना: रूट डायवर्जन के कारण वाहनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सामान्य से कई किलोमीटर अधिक की दूरी तय करनी पड़ रही है। अतिरिक्त दूरी तय करने के कारण बस और टैक्सी चालकों ने यात्रियों से मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया है।
समय की भारी बर्बादी: जहां पहले एक निश्चित समय सीमा में लोग अपनी यात्रा पूरी कर लेते थे, वहीं अब लंबे और वैकल्पिक रास्तों से जाने के कारण यात्रा के समय में 2 से 3 घंटे तक की अतिरिक्त वृद्धि हो गई है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, व्यापारी और मरीजों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्णिया और कटिहार के यात्रियों का दर्द: जेब और समय दोनों पर भारी मार
पूर्णिया बस स्टैंड और कटिहार मुख्य चौक पर यात्रा कर रहे आम लोगों ने अपनी पीड़ा खुलकर साझा की:
बजट पर असर: पूर्णिया के एक दैनिक यात्री ने बताया कि पहले जहां मुंगेर या उस पार जाने के लिए एक तयशुदा किराया लगता था, वहीं अब बस संचालक और कैब ड्राइवर रूट लंबा होने का हवाला देकर डेढ़ गुना तक किराया वसूल रहे हैं। महंगाई के इस दौर में बढ़ा हुआ यह किराया आम आदमी के बजट को पूरी तरह बिगाड़ रहा है।
व्यापारिक नुकसान: कटिहार के व्यापारियों का कहना है कि मुंगेर और बेगूसराय के साथ उनका नियमित व्यापारिक लेन-देन है। माल ढोने वाले छोटे-बड़े वाहनों को लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे ट्रांसपोर्ट लागत (Transportation Cost) काफी बढ़ गई है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों पर भी पड़ रहा है।
परिवहन संघ और चालकों की मजबूरियां
दूसरी ओर, बस और ऑटो/टैक्सी ऑपरेटर्स यूनियन का कहना है कि वे भी इस स्थिति से उतने ही परेशान हैं जितने कि यात्री:
डीजल और मेंटेनेंस का खर्च: ट्रांसपोर्ट यूनियन के पदाधिकारियों का तर्क है कि जब वाहन लंबे मार्गों से होकर गुजरेंगे, तो डीजल की खपत अपने आप बढ़ जाएगी। इसके अलावा, खराब सड़कों या लंबे फेरे के कारण गाड़ियों के रखरखाव का खर्च भी काफी बढ़ जाता है। ऐसे में बिना किराया बढ़ाए वाहन चलाना संचालकों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
प्रशासनिक उदासीनता: चालकों का आरोप है कि यदि प्रशासन समय रहते संपर्क पथों की दुरुस्ती और यातायात सुगमता की दिशा में ठोस कदम उठाए, तो इस समस्या से निजात मिल सकती है।
मुंगेर सेतु के पास मार्ग परिवर्तन के कारण पूर्णिया और कटिहार के यात्रियों को हो रही यह असुविधा अब एक गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दा बनती जा रही है। यात्रियों, बुद्धिजीवियों और व्यापारिक संगठनों ने जिला प्रशासन और सड़क परिवहन विभाग से पुरजोर मांग की है कि इस रूट की समस्याओं का त्वरित समाधान निकाला जाए। यदि समय रहते वैकल्पिक मार्गों को सुचारू नहीं किया गया और किराए की मनमानी पर लगाम नहीं लगी, तो सीमांचल के लोगों का यह सफर और अधिक कष्टदायक हो जाएगा।